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  "title": "इस साल कब से शुरू हो रही है भगवान विष्णु की योगनिद्रा और क्या है देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त व पूजा विधि",
  "summary": "देवशयनी एकादशी के साथ ही चतुर्मास की शुरुआत हो रही है, जिसमें भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। जानिए इस पावन दिन की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।",
  "content": "हिंदू धर्मग्रंथों और पंचांग में देवशयनी एकादशी को एक बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि माना गया है, जो एक बड़े आध्यात्मिक बदलाव का संकेत देती है। यह पावन दिन भगवान विष्णु की चार महीने की योगनिद्रा की शुरुआत का प्रतीक है, जिसे धार्मिक भाषा में चतुर्मास का आरंभ भी कहा जाता है। इस अवधि के दौरान बड़े-बड़े मांगलिक कार्यों और सांसारिक उत्सवों पर कुछ समय के लिए विराम लग जाता है, जिससे लोगों को अपनी ऊर्जा आध्यात्मिक साधना, उपवास और आत्म-शुद्धि में लगाने का अवसर मिलता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आने वाला यह दिन करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो ब्रह्मांडीय चक्र के साथ खुद को जोड़ने का प्रयास करते हैं।\n\n \n\nभगवान विष्णु की योगनिद्रा और चतुर्मास का महत्व\n\nपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी वही विशेष दिन है जब सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन के लिए प्रस्थान करते हैं। अगले चार महीनों तक भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन रहते हैं, और इस पूरी अवधि को ही चतुर्मास के नाम से जाना जाता है। चूंकि इस दौरान ब्रह्मांड के रक्षक विश्राम की मुद्रा में होते हैं, इसलिए हिंदू परंपराओं के अनुसार इस काल में किसी भी प्रकार के नए और मांगलिक कार्यों, जैसे कि विवाह, गृह प्रवेश या अन्य शुभ अनुष्ठानों के आयोजन की मनाही होती है। इन चार महीनों में बाहरी तड़क-भड़क वाले आयोजनों के बजाय आंतरिक अनुशासन, व्रत और गहरी प्रार्थनाओं पर ध्यान दिया जाता है।\n\n \n\nएकादशी व्रत की तिथियां और शुभ मुहूर्त\n\nइस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत शुक्रवार, 25 जुलाई को रखा जाएगा। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, इस बार यह तिथि 25 जुलाई को पड़ रही है। जो श्रद्धालु एकादशी का पारंपरिक व्रत रखना चाहते हैं, वे शनिवार यानी 25 जुलाई को भी यह व्रत रख सकते हैं। शुभ मुहूर्त की बात करें तो एकादशी तिथि शनिवार को सुबह 9:12 बजे शुरू होगी और इसका समापन 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे होगा। व्रत पूरा होने के बाद उसे खोलने यानी पारण का समय 25 जुलाई को सुबह 5:38 बजे से लेकर सुबह 8:22 बजे तक रहेगा।\n\n \n\nभगवान विष्णु की अनुपस्थिति में ब्रह्मांड का संतुलन\n\nदेवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि इस दिन देश भर के लाखों श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं और मंदिरों में जाकर भगवान विष्णु की पूजा-अचना करते हैं। श्रद्धालु अपना व्रत अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को खोलते हैं। भगवान विष्णु के विश्राम और भक्तों की इस साधना का यह सिलसिला हर साल चलता है, और श्रद्धालु हर वर्ष इन चार महीनों के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ इन नियमों का पालन करते हैं।\n\nजब भगवान विष्णु अपनी गहरी योगनिद्रा में होते हैं, तो उस दौरान सृष्टि का संतुलन कैसे बना रहता है, इसका उत्तर देवी-देवताओं के कार्य-विभाजन में मिलता है। भगवान विष्णु की अनुपस्थिति में ब्रह्मांड की रक्षा और संचालन के लिए अन्य प्रमुख देवी-देवता आगे आते हैं। इस अवधि की शुरुआत में सबसे पहले गुरु मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, जिसके बाद भगवान शिव मुख्य जिम्मेदारी संभालते हैं और एक महीने के लिए पवित्र श्रावण मास का आरंभ होता है। इसके बाद के समय में भगवान कृष्ण, भगवान गणेश, देवी दुर्गा और मां लक्ष्मी इस सृष्टि को सुचारू रूप से चलाने में अपना सहयोग देते हैं। ये सभी दिव्य शक्तियां मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि पालनहार के विश्राम के दौरान भी ब्रह्मांड का संतुलन बना रहे और भक्तों को आध्यात्मिक संबल मिलता रहे।\n\n \n\nपूजा की सरल विधि और धार्मिक अनुष्ठान\n\nदेवशयनी एकादशी के दिन किए जाने वाले मुख्य अनुष्ठानों के लिए विशेष तैयारी और गहरी भक्ति की आवश्यकता होती है। इस दिन श्रद्धालु सुबह-सुबह पवित्र स्नान करके अपने दिन की शुरुआत करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण और लड्डू गोपाल की मूर्तियों को पवित्र स्नान कराया जाता है। मूर्तियों को स्वच्छ करने के बाद, उन्हें एक साफ लकड़ी की चौकी पर आदरपूर्वक स्थापित किया जाता है। इन मूर्तियों के साथ ही चौकी पर मां लक्ष्मी के प्रतीक श्री यंत्र को भी स्थान दिया जाता है।\n\nपूजा की मुख्य विधि में स्थापित मूर्तियों के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक जलाया जाता है। इसके बाद भगवान को ताजे मौसमी फल, चरणामृत और विशेष रूप से तैयार किया गया अन्य प्रसाद अर्पित किया जाता है। भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त विभिन्न पवित्र मंत्रों और स्रोतों का पाठ करते हैं। इसमें विष्णु सहस्रनाम और कृष्ण महामंत्र का पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप इस पूजा का सबसे मुख्य हिस्सा है, जो घर में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है।\n\nइसका आप पर असर\n• व्रत रखने वालों के लिए: देश भर के श्रद्धालु इस मुहूर्त और पारण के सही समय के अनुसार अपनी पूजा और उपवास की योजना सुचारू रूप से बना सकते हैं।\n• मांगलिक कार्यों पर प्रभाव: शादी-ब्याह, गृह प्रवेश या नए व्यापार की शुरुआत की योजना बना रहे परिवारों को ध्यान देना होगा कि अगले चार महीनों तक इन शुभ कार्यों पर रोक रहेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. देवशयनी एकादशी कब मनाई जाएगी?\nदेवशयनी एकादशी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार शुक्रवार, 25 जुलाई को मनाई जाएगी। श्रद्धालु शनिवार, यानी 25 जुलाई को भी व्रत रख सकते हैं।\n\n2. एकादशी तिथि का समय क्या है?\nएकादशी तिथि शनिवार को सुबह 9:12 बजे शुरू होगी और 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे समाप्त होगी।\n\n3. व्रत पारण का समय क्या है?\nव्रत खोलने का शुभ समय (पारण) 25 जुलाई को सुबह 5:38 बजे से लेकर सुबह 8:22 बजे तक रहेगा।\n\n4. भगवान विष्णु के शयनकाल के दौरान कौन से देवता ब्रह्मांड को संभालते हैं?\nइस अवधि में क्रमशः गुरु, भगवान शिव (श्रावण मास के दौरान), भगवान कृष्ण, भगवान गणेश, देवी दुर्गा और मां लक्ष्मी ब्रह्मांड की व्यवस्था और संतुलन बनाए रखते हैं।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-07-24",
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