# गाजीपुर से जल लाकर मऊ के सैदपुर शिव मंदिर में जलाभिषेक कर रहे श्रद्धालु, स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन से पूरी होती हैं मन्नतें

> उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र में स्थित सैदपुर का प्राचीन शिव मंदिर सावन के पावन महीने में आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। गाजीपुर से पवित्र गंगाजल लाकर यहां विराजमान स्वयंभू शिवलिंग पर अर्पित करने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर की महत्ता देवघर धाम के समान ही फलदायी है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-08-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/ghazipur-se-jala-lakara-mau-ke-saidpur-shiva-mndira-men-jalabhisheka-kara-rahe-shraddhalu-svaynbhu-shivalinga-ke-darshana-se-puri--14234 · **Language:** Hindi
**Tags:** मऊ शिव मंदिर, सैदपुर शिव मंदिर, मुहम्मदाबाद गोहना, सावन सोमवार, स्वयंभू शिवलिंग, गाजीपुर गंगाजल, देवघर धाम, सुमंत पुजारी

सावन के पवित्र महीने में उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद अंतर्गत मुहम्मदाबाद गोहना के सैदपुर गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिल रहा है। इस ऐतिहासिक मंदिर का इतिहास लगभग 100 वर्ष पुराना बताया जाता है, जहां सावन के प्रत्येक सोमवार के अलावा पूरे महीने भक्त भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। यहां की सबसे विशेष बात यह है कि स्थानिय निवासी गाजीपुर से पवित्र गंगाजल उठाकर पैदल या वाहनों के जरिए मंदिर पहुंचते हैं और शिवलिंग पर जल अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। दूर-दराज के प्रसिद्ध धामों की यात्रा में अधिक समय और धन खर्च होने के कारण क्षेत्रीय लोगों के लिए यह शिव मंदिर अपार आस्था और सुविधा का केंद्र बना हुआ है।

## स्वयं प्रकट शिवलिंग और देवघर से अनूठी तुलना
सैदपुर स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी सुमंत पुजारी के अनुसार इस देवालय की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित शिवलिंग का स्वरूप है। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की तरह ही मऊ के इस मंदिर में शिवलिंग किसी मनुष्य द्वारा स्थापित नहीं किया गया है, बल्कि यह स्वयं भूमि से बाहर प्रकट हुआ है। स्वयंभू शिवलिंग होने के कारण ही इस मंदिर की तुलना देवघर के पवित्र ज्योतिर्लिंग धाम से की जाती है। यही कारण है कि स्थानीय जनमानस इस मंदिर को अत्यंत सिद्ध और चमत्कारी मानता है। सावन के महीने में तड़के से ही यहां हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगते हैं और भक्तगण शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित करते हैं।

## गाजीपुर से गंगाजल लाने की परंपरा और स्थानीय सुविधा
सावन के प्रथम सोमवार से ही गाजीपुर स्थित गंगा तट से जल उठाकर सैदपुर के प्राचीन शिव मंदिर तक लाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। श्रद्धालु गाजीपुर से पवित्र गंगाजल लाकर पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ यहां शिवजी का जलाभिषेक करते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, झारखंड स्थित प्रसिद्ध देवघर धाम तक जाने में काफी समय लगता है और यात्रा पर अधिक खर्च भी आता है। चूंकि सैदपुर के इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग की मान्यता और महत्ता देवघर जैसी ही मानी जाती है, इसलिए क्षेत्र के श्रद्धालु गाजीपुर से गंगाजल लाकर यहीं अर्पित कर लेते हैं। इससे श्रद्धालुओं को कम समय व कम खर्च में देवघर दर्शन के समान ही पुण्य प्राप्त होने की अनुभूति होती है।

## मनोकामना पूर्ति की आस्था और बिगड़े काम बनने का अटूट विश्वास
इस मंदिर के प्रति जनसामान्य की अटूट आस्था का मुख्य कारण यहां मन्नतें पूरी होना माना जाता है। क्षेत्र के लोगों का विश्वास है कि यदि कोई व्यक्ति किसी समस्या या संकट से घिरा हो और वह सच्चे मन से मंदिर में आकर भगवान शिव की पूजा करता है तथा मन्नत मांगता है, तो उसकी परेशानी अवश्य दूर होती है। वर्षों से श्रद्धालुओं के बिगड़े काम बनने और मनोकामनाएं पूरी होने के कई उदाहरण सामने आए हैं। जैसे-जैसे लोगों की मन्नतें पूरी होती गईं, वैसे-वैसे मंदिर के प्रति जनता का विश्वास और श्रद्धा का दायरा भी लगातार बढ़ता गया। यही वजह है कि साल-दर-साल यहां आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो रही है।

## प्राचीन पीपल वृक्ष की मान्यता और सत्यनिष्ठा की परंपरा
मंदिर परिसर के ठीक बगल में एक विशाल और प्राचीन पीपल का पेड़ भी स्थित है, जो इस स्थान के आध्यात्मिक वातावरण को और समृद्ध बनाता है। बताया जाता है कि इस पीपल के वृक्ष की स्थापना भी मंदिर के निर्माण काल यानी लगभग 100 वर्ष पूर्व ही हुई थी। मंदिर में आने वाले भक्त शिवलिंग की पूजा करने के साथ-साथ इस पवित्र पीपल वृक्ष की भी विधिवत पूजा-अर्चना और परिक्रमा करते हैं। इसके अलावा मंदिर से एक और अनोखी परंपरा जुड़ी हुई है। मान्यता है कि इस मंदिर परिसर में कोई भी व्यक्ति झूठ बोलने या झूठी कसम खाने का दुस्साहस नहीं करता। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां झूठी कसम खाने वाले व्यक्ति को अहित या नुकसान का सामना करना पड़ता है। इस भय और मर्यादा के कारण लोग केवल पूर्ण सत्यनिष्ठा के साथ ही मंदिर में प्रवेश करते हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** सावन महीने में स्थानीय स्तर पर मौजूद स्वयंभू और प्राचीन धार्मिक स्थलों के महत्व से देश भर में क्षेत्रीय तीर्थयात्रा संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।

**मऊ और पूर्वांचल में:** मऊ और आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं को देवघर जैसी लंबी यात्रा के बिना स्थानीय स्तर पर गाजीपुर से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करने की सुविधा मिलती है।

## सवाल-जवाब

### 1. मऊ का यह प्राचीन शिव मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के मुहम्मदाबाद गोहना तहसील अंतर्गत सैदपुर गांव में स्थित है।

### 2. इस मंदिर की तुलना देवघर धाम से क्यों की जाती है?
देवघर की तरह ही इस मंदिर में शिवलिंग मनुष्य द्वारा स्थापित नहीं किया गया है, बल्कि यह स्वयंभू यानी भूमि से स्वतः बाहर प्रकट हुआ है।

### 3. इस मंदिर का इतिहास कितना पुराना है?
मंदिर के पुजारी सुमंत पुजारी के अनुसार इस प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास लगभग 100 वर्ष पुराना है।

### 4. श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए गंगाजल कहां से लाते हैं?
सावन के सोमवार और पूरे महीने श्रद्धालु गाजीपुर स्थित गंगा तट से पवित्र जल लाकर इस मंदिर में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।

### 5. मंदिर परिसर में पीपल के पेड़ की क्या मान्यता है?
मंदिर के साथ ही लगभग 100 साल पहले स्थापित हुए विशाल पीपल के पेड़ की भी श्रद्धालु शिवलिंग के साथ पूजा-अर्चना और परिक्रमा करते हैं।

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