# गुरुवार को त्रयोदशी श्राद्ध और मासिक शिवरात्रि का संयोग, देखें 8 अक्टूबर का पूरा पंचांग

> 8 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा और पूर्वजों के निमित्त त्रयोदशी श्राद्ध किया जाएगा। इस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और शुक्ल योग का निर्माण हो रहा है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/guruvara-ko-trayodashi-shraddha-aura-masik-shivratri-ka-snyoga-dekhen-8-october-ka-pura-pnchanga-44675 · **Language:** Hindi
**Tags:** पंचांग, मासिक शिवरात्रि, त्रयोदशी श्राद्ध, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, हिंदू पंचांग

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। 8 अक्टूबर 2026 को गुरुवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ रही है। इस पावन अवसर पर भगवान शिव को समर्पित मासिक शिवरात्रि का उपवास रखा जाएगा। इसके समानांतर, पितृपक्ष के अंतर्गत जिन पूर्वजों का देहावसान किसी भी मास के किसी भी पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था, उनके निमित्त पिंडदान और श्राद्ध कर्म भी इसी दिन संपन्न किए जाएंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के साथ शुक्ल योग का विशिष्ट संयोग बन रहा है।

## 8 अक्टूबर 2026 की पंचांग गणना
वैदिक पंचांग के अनुसार 8 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 10 बजकर 17 मिनट तक प्रभावी रहेगी। इसके उपरांत चतुर्दशी तिथि का आरंभ होगा। नक्षत्र स्थिति की बात करें तो पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रात 09 बजकर 21 मिनट तक विद्यमान रहेगा। वहीं शुक्ल योग रात 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस संपूर्ण दिन का मुख्य धार्मिक महत्व त्रयोदशी तिथि श्राद्ध और मासिक शिवरात्रि व्रत के रूप में मान्य रहेगा।

## दिन के शुभ मुहूर्त
धार्मिक अनुष्ठानों, श्राद्ध तर्पण और दैनिक पूजन के लिए विभिन्न शुभ कालों का समय निर्धारित है

- **ब्रह्म मुहूर्त:** सुबह 04:53 बजे से सुबह 05:42 बजे तक
- **प्रातः सन्ध्या:** सुबह 05:18 बजे से सुबह 06:31 बजे तक
- **कुतुप मुहूर्त:** सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
- **अभिजीत मुहूर्त:** दोपहर 12:02 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
- **विजय मुहूर्त:** दोपहर 02:24 बजे से दोपहर 03:12 बजे तक
- **गोधूलि मुहूर्त:** शाम 06:21 बजे से शाम 06:45 बजे तक

## प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय
शास्त्रों के अनुसार राहुकाल की अवधि में किसी भी प्रकार का नया अथवा मांगलिक कार्य प्रारंभ करने से बचना चाहिए। देश के विभिन्न महानगरों में गुरुवार को राहुकाल इस प्रकार रहेगा

- **दिल्ली:** दोपहर 01:36 बजे से दोपहर बाद 03:04 बजे तक
- **मुंबई:** दोपहर 01:55 बजे से दोपहर बाद 03:24 बजे तक
- **चंडीगढ़:** दोपहर बाद 01:38 बजे से दोपहर बाद 03:05 बजे तक
- **लखनऊ:** दोपहर 01:22 बजे से दोपहर 02:50 बजे तक
- **भोपाल:** दोपहर 01:36 बजे से दोपहर बाद 03:04 बजे तक
- **कोलकाता:** दोपहर 12:52 बजे से दोपहर 02:21 बजे तक
- **अहमदाबाद:** दोपहर 01:55 बजे से दोपहर बाद 03:23 बजे तक
- **चेन्नई:** दोपहर 01:26 बजे से दोपहर 02:55 बजे तक

## सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
पंचांग के अनुसार गुरुवार को सूर्योदय प्रातः 06:17 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त का समय शाम 05:59 बजे रहेगा।

## त्रयोदशी श्राद्ध एवं मासिक शिवरात्रि का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रयोदशी तिथि पर किए जाने वाले श्राद्ध कर्म से कुल में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है और साधक को दीर्घायु प्राप्त होती है। परिवार के वे पूर्वज जिनका निधन किसी भी माह के शुक्ल अथवा कृष्ण पक्ष की तेरहवीं तिथि को हुआ हो, उनका स्मरण कर इसी दिन तर्पण किया जाता है। दूसरी ओर, मासिक शिवरात्रि का उपवास गृहस्थ जीवन में सौहार्द और वैवाहिक सुख प्रदान करता है। इस व्रत के प्रभाव से अविवाहित जातकों को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के योग बनते हैं। यदि कोई श्रद्धालु किसी कारणवश पूर्ण व्रत रखने में असमर्थ हो, तो वह भगवान शिव के पवित्र मंत्रों का यथाशक्ति जप कर सकता है। मंत्र जप से भी महादेव की पूर्ण कृपा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

## इसका आप पर असर
यह पंचांग दैनिक पूजा, श्राद्ध कर्म और समय नियोजन के लिए सटीक समय सारणी उपलब्ध कराता है।

- **पूजा और व्रत के लिए:** मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त (04:53 AM से 05:42 AM) से पूजा आरंभ कर सकते हैं। जो लोग उपवास रखने में असमर्थ हैं, वे शिव मंत्रों के मानसिक जप से साधना पूरी कर सकते हैं।
- **श्राद्ध और तर्पण के लिए:** त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध कर्म कुतुप मुहूर्त (11:45 AM से 12:32 PM) अथवा अभिजीत मुहूर्त में संपन्न करना श्रेयस्कर माना जाता है। यह समय पूर्वजों के निमित्त पिंडदान करने वालों के लिए विशेष उपयोगी है।
- **शुभ कार्यों के नियोजन के लिए:** किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए दोपहर 12:02 बजे से 12:50 बजे का अभिजीत मुहूर्त उपयुक्त रहेगा। इस समयावधि में महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
- **अशुभ समय से बचाव के लिए:** अपने शहर के अनुसार दोपहर 1 बजे से 3:30 बजे के बीच पड़ने वाले राहुकाल के दौरान नई खरीदारी या यात्रा टालें। इससे कार्यों में अनावश्यक बाधाओं से बचा जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पंचांग की तिथियां और खगोलीय योग सूर्य व चंद्रमा के पारस्परिक देशांतर तथा नक्षत्रों की गति पर आधारित होते हैं।

- **तिथि और नक्षत्र का आधार:** आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में चंद्रमा के पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और तेरहवें कोणीय अंतर में प्रवेश से त्रयोदशी तिथि बनती है। यह स्थिति 8 अक्टूबर को रात 10:17 बजे तक प्रभावी रहती है।
- **संयोग की पृष्ठभूमि:** हर माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर मासिक शिवरात्रि पड़ती है, जो इस बार पितृपक्ष की त्रयोदशी श्राद्ध तिथि के साथ संयुक्त हो गई है। यह एक स्वाभाविक मासिक और वार्षिक खगोलीय चक्र है।
- **मुहूर्त निर्धारण का नियम:** स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर दिन को आठ बराबर भागों में विभाजित करके राहुकाल व अन्य मुहूर्तों की गणना की जाती है। यही कारण है कि विभिन्न शहरों में राहुकाल का समय कुछ मिनटों के अंतर से बदलता है।

## सवाल-जवाब

### 1. 8 अक्टूबर 2026 को कौन सा व्रत और श्राद्ध है?
इस दिन मासिक शिवरात्रि का उपवास और आश्विन कृष्ण पक्ष का त्रयोदशी तिथि श्राद्ध संपन्न होगा।

### 2. 8 अक्टूबर को त्रयोदशी तिथि कब तक रहेगी?
त्रयोदशी तिथि 8 अक्टूबर 2026 को रात 10 बजकर 17 मिनट तक मान्य रहेगी।

### 3. 8 अक्टूबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त का समय क्या है?
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

### 4. दिल्ली में 8 अक्टूबर को राहुकाल कब रहेगा?
दिल्ली में राहुकाल दोपहर 01 बजकर 36 मिनट से दोपहर बाद 03 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।

### 5. यदि कोई व्यक्ति मासिक शिवरात्रि का उपवास न कर सके तो क्या उपाय है?
उपवास करने में असमर्थ श्रद्धालु भगवान शिव के मंत्रों का जप करके भी उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

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