{
  "type": "article",
  "title": "धनतेरस से पहले मनाया जाएगा वसु बारस, जानिए पूजन का सही समय और परंपरा",
  "summary": "गोवत्स द्वादशी का पर्व 5 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा, जिसकी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:33 से रात 08:10 बजे तक रहेगा। संतान की लंबी आयु और खुशहाली के लिए इस दिन गाय और बछड़े की विशेष पूजा की जाती है।",
  "content": "दीपावली के महापर्व की औपचारिक शुरुआत धनतेरस से मानी जाती है, लेकिन धार्मिक परंपराओं में उससे ठीक एक दिन पहले गोवत्स द्वादशी का पावन व्रत रखने का विधान है। इस विशेष दिन को देश के अलग-अलग हिस्सों में वसु बारस, बछ बारस और नन्दिनी व्रत के नाम से भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। मूल रूप से यह पर्व गौ माता और उनके बछड़ों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी विधिपूर्वक सेवा-अर्चना करने का अवसर होता है। भारतीय संस्कृति के कई क्षेत्रों में गोवत्स द्वादशी के समान ही एक अन्य त्योहार बछ बारस नाम से मनाया जाता है, जो इस तिथि से लगभग दो महीने पहले पड़ता है। दोनों ही अवसरों पर गायों और बछड़ों की पूजा का विधान है, लेकिन कार्तिक मास की यह द्वादशी विशेष फलदायी मानी जाती है।\n\nगोवत्स द्वादशी 2026 की सही तिथि और समय\nपंचांग की गणना के अनुसार इस वर्ष गोवत्स द्वादशी अथवा वसु बारस का पर्व 5 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। तिथि की शुरुआत 5 नवंबर की सुबह 10:35 बजे से होगी और यह अगले दिन 6 नवंबर 2026 की सुबह 10:30 बजे तक प्रभावी रहेगी। ऐसे में उदयातिथि और प्रदोष काल के संयोग के आधार पर व्रत और पूजा की समस्त विधियां 5 नवंबर को ही संपन्न की जाएंगी। जो श्रद्धालु इस पावन अवसर पर उपवास रखते हैं, उन्हें तिथि की इसी समय-सारणी का ध्यान रखना चाहिए ताकि पूजन पूरी निष्ठा और शास्त्रसम्मत नियमों के तहत संपन्न हो सके।\n\nशाम के समय पूजा का शुभ मुहूर्त\nगोवत्स द्वादशी पर विशेष पूजन सायंकाल यानी प्रदोष काल में करने की परंपरा है। इस वर्ष 5 नवंबर 2026 को पूजा का अत्यंत शुभ मुहूर्त शाम 05:33 बजे से आरंभ होगा और रात 08:10 बजे तक बना रहेगा। श्रद्धालुओं को कुल 2 घंटे 37 मिनट की अवधि इस अनुष्ठान के लिए प्राप्त होगी। इस निर्धारित समय के दौरान गौ माता और उनके बछड़े की पूजा-अर्चना करना सबसे फलदायी और कल्याणकारी माना गया है।\n\nघर पर कैसे करें गोवत्स द्वादशी की पूजा विधि\nगोवत्स द्वादशी के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद गौ माता और उनके बछड़े का पूजन विधि-विधान से शुरू किया जाता है। पूजा की व्यवस्थित प्रक्रिया इस प्रकार अपनाई जाती है\n\n• यदि घर में गाय और बछड़ा उपलब्ध हैं, तो उन्हें स्वच्छ जल से नहलाकर उनका सुंदर शृंगार करना चाहिए।\n• जिन घरों में वास्तविक गाय और बछड़ा उपलब्ध नहीं हैं, वे मिट्टी अथवा धातु की मूर्ति स्थापित कर सकते हैं या उनका सुंदर चित्र बनाकर पूजन कर सकते हैं।\n• गौ माता और बछड़े के मस्तक पर हल्दी और कुमकुम का तिलक लगाना चाहिए। इसके साथ ही अक्षत, रोली, सुगंधित धूप, दीप, फल, मिष्टान्न और नैवेद्य अर्पित कर विधिवत अर्चना करनी चाहिए।\n• पूजन संपन्न होने के पश्चात गाय और बछड़े को श्रद्धापूर्वक मीठा चारा, गुड़ और भीगे हुए चने खिलाने चाहिए।\n• व्रती को पूरे दिन उपवास का पालन करते हुए यथासंभव गाय की सेवा और ध्यान में समय बिताना चाहिए।\n• शाम के समय शुभ मुहूर्त में पुनः एकत्रित होकर विधिवत पूजा करनी चाहिए और इस दौरान गोवत्स द्वादशी की पावन व्रत कथा का श्रवण अनिवार्य रूप से करना चाहिए।\n• सायंकालीन पूजन और कथा श्रवण के उपरांत ही व्रती महिलाएं अपना भोजन ग्रहण करती हैं।\n\nपर्व का धार्मिक महत्व और विशेष नियम\nधार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोवत्स द्वादशी का व्रत रखने से व्रती की संतान को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन की प्राप्ति होती है। संतान की उन्नति और सुरक्षा की कामना के लिए माताएं इस दिन निर्जल अथवा फलाहार व्रत रखती हैं। इस उत्सव में धन के अधिपति देवता वसु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जिसके कारण इसे लोक परंपरा में वसु बारस कहा जाता है। इस दिन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा नियम भी है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह दिन गौ माता के विश्राम का समय माना जाता है, इसलिए गोवत्स द्वादशी के पूरे दिन गाय के दूध और उससे निर्मित किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन पूरी तरह वर्जित रहता है। श्रद्धालु दही, मक्खन, घी या गाय के दूध की मिठाइयों का प्रयोग इस दिन अपने भोजन में बिल्कुल नहीं करते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nगोवत्स द्वादशी का व्रत रखने वाले परिवारों को पूजा के शुभ मुहूर्त और खानपान से जुड़े पारंपरिक नियमों का विशेष ध्यान रखना होगा।\n\n• व्रत की तिथि: गोवत्स द्वादशी 5 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार यह तिथि 5 नवंबर की सुबह 10:35 से 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे तक रहेगी।\n• पूजा का समय: शाम के पूजन के लिए 05:33 से रात 08:10 बजे तक का समय निर्धारित है। व्रती महिलाओं को इसी 2 घंटे 37 मिनट की अवधि में अपनी पूजा संपन्न करनी होगी।\n• आहार से जुड़ा नियम: इस दिन गाय के दूध और उससे बनी चीजों का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है। व्रतियों और परिजनों को इस पावन तिथि पर दूध, दही या घी के उपयोग से बचना चाहिए।\n• संतान की कामना: यह व्रत विशेष रूप से बच्चों की लंबी उम्र और सुखद भविष्य के लिए रखा जाता है। माताएं अपने बच्चों की उन्नति और कुशलता की प्रार्थना के साथ यह अनुष्ठान करती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nगोवत्स द्वादशी को धनतेरस से पूर्व गायों के सम्मान और संतान की सुरक्षा के उद्देश्य से धार्मिक परंपरा के रूप में मनाया जाता है।\n\n• मातृत्व और गौ सेवा का सम्मान: यह त्योहार मुख्य रूप से गाय और उसके बछड़े के आपसी स्नेह और सेवा को समर्पित है। समाज में पशुधन और गौ माता के योगदान के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए यह पूजा की जाती है।\n• संतान की दीर्घायु का विश्वास: शास्त्रों में मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतानों पर आने वाले संकट दूर होते हैं। इसी धार्मिक विश्वास के चलते माताएं प्रतिवर्ष यह व्रत निष्ठापूर्वक रखती हैं।\n• धन के अधिपति वसु की आराधना: इस दिन धन के संरक्षक देवता वसु की पूजा का विधान है। इसी परंपरा के आधार पर इस तिथि का नाम लोक व्यवहार में वसु बारस प्रचलित हुआ।\n• दूध के त्याग की परंपरा: मान्यता है कि यह दिन गौ माता को विश्राम देने के लिए निर्धारित है। बछड़े के अधिकार का सम्मान करते हुए इस दिन मनुष्य गाय के दूध का उपयोग नहीं करते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. वर्ष 2026 में गोवत्स द्वादशी किस तारीख को है?\nगोवत्स द्वादशी का पर्व इस साल 5 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।\n\n2. द्वादशी तिथि कब से कब तक रहेगी?\nयह तिथि 5 नवंबर की सुबह 10:35 बजे से शुरू होकर 6 नवंबर 2026 की सुबह 10:30 बजे तक रहेगी।\n\n3. गोवत्स द्वादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?\nपूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:33 बजे से शुरू होकर रात 08:10 बजे तक रहेगा।\n\n4. इस पर्व को अन्य किन नामों से जाना जाता है?\nइसे वसु बारस, बछ बारस और नन्दिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।\n\n5. गोवत्स द्वादशी के दिन किस चीज का सेवन वर्जित होता है?\nइस दिन गाय का दूध और उससे निर्मित किसी भी पदार्थ का सेवन करना पूरी तरह वर्जित माना गया है।\n\n6. यह व्रत मुख्य रूप से किस उद्देश्य से रखा जाता है?\nयह व्रत संतान की उन्नति, खुशहाली और दीर्घायु की कामना के लिए रखा जाता है।",
  "url": "https://trendkia.com/religion/dhanteras-se-pehle-manaya-jayega-vasu-baras-janiye-pujan-ka-sahi-samay-aur-parampara-54669",
  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-11-02",
  "tags": [
    "गोवत्स द्वादशी",
    "वसु बारस",
    "बछ बारस",
    "नन्दिनी व्रत",
    "पूजा विधि",
    "शुभ मुहूर्त",
    "धनतेरस"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia",
  "whatItMeansForYou": "गोवत्स द्वादशी का व्रत रखने वाले परिवारों को पूजा के शुभ मुहूर्त और खानपान से जुड़े पारंपरिक नियमों का विशेष ध्यान रखना होगा।\n\n• व्रत की तिथि: गोवत्स द्वादशी 5 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार यह तिथि 5 नवंबर की सुबह 10:35 से 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे तक रहेगी।\n• पूजा का समय: शाम के पूजन के लिए 05:33 से रात 08:10 बजे तक का समय निर्धारित है। व्रती महिलाओं को इसी 2 घंटे 37 मिनट की अवधि में अपनी पूजा संपन्न करनी होगी।\n• आहार से जुड़ा नियम: इस दिन गाय के दूध और उससे बनी चीजों का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है। व्रतियों और परिजनों को इस पावन तिथि पर दूध, दही या घी के उपयोग से बचना चाहिए।\n• संतान की कामना: यह व्रत विशेष रूप से बच्चों की लंबी उम्र और सुखद भविष्य के लिए रखा जाता है। माताएं अपने बच्चों की उन्नति और कुशलता की प्रार्थना के साथ यह अनुष्ठान करती हैं।",
  "whyItHappened": "गोवत्स द्वादशी को धनतेरस से पूर्व गायों के सम्मान और संतान की सुरक्षा के उद्देश्य से धार्मिक परंपरा के रूप में मनाया जाता है।\n\n• मातृत्व और गौ सेवा का सम्मान: यह त्योहार मुख्य रूप से गाय और उसके बछड़े के आपसी स्नेह और सेवा को समर्पित है। समाज में पशुधन और गौ माता के योगदान के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए यह पूजा की जाती है।\n• संतान की दीर्घायु का विश्वास: शास्त्रों में मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतानों पर आने वाले संकट दूर होते हैं। इसी धार्मिक विश्वास के चलते माताएं प्रतिवर्ष यह व्रत निष्ठापूर्वक रखती हैं।\n• धन के अधिपति वसु की आराधना: इस दिन धन के संरक्षक देवता वसु की पूजा का विधान है। इसी परंपरा के आधार पर इस तिथि का नाम लोक व्यवहार में वसु बारस प्रचलित हुआ।\n• दूध के त्याग की परंपरा: मान्यता है कि यह दिन गौ माता को विश्राम देने के लिए निर्धारित है। बछड़े के अधिकार का सम्मान करते हुए इस दिन मनुष्य गाय के दूध का उपयोग नहीं करते हैं।",
  "questionsAndAnswers": [
    {
      "question": "वर्ष 2026 में गोवत्स द्वादशी किस तारीख को है?",
      "answer": "गोवत्स द्वादशी का पर्व इस साल 5 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।"
    },
    {
      "question": "द्वादशी तिथि कब से कब तक रहेगी?",
      "answer": "यह तिथि 5 नवंबर की सुबह 10:35 बजे से शुरू होकर 6 नवंबर 2026 की सुबह 10:30 बजे तक रहेगी।"
    },
    {
      "question": "गोवत्स द्वादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?",
      "answer": "पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:33 बजे से शुरू होकर रात 08:10 बजे तक रहेगा।"
    },
    {
      "question": "इस पर्व को अन्य किन नामों से जाना जाता है?",
      "answer": "इसे वसु बारस, बछ बारस और नन्दिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।"
    },
    {
      "question": "गोवत्स द्वादशी के दिन किस चीज का सेवन वर्जित होता है?",
      "answer": "इस दिन गाय का दूध और उससे निर्मित किसी भी पदार्थ का सेवन करना पूरी तरह वर्जित माना गया है।"
    },
    {
      "question": "यह व्रत मुख्य रूप से किस उद्देश्य से रखा जाता है?",
      "answer": "यह व्रत संतान की उन्नति, खुशहाली और दीर्घायु की कामना के लिए रखा जाता है।"
    }
  ]
}