धनतेरस पर यम दीपदान की सही तिथि और शाम का शुभ समय, जानें चौमुखा दिया रखने का नियम कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए यमराज के नाम चौमुखा दीपक जलाने का विधान है। जानिए दीपदान का समय, दिशा और पूरी पूजन विधि। दिवाली महापर्व की शुरुआत के साथ कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर दीपदान की विशेष परंपरा निभाई जाती है। इस तिथि को आमतौर पर धनतेरस कहा जाता है, जिस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी, समृद्धि के संरक्षक कुबेर देवता और आरोग्य के दाता भगवान धन्वंतरि की आराधना होती है। इसी पावन संध्या को मृत्यु के अधिपति यमराज की प्रसन्नता के लिए दीप प्रज्वलित करने का नियम है। सनातन मान्यताओं के मुताबिक संध्याकाल में यह दीपदान करने से घर के सदस्यों को असमय काल के ग्रास में जाने का संशय या भय नहीं सताता। धार्मिक परंपराओं में इस अनुष्ठान को यम दीपम अथवा यम दीपदान के नाम से पहचाना जाता है। तिथि के विस्तार और प्रदोष काल के संयोग के चलते सही समय का चयन बेहद अहम माना गया है। यम दीपदान की तिथि और त्रयोदशी का विस्तार साल 2026 में यम दीपक प्रज्वलित करने का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार के दिन पड़ रहा है। पंचांग गणना के आधार पर कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का आरंभ 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे से होगा। यह तिथि अगले दिन यानी 7 नवंबर की सुबह 10:47 बजे तक प्रभावी रहेगी। चूंकि यमराज के निमित्त दीपदान प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद की वेला में किया जाता है, इसलिए 6 नवंबर की संध्या को ही दीपदान करना शास्त्रसम्मत माना गया है। अगले दिन त्रयोदशी सुबह ही समाप्त हो जाएगी, जिससे शाम का पूजन 6 नवंबर को ही मान्य रहेगा। शाम को दीप प्रज्वलित करने का शुभ मुहूर्त घर की दहलीज पर यम दीपक रखने के लिए शाम का एक निश्चित समय निर्धारित है। 6 नवंबर 2026 को यम दीपक निकालने का शुभ मुहूर्त शाम 05:33 बजे से शुरू होकर शाम 06:51 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे लगभग 1 घंटे 18 मिनट की इस समय सीमा के भीतर ही पूजन संपन्न कर दीपक स्थापित करें। सूर्यास्त के तुरंत बाद का यह समय नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने और सुख-शांति की प्रार्थना के लिए सबसे अनुकूल माना गया है। दीपक तैयार करने और स्थापित करने की चरणबद्ध विधि यम दीपदान की प्रक्रिया साधारण पूजा से थोड़ी भिन्न होती है और इसमें दिशा व सामग्री का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस अनुष्ठान को पूर्ण करने के नियम इस प्रकार हैं • सबसे पहले धनतेरस की शाम को परिवार सहित माता लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान धन्वंतरि की विधिवत पूजा अर्चना पूरी कर लें। • मुख्य देव पूजन के पश्चात यमराज के निमित्त एक बड़ा चौमुखा दीपक तैयार करें। • इस दीपक में सरसों का तेल अथवा तिल का तेल भरें और चार अलग-अलग बत्तियां लगाएं ताकि चारों दिशाओं में लौ प्रज्वलित हो सके। • घर की मुख्य चौखट पर दीपक स्थापित करने से पहले जमीन पर थोड़े से साबुत अक्षत यानी कच्चे चावल का आसन अवश्य बनाएं। • दीपक को अक्षत के ऊपर इस प्रकार रखें कि उसकी मुख्य लौ दक्षिण दिशा की तरफ संकेत कर रही हो। • दीपक प्रज्वलित करने के उपरांत दोनों हाथ जोड़कर यमराज का स्मरण करें और अपने परिजनों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा अकाल मृत्यु से सुरक्षा का वरदान मांगें। दीपदान के समय जपने योग्य विशेष मंत्र दीपक की स्थापना करते समय श्रद्धापूर्वक इस पौराणिक श्लोक का उच्चारण करने का विधान बताया गया है मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह. त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥ इस मंत्र का भावार्थ है कि त्रयोदशी तिथि पर दीपदान करने से मृत्यु, काल और यम के पाश से मुक्ति मिले तथा सूर्यपुत्र यमराज प्रसन्न होकर साधक के कुल की रक्षा करें। अकाल मृत्यु टलने की पौराणिक कथा धनतेरस पर यम देवता की अर्चना के पीछे राजा हेम के पुत्र से जुड़ी एक रोचक पौराणिक गाथा प्रचलित है। कथा के अनुसार राजकुमार की जन्म कुंडली में विवाह के ठीक चौथे दिन मृत्यु का योग बना हुआ था। नियत समय पर जब यमराज के दूत उनके प्राण हरने के लिए महल पहुंचे, तो राजकुमार की नवविवाहिता पत्नी ने युक्ति निकाली। उन्होंने पूरे भवन को दीपों की रोशनी से जगमग कर दिया और मुख्य द्वार पर विशेष दीपक जलाकर यमदूतों का ध्यान भटका दिया। पूरी रात यमराज के नाम का चौमुखा दीपक प्रज्वलित रहने के कारण दूत भीतर प्रवेश नहीं कर सके और राजकुमार को नवजीवन प्राप्त हुआ। तभी से लोक परंपरा में यह विश्वास दृढ़ हो गया कि धनतेरस की गोधूलि वेला में यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु का संकट दूर रहता है। इसका आप पर असर धनतेरस की शाम यम दीपक जलाने की परंपरा परिवार के कल्याण और मानसिक शांति से जुड़ी है। • पूजा का समय: श्रद्धालुओं को 6 नवंबर 2026 की शाम 05:33 से 06:51 बजे के बीच दीपदान संपन्न करना होगा। सही समय पर दीपक जलाने से पूजा विधान सम्मत मानी जाती है। • सामग्री की तैयारी: अनुष्ठान के लिए चौमुखा दीपक, चार बत्तियां, तिल या सरसों का तेल और साबुत अक्षत पहले से जुटा लें। समय रहते प्रबंध करने से गोधूलि वेला में हड़बड़ी नहीं होगी। • दिशा का ध्यान: दीपक का मुख अनिवार्य रूप से दक्षिण दिशा की ओर रखा जाना चाहिए। शास्त्र सम्मत दिशा में दिया रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहने का विश्वास है। • तिथि का समन्वय: 7 नवंबर की सुबह त्रयोदशी समाप्त हो रही है, इसलिए संध्या दीपदान 6 नवंबर को ही करना होगा। इस स्पष्टता से दो अलग दिनों को लेकर भ्रम खत्म हो जाता है। ऐसा क्यों हुआ यम दीपक जलाने की परंपरा धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और खगोलीय पंचांग काल के समन्वय पर आधारित है। • पौराणिक कारण: राजा हेम के पुत्र को विवाह के चौथे दिन मृत्यु से बचाने के लिए उनकी पत्नी ने पूरी रात दीपक जलाकर रखा था। इस घटना के बाद से धनतेरस पर यम के निमित्त दीपदान का नियम स्थापित हुआ। • आध्यात्मिक मान्यता: धार्मिक विश्वास के अनुसार दक्षिण दिशा के स्वामी यमराज हैं और उन्हें दीप अर्पित करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। इसी कारण चौमुखा दिया दक्षिण मुखी रखा जाता है। • तिथि का निर्धारण: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह से शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह तक ही व्याप्त है। प्रदोष काल शाम को केवल 6 नवंबर को मिलने के कारण इसी दिन दीपदान सुनिश्चित हुआ। सवाल-जवाब 1. वर्ष 2026 में यम दीपक किस दिन निकाला जाएगा? यम दीपक 6 नवंबर 2026, शुक्रवार के दिन शाम को निकाला जाएगा। 2. यम दीपक प्रज्वलित करने का शुभ समय क्या है? दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर की शाम 05:33 बजे से 06:51 बजे तक रहेगा। 3. दीपक में किस तेल का प्रयोग करना चाहिए? यम दीपक में सरसों का तेल अथवा तिल का तेल डालकर चार बत्तियां लगाई जाती हैं। 4. दीपक को किस दिशा की ओर मुख करके रखना चाहिए? दीपक को मुख्य द्वार पर अक्षत के ऊपर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है। 5. धनतेरस पर यमराज के लिए दीपदान क्यों किया जाता है? धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दीपदान परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से सुरक्षित रखता है। https://trendkia.com/religion/dhanteras-para-yam-deepak-ki-sahi-tithi-aura-shama-ka-shubha-samaya-janen-chaumukha-diya-rakhane-ka-niyama-56861 TrendKia — Har trend, sabse pehle.