जयपुर के चांदपोल बाजार में छिपा 200 साल पुराना कल्याणजी मंदिर, ठाकुरजी के 24 अवतार साल में सिर्फ दो बार देते हैं दर्शन जयपुर के चांदपोल बाजार में स्थित 200 साल पुराने कल्याणजी मंदिर में भगवान के विग्रह पर 24 अवतार उकेरे हुए हैं, जिनके दर्शन भक्तों को साल में केवल दो बार आखा तीज और पाटोत्सव पर होते हैं। गुलाबी नगरी जयपुर अपने प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहां की हर गली, हर मोड़ पर सदियों पुराना कोई न कोई मंदिर मिल जाता है, जहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। खासकर शहर की चारदीवारी का बाजार, जहां लगभग हर रास्ते पर कोई न कोई प्राचीन देवालय खड़ा है। ऐसा ही एक मंदिर है चांदपोल बाजार में कल्याणजी के रास्ते पर बना करीब 200 साल पुराना कल्याणजी मंदिर, जो जयपुर के सबसे पुराने मंदिरों में गिना जाता है। यहां ठाकुरजी कल्याणजी के स्वरूप में विराजमान हैं। अपनी अनूठी परंपराओं और धार्मिक महत्व के चलते यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है। मंदिर के पुजारी अशोक अग्रवाल इसके इतिहास और मान्यताओं पर विस्तार से रोशनी डालते हैं। साल में सिर्फ दो बार खुलता है 24 अवतारों के दर्शन का द्वार इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां विराजित भगवान कल्याणजी का विग्रह है, जिस पर भगवान के 24 अवतार उकेरे हुए हैं। इन अवतारों के दर्शन भक्तों को पूरे साल नहीं, बल्कि केवल दो खास मौकों पर ही नसीब होते हैं। आखा तीज और मंदिर के पाटोत्सव के दिन जब यह दुर्लभ दर्शन होते हैं, तो मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। सिंधी कैंप की बावड़ी से निकली थी ठाकुरजी की प्रतिमा अशोक अग्रवाल बताते हैं कि मंदिर और इसमें स्थापित कल्याणजी के रूप में विराजमान ठाकुरजी की मूर्ति का इतिहास भी कई बरस पुराना है। यह मूर्ति सिंधी कैंप इलाके में स्थित एक प्राचीन बावड़ी से निकली थी। मंदिर में काले पाषाण से बनी ठाकुरजी की प्रतिमा विराजमान है, जिसका विग्रह साढ़े चार फीट ऊंचा है। ठाकुरजी के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में झामर का श्रृंगार है, और वे खड़गासन अवस्था में हैं। मंदिर में राधा कृष्ण और रुक्मणी के विग्रह भी विराजमान हैं। पुजारी के मुताबिक, जयपुर के बाकी प्राचीन मंदिरों की तरह इसकी वास्तुकला भी बेहद खास है, जहां मंदिर की छत और गुंबद शीशमहल से सजे हुए हैं। मंदिर की पेंटिंग्स में दर्ज हैं भगवान विष्णु के 24 अवतार मंदिर की वास्तुकला में ठाकुरजी के वराहपुराण वर्णित 24 अवतारों की झलक अलग-अलग पेंटिंग्स में नजर आती है। ये पेंटिंग्स मंदिर के निर्माण के समय ही बनाई गई थीं। इनमें भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार, वराह अवतार, कूर्म अवतार, नृसिंह अवतार, वामन अवतार, परशुराम अवतार, बुद्ध अवतार, कल्कि अवतार, वेदव्यास अवतार, पृथु अवतार और मनु अवतार समेत सभी 24 अवतारों का उल्लेख है। इन चौबीस अवतारों की लीलाएं धर्म की स्थापना, भक्तों की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए भगवान के अलग-अलग दिव्य प्राकट्यों का परिचय कराती हैं। इसका आप पर असर • भारत में: देशभर के श्रद्धालुओं और धार्मिक पर्यटकों के लिए यह एक दुर्लभ अनुभव है, क्योंकि भगवान के 24 अवतारों के दर्शन साल में सिर्फ दो बार ही संभव हैं। • जयपुर में: चांदपोल बाजार आने वाले लोग आखा तीज और मंदिर के पाटोत्सव पर इस 200 साल पुराने कल्याणजी मंदिर में जाकर यह खास दर्शन कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. कल्याणजी मंदिर कहां स्थित है? यह मंदिर जयपुर के चांदपोल बाजार में कल्याणजी के रास्ते पर स्थित है। 2. मंदिर कितना पुराना है? यह कल्याणजी मंदिर करीब 200 साल पुराना है और जयपुर के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। 3. 24 अवतारों के दर्शन कब होते हैं? भगवान कल्याणजी के विग्रह पर उकेरे 24 अवतारों के दर्शन भक्तों को साल में केवल दो बार, आखा तीज और मंदिर के पाटोत्सव पर होते हैं। 4. ठाकुरजी की मूर्ति कहां से मिली थी? ठाकुरजी की यह मूर्ति सिंधी कैंप इलाके में स्थित एक प्राचीन बावड़ी से निकली थी। 5. मूर्ति का स्वरूप कैसा है? काले पाषाण से बनी यह प्रतिमा साढ़े चार फीट ऊंची है, खड़गासन अवस्था में है और इसके एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में झामर का श्रृंगार है। 6. मंदिर में और कौन से विग्रह हैं? मंदिर में कल्याणजी के अलावा राधा कृष्ण और रुक्मणी के विग्रह भी विराजमान हैं। 7. मंदिर की पेंटिंग्स में क्या दर्शाया गया है? पेंटिंग्स में वराहपुराण वर्णित भगवान विष्णु के मत्स्य, वराह, कूर्म, नृसिंह, वामन, परशुराम, बुद्ध, कल्कि, वेदव्यास, पृथु और मनु समेत सभी 24 अवतार दर्शाए गए हैं। https://trendkia.com/religion/jaipur-ke-chandpol-bajara-men-chhipa-200-sala-purana-kalyanji-mndira-thakurji-ke-24-avatara-sala-men-sirpha-do-bara-dete-hain-dars-2917 TrendKia — Har trend, sabse pehle.