# दीपावली पूजन में लक्ष्मी जी को कमल अर्पित करते समय इन नियमों का रखें ध्यान

> दीपावली पर माता लक्ष्मी की आराधना में कमल पुष्प का विशेष महत्व माना गया है, जिसे अर्पित करते समय स्वच्छता और शुद्धता से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/dipavali-pujana-men-lakshmi-ji-ko-kamala-arpita-karate-samaya-ina-niyamon-ka-rakhen-dhyana-56212 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिवाली 2026, लक्ष्मी पूजा, कमल का फूल, दीपावली पूजन विधि, हिंदू त्योहार, धार्मिक मान्यताएं

दीपावली का पावन पर्व 8 नवंबर 2026 को पूरे उल्लास के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक परंपराओं में इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की विधिवत उपासना का विधान है। ऐसी मान्यता है कि दीप पर्व के अवसर पर धन की देवी माता लक्ष्मी स्वयं पृथ्वी लोक का भ्रमण करती हैं और अपने साधकों पर कृपा बरसाती हैं। इस पावन अवसर पर देवी की कृपा पाने के लिए घरों को सुंदर झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। पूजा कक्ष से लेकर घर के आंगन तक विशेष स्वच्छता और सजावट की जाती है, ताकि मां लक्ष्मी का स्वागत पूरे सम्मान और वैदिक रीति से हो सके।

## लक्ष्मी पूजन में कमल पुष्प का धार्मिक महत्व
मां लक्ष्मी की पूजा में कमल के फूल को अनिवार्य सामग्री माना जाता है, क्योंकि यह पुष्प देवी को अत्यंत प्रिय है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों में मां लक्ष्मी को 'कमला' और 'कमलासना' नामों से भी संबोधित किया गया है, जिसका सीधा अर्थ कमल पर आसीन होने वाली देवी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी लक्ष्मी का प्राकट्य भी कमल पुष्प से ही हुआ था। इसी कारण लक्ष्मी पूजन के समय 'अष्टकमल' यानी 8 कमल के फूल अर्पित करने की विशेष परंपरा मानी गई है। यदि किसी कारणवश 8 कमल पुष्प उपलब्ध न हो सकें, तो साधक श्रद्धापूर्वक 1 कमल का फूल भी चढ़ा सकते हैं। माना जाता है कि दीपावली पर माता को कमल अर्पित करने से परिवार में सुख, समृद्धि, शांति और परस्पर प्रेम बना रहता है।

## मुरझाए और बासी फूल अर्पित करने से बचें
दीपावली की पूजा के दौरान पुष्प चयन में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। मां लक्ष्मी के पूजन में कभी भी बासी अथवा मुरझाए हुए कमल के फूल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पूजा की थाली में केवल वही कमल शामिल करें, जो पूरी तरह से ताजा हो और जिसकी पंखुड़ियां स्वाभाविक रूप से खिली हुई हों। निष्प्राण या मुरझाए फूल चढ़ाने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।

## कटे-फटे और खंडित फूलों का न करें चयन
बाजार से पूजन सामग्री लाते समय कमल के फूल की बनावट को भली-भांति जांच लेना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करें कि फूल की पंखुड़ियां कहीं से फटी या कटी हुई न हों। इसके अतिरिक्त फूल के भीतर किसी प्रकार का कीट या कीड़ा मौजूद न हो, यह भी ध्यानपूर्वक देखना चाहिए। धार्मिक विधान में खंडित अथवा दोषयुक्त फूल को अशुद्ध माना जाता है, इसलिए ऐसे पुष्प देवी के चरणों में अर्पित करने से बचना चाहिए।

## जल से शुद्धिकरण और पवित्र स्थान पर रखना
कमल का फूल बाजार से घर लाने के पश्चात उसे सीधे पूजन स्थल पर नहीं रखना चाहिए। सबसे पहले स्वच्छ और पवित्र जल से फूल का प्रक्षालन करें। धोने के उपरांत ही इसे पूजा घर के किसी शुद्ध स्थान पर स्थापित करें। बिना धुले या अशुद्ध स्थान पर रखे गए पुष्प को पूजा में उपयोग करना अनुचित माना जाता है, इसलिए शुद्धिकरण का नियम अवश्य अपनाएं।

## पवित्र भाव और अर्पण करने की सही विधि
मां लक्ष्मी की साधना में बाह्य स्वच्छता के साथ-साथ आंतरिक भाव का शुद्ध होना भी बेहद आवश्यक है। कमल पुष्प चढ़ाते समय साधक का मन पूर्णतया शांत, एकाग्र और भक्तिभाव से परिपूर्ण होना चाहिए। अत्यंत श्रद्धा के साथ यह पुष्प माता लक्ष्मी के श्रीचरणों में समर्पित करें। इसे देवी के आसन के निकट सजाया जा सकता है अथवा उनके करकमलों में सुशोभित किया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
दीपावली पूजन की तैयारी करने वाले श्रद्धालुओं के लिए कमल पुष्प के चयन और अर्पण से जुड़ी आवश्यक सावधानियां ध्यान में रखना जरूरी है।

- **पूजा सामग्री की योजना:** बाजार से पूजा सामग्री खरीदते समय 8 अथवा कम से कम 1 ताजा कमल पुष्प अवश्य शामिल करें। इससे पूजन की आवश्यक परंपरा बिना किसी असुविधा के समय पर पूरी की जा सकती है।
- **पुष्प चयन की सावधानी:** खरीदारी के समय पंखुड़ियों की जांच कर लें ताकि कटे-फटे या कीड़े वाले फूल घर न आएं। ऐसा करने से पूजन के समय खंडित पुष्प मिलने की परेशानी से बचा जा सकेगा।
- **शुद्धिकरण का नियम:** बाजार से लाए गए कमल को सीधे वेदी पर रखने के बजाय साफ जल से धोना अनिवार्य है। यह छोटी सी प्रक्रिया पूजन स्थल की शुचिता और पवित्रता को बनाए रखती है।
- **पारिवारिक परंपरा:** विधिवत पूजन से घर के वातावरण में सकारात्मकता और सदस्यों के बीच सद्भाव बना रहता है। सही विधान का पालन करने से परिवार के सभी लोग श्रद्धापूर्वक अनुष्ठान में सहभागी बनते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
दीपावली की रात्रि में माता लक्ष्मी की उपासना के दौरान कमल का फूल अर्पित करने की परंपरा प्राचीन धर्मग्रंथों और वैदिक मान्यताओं पर आधारित है।

- **कमल से प्राकट्य की मान्यता:** पौराणिक आख्यानों के अनुसार धन की देवी मां लक्ष्मी का उद्भव कमल पुष्प से हुआ था। यही कारण है कि उन्हें कमलासना भी कहा जाता है और यह पुष्प उनकी आराधना का प्रमुख प्रतीक बना।
- **अष्टकमल की परंपरा:** धर्मग्रंथों में मां लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए 8 कमल यानी अष्टकमल चढ़ाने का विधान बताया गया है। इसी परंपरा के तहत सामर्थ्य अनुसार 1 या 8 पुष्प अर्पित करने की व्यवस्था चली आ रही है।
- **पवित्रता और शुचिता का नियम:** देव उपासना में किसी भी खंडित, बासी या दूषित वस्तु को अर्पित करना वर्जित माना जाता है। इसी धार्मिक आधार पर बिना धुले अथवा कीटग्रस्त पुष्पों को पूजा से दूर रखने के नियम निर्धारित किए गए हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. वर्ष 2026 में दीपावली का त्योहार किस तारीख को मनाया जाएगा?
वर्ष 2026 में दीपावली का पावन पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा।

### 2. दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ किन अन्य देवताओं की पूजा की जाती है?
इस दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और कुबेर देव की पूजा का विधान है।

### 3. माता लक्ष्मी को कमल का फूल क्यों प्रिय माना गया है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी का प्राकट्य कमल से हुआ था और वे इस पुष्प पर विराजमान रहती हैं।

### 4. दीपावली पूजा में कितने कमल के फूल चढ़ाने का विधान बताया गया है?
पूजा में 8 कमल यानी अष्टकमल चढ़ाने का विधान है, लेकिन सुविधा न होने पर 1 कमल भी चढ़ाया जा सकता है।

### 5. पूजा के लिए कमल का फूल चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
फूल पूरी तरह ताजा और खिला होना चाहिए, तथा उसमें कोई कीड़ा या कटा-फटा भाग नहीं होना चाहिए।

### 6. बाजार से कमल का फूल लाने के बाद क्या करना आवश्यक है?
बाजार से लाने के बाद कमल को स्वच्छ जल से धोकर साफ करना चाहिए, उसके बाद ही स्वच्छ स्थान पर रखना चाहिए।

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