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  "type": "article",
  "title": "गुरु पूर्णिमा पर कोटा में नहीं दिखेगी साईं बाबा की विशाल शोभायात्रा, 16 साल पुरानी परंपरा में बदलाव की वजह आई सामने",
  "summary": "कोटा में 16 सालों से चली आ रही साईं बाबा की भव्य पालकी यात्रा इस बार संक्षिप्त रूप में निकाली जाएगी। आयोजकों ने सामाजिक सहभागिता में कमी को देखते हुए केवल स्थानीय चौकिया क्षेत्र तक ही आयोजन सीमित रखने का निर्णय लिया है।",
  "content": "राजस्थान के कोटा शहर में इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पावन अवसर एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। पिछले 16 वर्षों से लगातार बिना किसी रुकावट के आयोजित की जा रही साईं बाबा की विशाल चांदी की पालकी यात्रा इस बार अपने पारंपरिक भव्य और वृहद स्वरूप में सड़कों पर नजर नहीं आएगी। कोटा के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों और बाजारों से होकर निकलने वाली यह प्रसिद्ध शोभायात्रा इस बार बेहद सीमित दायरे में आयोजित की जाएगी। आयोजन समिति ने शहर के बदलते सामाजिक परिवेश और घटती जनसहभागिता को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।\n\n16 वर्ष पूर्व शिर्डी की तर्ज पर आरंभ हुई थी परंपरा\nकोटा में साईं बाबा की चांदी की पालकी यात्रा की नींव आज से ठीक 16 वर्ष पहले रखी गई थी। उस समय शहर भर के साईं भक्तों ने एक मंच पर एकत्रित होकर यह ऐतिहासिक निर्णय लिया था कि महाराष्ट्र के विश्वविख्यात धाम शिर्डी की तर्ज पर कोटा में भी हर साल गुरु पूर्णिमा पर भव्य नगर भ्रमण का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का विचार सामने आते ही पूरे शहर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया था।\n\nशुरुआती दौर की व्यवस्थाओं को याद करते हुए समिति के सदस्यों ने साझा किया कि पहली पालकी यात्रा का शुभारंभ विज्ञान नगर स्थित जैन मंदिर से चांदी की पालकी लाकर किया गया था। पहली ही यात्रा को मिले अपार जनसमर्थन और श्रद्धालुओं की अगाध आस्था से प्रेरित होकर मंदिर समिति ने बाद में एक स्थायी और अलौकिक चांदी की पालकी का निर्माण करवाया। इसी विशेष पालकी में साईं बाबा की प्रतिमा विराजमान होकर नगर वासियों को दर्शन देने निकलती थी।\n\nवर्षों से इस वार्षिक शोभायात्रा का दृश्य अत्यंत मनमोहक और भव्य रहता था। सड़कों पर 51 ढोल-नगाड़ों की गूंज, कलात्मक रूप से सजाए गए रथ, पारंपरिक डांडिया नृत्य करते दल और किलोमीटर लंबा श्रद्धालुओं का जुलूस इस आयोजन की मुख्य पहचान थे। कोटा के सभी प्रमुख बाजारों से गुजरते समय व्यापारिक और सामाजिक संगठनों द्वारा पालकी का भव्य स्वागत किया जाता था।\n\nआयोजन को संक्षिप्त करने के पीछे की मुख्य वजह\nइस अटूट 16 साल पुरानी परंपरा में अचानक आए इस बड़े बदलाव के कारणों का खुलासा साईं मंदिर समिति के प्रमुख एवं मुख्य आयोजनकर्ता हीरालाल रोहिड़ा ने किया। उन्होंने बताया कि इस विशाल यात्रा का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि कोटा शहर में आपसी एकता, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश फैलाना था।\n\nहीरालाल रोहिड़ा के अनुसार, बदलते दौर के साथ सामाजिक सहभागिता और लोगों के आपसी जुड़ाव के स्वरूप में अंतर आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब किसी बड़े सार्वजनिक आयोजन में सभी वर्गों की सक्रिय हिस्सेदारी और पारंपरिक भाईचारा कम होने लगता है, तो इतने वृहद स्तर के जुलूस को उसी भव्यता और सुचारू व्यवस्था के साथ संचालित करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो जाता है। साईं मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं और प्रबुद्ध जनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने के पश्चात ही इस वर्ष यात्रा के मार्ग को छोटा करने का सामूहिक फैसला लिया है। हीरालाल रोहिड़ा ने कहा, \"जब सामाजिक सहभागिता और भाईचारे में कमी आने लगती है, तो इतने बड़े आयोजन को उसी भव्यता से संभालना मुश्किल हो जाता है।\"\n\nइस वर्ष किस प्रकार आयोजित होंगे गुरु पूर्णिमा के धार्मिक कार्यक्रम?\nहालांकि इस वर्ष कोटा की मुख्य सड़कों पर ढोल-नगाड़ों की गूंज और किलोमीटर लंबी पदयात्रा देखने को नहीं मिलेगी, लेकिन धार्मिक अनुष्ठानों और बाबा के प्रति भक्ति भाव में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। मंदिर समिति ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी धार्मिक रस्मों को पूरे विधि-विधान से संपन्न करने की तैयारी की है।\n\nइस बार साईं बाबा की पालकी को संपूर्ण नगर भ्रमण कराने के बजाय केवल स्थानीय चौकिया क्षेत्र तक ही सीमित रखा जाएगा। पालकी यात्रा के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए भव्य साईं भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें शहर भर से आने वाले भक्त प्रसाद ग्रहण करेंगे। मंदिर समिति ने सभी साईं भक्तों से अपील की है कि वे स्थानीय चौकिया क्षेत्र में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों और भंडारे में उपस्थित होकर गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा के साथ मनाएं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: धार्मिक यात्राओं और सामाजिक उत्सवों में घटती सार्वजनिक सहभागिता सामुदायिक आयोजनों के बदलते स्वरूप को दर्शाती है।\n\nकोटा में: इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर भव्य नगर भ्रमण के बजाय साईं भक्तों को स्थानीय चौकिया क्षेत्र में सीमित पालकी दर्शन और भंडारे में शामिल होना होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कोटा में साईं बाबा की पालकी यात्रा की शुरुआत कब हुई थी?\nकोटा में साईं बाबा की चांदी की पालकी यात्रा की शुरुआत आज से 16 वर्ष पूर्व हुई थी।\n\n2. इस साल गुरु पूर्णिमा पर पालकी यात्रा के स्वरूप में क्या बदलाव किया गया है?\nइस वर्ष 51 ढोल-नगाड़ों और किलोमीटर लंबे जुलूस के बजाय यात्रा को केवल स्थानीय चौकिया क्षेत्र तक सीमित रखा गया है।\n\n3. 16 साल पहले पालकी यात्रा की शुरुआत कहां से की गई थी?\nशुरुआत में चांदी की साईं पालकी को विज्ञान नगर स्थित जैन मंदिर से लाकर यात्रा शुरू की गई थी।\n\n4. आयोजकों ने पालकी यात्रा को छोटा करने का क्या कारण बताया है?\nसाईं मंदिर समिति के प्रमुख हीरालाल रोहिड़ा के अनुसार, शहर में सामाजिक सहभागिता और आपसी भाईचारे में कमी आने के कारण इतना बड़ा आयोजन संभालना कठिन हो गया था।\n\n5. इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर साईं भक्तों के लिए क्या आयोजन रहेगा?\nइस साल सीमित क्षेत्र में पालकी घुमाने के साथ धार्मिक विधि-विधान से पूजा और 'साईं भंडारे' का आयोजन किया जाएगा।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-07-29",
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    "गुरु पूर्णिमा कोटा",
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