# हैदराबाद से महज 140 किमी दूर बिदर में स्थित मैलार मल्लान्ना मंदिर, जहां फूल नहीं बल्कि उड़ती है पीली हल्दी

> कर्नाटक के बिदर जिले में स्थित मैलार मल्लान्ना मंदिर अपने अनोखे रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है। यहाँ भक्त भगवान शिव के अवतार को फूल या मिठाई के बजाय केवल हल्दी अर्पित करते हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-07-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/hyderabad-se-mahaja-140-kimi-dura-bidar-men-sthita-mailar-mallanna-mndira-jahan-phula-nahin-balki-urati-hai-pili-haldi-11318 · **Language:** Hindi
**Tags:** मैलार मल्लान्ना मंदिर, बिदर, हल्दी वाला मंदिर, खंडोबा मंदिर, हैदराबाद वीकेंड टूर, कर्नाटक पर्यटन

हैदराबाद से वीकेंड पर धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करने वालों के लिए पड़ोसी राज्य कर्नाटक के बिदर जिले में स्थित एक बेहद खास धाम लोकप्रिय विकल्प बन रहा है। तेलंगाना की राजधानी से केवल 140 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद मैलार मल्लान्ना मंदिर अपनी अद्भुत और अनूठी परंपरा के कारण श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस पवित्र स्थान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ भगवान को फूल या पारंपरिक प्रसाद अर्पित करने के बजाय केवल हल्दी चढ़ाई जाती है, जिससे पूरा परिसर सुनहरे और पीले रंग से सराबोर दिखाई देता है।

## हल्दी की अनोखी परंपरा और भंडारा उड़ना
मैलार मल्लान्ना मंदिर परिसर के भीतर प्रवेश करते ही हर ओर पीला रंग ही नज़र आता है। मंदिर की दीवारों, फर्श और स्तम्भों से लेकर पूरे आंगन में हल्दी की मोटी परत बिखरी रहती है। स्थानीय बोली में इस अनोखी प्रथा को भंडारा उड़ना कहा जाता है। भक्तजन यहाँ बड़ी मात्रा में हल्दी लाते हैं और उसे भगवान के चरणों में अर्पित करने के साथ-साथ हवा में उड़ाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान मल्लान्ना का यह विशेष रूप सूर्यदेव के समान तेजस्वी माना जाता है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि मंदिर में हल्दी चढ़ाने से उनके घरों में सुख, शांति और आर्थिक समृद्धि का वास होता है।

## पौराणिक पृष्ठभूमि और सफेद घोड़े पर सवार पराक्रमी रूप
भगवान मल्लान्ना वास्तव में देवों के देव महादेव यानी भगवान शिव का ही एक योद्धा अवतार हैं, जिन्हें जनमानस में खंडोबा नाम से भी पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, प्राचीन काल में मल्ल और मणिकासुर नाम के दो भयंकर और अत्याचारी राक्षसों का आतंक फैल गया था। उनके जुल्मों से सृष्टि को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने यह शक्तिशाली योद्धा रूप धारण किया था और दोनों दैत्यों का अंत किया था। मंदिर में स्थापित प्रतिमा में भगवान को एक विशाल और पराक्रमी योद्धा के रूप में दर्शाया गया है, जो सफेद घोड़े पर सवार हैं। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में दर्शन करने से पहले, सभी श्रद्धालु परिसर में ही स्थित एक बेहद प्राचीन और पवित्र तालाब में अपने हाथ-पैर धोकर खुद को शुद्ध करते हैं।

## सड़क मार्ग से सुगम पहुंच और वीकेंड पर जुटती भारी भीड़
हैदराबाद से बेहतरीन और सुचारू सड़क संपर्क होने के कारण इस ऐतिहासिक मंदिर तक पहुंचना बेहद आसान है। यही वजह है कि हर सप्ताह तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु अपनी निजी गाड़ियों, टैक्सी और बसों के जरिए बिदर पहुंचते हैं। विशेष रूप से रविवार के दिन और प्रमुख धार्मिक त्योहारों के अवसर पर यहाँ इतनी भारी भीड़ उमड़ती है कि परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। कम समय, सीमित बजट और सुगम यात्रा चाहने वाले लोगों के लिए बिदर का यह पीला मंदिर एक बेहतरीन आध्यात्मिक स्थल साबित हो रहा है, जहाँ लोग न केवल प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं बल्कि इस अनोखे दृश्य के साक्षी बनते हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत भर में:** यह मंदिर भारत की समृद्ध और विविध धार्मिक परंपराओं का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देता है।

**हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों में:** तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के निवासियों के लिए यह 140 किलोमीटर दूर एक कम बजट वाली और सुगम वीकेंड आध्यात्मिक यात्रा का बेहतरीन विकल्प है।

## सवाल-जवाब

### 1. मैलार मल्लान्ना मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर पड़ोसी राज्य कर्नाटक के बिदर जिले में स्थित है, जो हैदराबाद से लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर है।

### 2. मैलार मल्लान्ना मंदिर किस देवता को समर्पित है?
यह मंदिर भगवान शिव के योद्धा अवतार भगवान मल्लान्ना को समर्पित है, जिन्हें खंडोबा के नाम से भी जाना जाता है।

### 3. इस मंदिर में फूलों की जगह हल्दी क्यों चढ़ाई जाती है?
मान्यता है कि भगवान मल्लान्ना का रूप सूर्य के समान तेजस्वी है और हल्दी चढ़ाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

### 4. भंडारा उड़ना की परंपरा क्या है?
भंडारा उड़ना स्थानीय भाषा का शब्द है, जिसमें श्रद्धालु मंदिर परिसर में भगवान के दर्शन करते समय हवा में और पूरे परिसर में हल्दी उड़ाते हैं।

### 5. भगवान मल्लान्ना के अवतार की क्या पौराणिक कथा है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने मल्ल और मणिकासुर नाम के दो अत्याचारी राक्षसों का वध करने के लिए यह योद्धा रूप धारण किया था।

### 6. दर्शन से पहले श्रद्धालु कौन सी परंपरा निभाते हैं?
मुख्य गर्भगृह में दर्शन करने से पहले श्रद्धालु मंदिर परिसर में बने एक प्राचीन पवित्र तालाब में हाथ और पैर धोते हैं।

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