दुर्गूकोंदल के तुडगे गांव में तीन परिवारों की धर्म वापसी, तिलक लगाकर हुआ स्वागत छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के तुडगे गांव में तीन परिवारों के 17 सदस्यों ने रविवार को ईसाई धर्म छोड़कर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने मूल धर्म में वापसी की, इस मौके पर सभापति देवेन्द्र टेकाम भी मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में दुर्गूकोंदल विकासखंड के तुडगे गांव में 19 जुलाई 2026, रविवार को एक भावुक और सामाजिक रूप से अहम मौका देखने को मिला, जब तीन परिवारों के 17 सदस्यों ने ईसाई धर्म को छोड़कर अपने पुराने धर्म में वापसी की। यह पूरा आयोजन गांव के पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच संपन्न हुआ। विधि-विधान से हुई घर वापसी पूरे गांव में इस मौके को लेकर उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम को स्थानीय परंपराओं के मुताबिक आयोजित किया गया, जिसमें गांव के गायता, पटेल और समाज के प्रमुख लोग मौजूद रहे। बड़ी तादाद में ग्रामीणों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि भी इस पल के गवाह बने। लौटने वाले सभी 17 सदस्यों का स्वागत देवी-देवताओं की विधिवत पूजा के साथ किया गया। समाज के बुजुर्गों ने इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई और परिवारों के सदस्यों को तिलक लगाकर, फूलों की माला पहनाकर सम्मान दिया गया। इस दौरान उन्हें आने वाले समय के लिए शुभकामनाएं भी दी गईं। समाज के लोगों ने खुशी जताई कि ये परिवार फिर से उनके बीच लौट आए हैं और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करते हुए आपसी एकता का संदेश दिया गया। सभापति देवेन्द्र टेकाम बोले, जड़ों से जुड़े रहना जरूरी इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य एवं सभापति देवेन्द्र टेकाम भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने घर वापसी करने वाले परिवारों का स्वागत करते हुए मौजूद लोगों को संबोधित किया। टेकाम ने कहा, "समाज की मजबूती के लिए अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है।" उनका कहना था कि कोई भी समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहे। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे समाज के तय नियम-कायदों का पालन करें और आपसी भाईचारे, प्रेम व सौहार्द के साथ रहें। सभापति ने सामाजिक एकजुटता बनाए रखने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने पर खास जोर दिया। अगली पीढ़ी तक पहुंचेगी परंपरा, एकता का लिया संकल्प कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी बात हुई कि समाज की रीति-रिवाज और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुंचाया जाए। समाज के प्रमुख लोगों ने कहा कि किसी भी समुदाय की पहचान उसकी परंपराओं से बनती है और इन मूल्यों को बचाए रखना हर सदस्य की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के अंत में वहां मौजूद सभी लोगों ने आपस में मिलकर एकता और भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लिया। इसका आप पर असर • भारत में: इस तरह के 'घर वापसी' कार्यक्रम देश के कई हिस्सों में सामाजिक और धार्मिक चर्चा को जन्म देते रहे हैं, और स्थानीय समुदायों में सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर बहस तेज हो सकती है। • कांकेर, छत्तीसगढ़ में: दुर्गूकोंदल के तुडगे गांव और आसपास के इलाकों में इस घटना से समाज में एकजुटता बढ़ने के साथ स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी नजर बनी रहेगी। सवाल-जवाब 1. तुडगे गांव में यह कार्यक्रम कब हुआ? यह कार्यक्रम रविवार, 19 जुलाई 2026 को हुआ। 2. कितने लोगों ने अपने मूल धर्म में वापसी की? तीन परिवारों के कुल 17 सदस्यों ने ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल धर्म में वापसी की। 3. तुडगे गांव किस जिले और विकासखंड में स्थित है? यह गांव छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल विकासखंड में स्थित है। 4. कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए? गांव के गायता, पटेल, समाज प्रमुख, बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और जिला पंचायत सदस्य एवं सभापति देवेन्द्र टेकाम कार्यक्रम में शामिल हुए। 5. घर वापसी करने वाले सदस्यों का स्वागत कैसे किया गया? उन्हें देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ तिलक लगाकर और फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया गया। 6. देवेन्द्र टेकाम ने क्या कहा? उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती के लिए अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है। https://trendkia.com/religion/durgukondala-ke-tudge-ganva-men-tina-parivaron-ki-dharma-vapasi-tilaka-lagakara-hua-svagata-8809 TrendKia — Har trend, sabse pehle.