हैदराबाद के खैराताबाद में 69 फीट ऊंचे पंचमुख संकष्टहर महा गणपति की भव्य तैयारी, दिखेगा सोमनाथ ज्योतिर्लिंग और मां कालिका का दिव्य रूप हैदराबाद के खैराताबाद में इस वर्ष 69 फीट ऊंची पंचमुख संकष्टहर महा गणपति प्रतिमा स्थापित की जा रही है। 150 कारीगरों द्वारा पूरी तरह इको-फ्रेंडली तरीके से तैयार की जा रही इस प्रतिमा का विसर्जन 11वें दिन हुसैन सागर झील में होगा। गणेश चतुर्थी का पावन पर्व नज़दीक आते ही पूरे देश में धार्मिक उत्साह और उल्लास का माहौल बनने लगा है। इस अवसर पर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद एक बार फिर अपने ऐतिहासिक और भव्य आयोजनों के लिए चर्चा में है। शहर के प्रसिद्ध क्षेत्र खैराताबाद में इस साल देश की सबसे ऊंची और आकर्षक गणेश प्रतिमाओं में से एक का निर्माण किया जा रहा है। खैराताबाद गणेश उत्सव समिति के अनुसार, इस वर्ष श्रद्धालु भगवान गणेश के 69 फीट ऊंचे अलौकिक पंचमुख संकष्टहर महा गणपति स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। यह दिव्य और अद्वितीय रूप श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग और मां कालिका के दिव्य दर्शन इस वर्ष खैराताबाद पंडाल में केवल 69 फीट ऊंची मुख्य प्रतिमा ही नहीं, बल्कि उसके दोनों ओर स्थापित की जा रही देवी-देवताओं की अन्य मूर्तियां भी आकर्षण बढ़ा रही हैं। मुख्य प्रतिमा के दाईं तरफ लगभग 15 फीट ऊंचा भव्य सोमनाथ ज्योतिर्लिंग निर्मित किया जा रहा है। वहीं बाईं तरफ मां कालिका का अलौकिक और शक्तिमयी रूप स्थापित किया जा रहा है। यह अनूठा धार्मिक संयोजन पूरे पंडाल परिसर को अत्यंत भव्य, भक्तिमय और दिव्य रूप प्रदान कर रहा है, जिससे यहां आने वाले भक्तों को एक साथ कई तीर्थों के दर्शन का अनुभव प्राप्त होगा। पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल निर्माण और 150 कारीगरों की मेहनत पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश करते हुए इस विशाल प्रतिमा के निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) और हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। विख्यात मूर्तिकार चिन्नास्वामी राजेंद्रन के मार्गदर्शन में 150 कुशल कारीगरों की टीम इस इको-फ्रेंडली प्रतिमा को तैयार कर रही है। प्रतिमा के विशाल ढांचे को मजबूती देने के लिए लोहे के फ्रेम और लकड़ी का ढांचा इस्तेमाल किया गया है, जबकि बाहरी स्वरूप को आकार देने के लिए मिट्टी, सूखी घास और चावल की भूसी का प्रयोग किया गया है। रंगाई कार्य के लिए केवल प्राकृतिक और जल-घुलनशील रंगों को चुना गया है ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। 1954 में 1 फीट से शुरू हुआ ऐतिहासिक सफर खैराताबाद में इस ऐतिहासिक गणेश उत्सव की नींव वर्ष 1954 में स्वतंत्रता सेनानी एस. शंकरैया ने रखी थी। उस समय उन्होंने केवल 1 फीट की छोटी सी प्रतिमा स्थापित करके इस परंपरा का शुभारंभ किया था। बीते सात दशकों में यह आयोजन हैदराबाद ही नहीं बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 10 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान प्रतिदिन लाखों भक्त बप्पा के दर्शन करते हैं। इसके बाद 11वें दिन हुसैन सागर झील में विशालकाय क्रेन की सहायता से और कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच इस दिव्य प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। फिलहाल सभी कारीगर दिन-रात एक करके प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसका आप पर असर खैराताबाद में स्थापित हो रही 69 फीट ऊंची इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा का सीधा प्रभाव स्थानीय श्रद्धालुओं, पर्यावरण और हैदराबाद के यातायात प्रबंधन पर पड़ेगा। • भारत में: देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक प्रमुख आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र रहेगा। इससे विभिन्न राज्यों से हैदराबाद के लिए धार्मिक पर्यटन और यात्रा में वृद्धि होगी। • हैदराबाद में: खैराताबाद और आसपास के इलाकों में उत्सव के 10 दिनों तक भारी भीड़ रहेगी। स्थानीय नागरिकों को ट्रैफिक एडवाइजरी और पुलिस सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। • पर्यावरण संरक्षण पर प्रभाव: पीओपी के स्थान पर मिट्टी और प्राकृतिक रंगों के प्रयोग से जलाशयों को प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश मिलेगा। इससे अन्य उत्सव समितियों को भी इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं बनाने की प्रेरणा मिलेगी। • स्थानीय व्यापार पर प्रभाव: 10 दिनों तक लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय दुकानों, होटल और परिवहन सेवाओं के कारोबार में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। सवाल-जवाब 1. खैराताबाद में इस साल गणेश प्रतिमा की ऊंचाई कितनी रखी गई है? वर्ष 2026 में खैराताबाद में बन रही गणेश प्रतिमा की कुल ऊंचाई 69 फीट है। 2. इस वर्ष भगवान गणेश का कौन सा स्वरूप भक्तों को देखने को मिलेगा? इस बार श्रद्धालु भगवान गणेश के पंचमुख संकष्टहर महा गणपति स्वरूप के अलौकिक दर्शन कर सकेंगे। 3. प्रतिमा के दाईं और बाईं तरफ किन देवी-देवताओं के विग्रह स्थापित किए जा रहे हैं? मुख्य प्रतिमा के दाईं तरफ लगभग 15 फीट ऊंचा सोमनाथ ज्योतिर्लिंग और बाईं तरफ मां कालिका का दिव्य रूप स्थापित किया जा रहा है। 4. प्रतिमा निर्माण में कौन-कौन सी इको-फ्रेंडली सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है? प्रतिमा निर्माण में लोहे के फ्रेम, लकड़ी, मिट्टी, सूखी घास, चावल की भूसी और पानी में घुलनशील प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। 5. खैराताबाद गणेश उत्सव की शुरुआत कब और किसने की थी? इस आयोजन की शुरुआत वर्ष 1954 में स्वतंत्रता सेनानी एस. शंकरैया ने 1 फीट की प्रतिमा स्थापित करके की थी। 6. 10 दिनों के उत्सव के बाद विसर्जन कहां और कैसे किया जाएगा? 11वें दिन इस विशाल प्रतिमा का विसर्जन भारी-भरकम क्रेन की मदद से हुसैन सागर झील में कड़े सुरक्षा इंतजामों के साथ होगा। प्रेरणा और सबक खैराताबाद गणेश उत्सव और 150 कारीगरों के प्रयास से कई महत्वपूर्ण जीवन सीखें और प्रेरणाएं मिलती हैं। • छोटे कदम से महानता: 1954 में केवल 1 फीट से शुरू हुआ प्रयास आज 69 फीट की भव्यता तक पहुंचा है, जो सिखाता है कि निरंतरता से छोटी शुरुआत भी विशाल सफलता बनती है। • पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी: विशाल आकार के बावजूद हानिकारक रसायनों का त्याग कर इको-फ्रेंडली निर्माण चुनना यह संदेश देता है कि आस्था और प्रकृति संरक्षण एक साथ चल सकते हैं। • टीम वर्क और समर्पण: मूर्तिकार चिन्नास्वामी राजेंद्रन और 150 कारीगरों की दिन-रात की मेहनत यह दर्शाती है कि सामूहिक प्रयास से कठिन से कठिन लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। https://trendkia.com/religion/hyderabad-ke-khairatabad-men-69-phita-unche-panchamukha-sankashtahara-maha-ganapati-ki-bhavya-taiyari-dikhega-somnath-jyotirlinga--22967 TrendKia — Har trend, sabse pehle.