जन्माष्टमी पर धौलपुर के रियासतकालीन कृष्ण मंदिरों में उमड़ती है अपार श्रद्धा, मचकुंड सरोवर किनारे बने हैं ये ऐतिहासिक धाम राजस्थान के धौलपुर में मचकुंड सरोवर तट पर स्थित महाराजा भगवंत सिंह और महारानी विदोखरनी काल के ऐतिहासिक कृष्ण मंदिर जन्माष्टमी पर विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर श्री कृष्ण भक्ति में लीन श्रद्धालुओं के लिए राजस्थान का धौलपुर शहर एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। रियासत काल में निर्मित यहां के प्राचीन मंदिर वास्तुकला और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। धौलपुर के तत्कालीन राजघराने द्वारा निर्मित ये धाम आज भी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बने हुए हैं। मान्यता है कि मचकुंड सरोवर के समीप स्थित इन पवित्र परिसरों में सच्चे मन से की गई प्रार्थना सदैव फलदायी होती है। मचकुंड सरोवर के तट पर स्थित लाडली जगमोहन जी मंदिर का इतिहास मचकुंड सरोवर के दक्षिणी तट पर स्थित लाडली जगमोहन जी मंदिर धौलपुर के सर्वाधिक प्राचीन और भव्य मंदिरों में गिना जाता है। इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण धौलपुर रियासत के महाराजा भगवंत सिंह के दीवान राजधरजू कन्हैया लाल द्वारा कराया गया था। मंदिर के निर्माण कार्य का शिलान्यास आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी, संवत की शुभ तिथि पर संपन्न हुआ था। यह धार्मिक स्थल अपनी उत्कृष्ट निर्माण शैली के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है। मंदिर के निर्माण में प्रसिद्ध धौलपुर लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। इसकी मेहराबों, स्तंभों और बाहरी दीवारों पर पारंपरिक राजस्थानी शिल्पकला की बारीक नक्काशी देखने को मिलती है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की सुंदर प्रतिमाएं विराजमान हैं। यहां प्रतिदिन पंचामृत स्नान, विशेष श्रृंगार और भव्य आरती की पारंपरिक परंपराएं पूरी निष्ठा के साथ निभाई जाती हैं। महारानी विदोखरनी द्वारा निर्मित मदन मोहन जी रानी गुरु मंदिर मचकुंड सरोवर की दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित मदन मोहन जी मंदिर धार्मिक इतिहास में अपना विशेष स्थान रखता है। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1899 में महारानी विदोखरनी ने करवाई थी। महारानी विदोखरनी भगवान श्री कृष्ण की परम भक्त थीं। उन्होंने मंदिर निर्माण के पश्चात अपने पूज्य गुरु को यहां का प्रधान पुजारी नियुक्त किया था। गुरुदेव के प्रति महारानी के इसी सम्मान और समर्पण के कारण कालांतर में यह स्थान रानी गुरु मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया। धौलपुर के विशेष लाल बलुआ पत्थर से निर्मित यह मंदिर स्थापत्य कला और भक्ति भावना का अनूठा उदाहरण है। वर्तमान में भी यह मंदिर श्री कृष्ण के अनन्य भक्तों के लिए अपार श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है, जहां वर्ष भर आध्यात्मिक गतिविधियां संचालित होती हैं। जगन्नाथ मंदिर: रियासतकालीन आस्था और वास्तुकला का प्रतीक मचकुंड सरोवर के पावन किनारे पर स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर भी धौलपुर की रियासतकालीन धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा भगवंत सिंह ने स्वयं करवाया था। लाल बलुआ पत्थर से निर्मित यह मंदिर अपनी विशिष्ट वास्तुकला और धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ, उनके भ्राता बलराम और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं स्थापित हैं। रियासत कालीन समय से ही यह मंदिर स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए गहरी आस्था का केंद्र रहा है। विशेष रूप से जन्माष्टमी के पावन अवसर पर यहां दर्शनार्थियों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है और पूरा वातावरण जयकारों से गुंजायमान रहता है। इसका आप पर असर धौलपुर के इन ऐतिहासिक मंदिरों की जन्माष्टमी यात्रा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष व्यवस्था का अवसर प्रस्तुत करती है। • भारत भर के श्रद्धालुओं के लिए: राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कृष्ण भक्त जन्माष्टमी पर यहां पहुंचकर प्राचीन स्थापत्य कला और दैनिक पूजा-अर्चना का प्रत्यक्ष दर्शन कर सकते हैं। दर्शन के लिए मचकुंड सरोवर परिसर में सुबह और शाम की आरती का समय सबसे उपयुक्त रहता है। • धौलपुर क्षेत्र के लिए: स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा भारी भीड़ को नियंत्रित करने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाते हैं। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय व्यापार को गति प्राप्त होती है। सवाल-जवाब 1. धौलपुर में स्थित लाडली जगमोहन जी मंदिर का निर्माण किसने करवाया था? इस मंदिर का निर्माण धौलपुर रियासत के महाराजा भगवंत सिंह के दीवान राजधरजू कन्हैया लाल ने करवाया था। 2. मदन मोहन जी मंदिर को रानी गुरु मंदिर क्यों कहा जाता है? महारानी विदोखरनी ने वर्ष 1899 में इस मंदिर का निर्माण कराने के बाद अपने गुरु को यहां का पुजारी बनाया था, जिसके कारण इसे रानी गुरु मंदिर कहा जाने लगा। 3. मचकुंड सरोवर के किनारे स्थित जगन्नाथ मंदिर में किन प्रतिमाओं की पूजा की जाती है? इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं स्थापित हैं। 4. धौलपुर के इन प्राचीन मंदिरों के निर्माण में किस पत्थर का उपयोग किया गया है? इन सभी मंदिरों के निर्माण में धौलपुर के प्रसिद्ध लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। 5. इन मंदिरों में दर्शन के लिए मुख्य रूप से किन राज्यों से श्रद्धालु आते हैं? यहां राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। https://trendkia.com/religion/janmashtami-par-dholpur-ke-riyasatkalin-krishna-mandiron-mein-umadti-hai-apar-shraddha-muchkund-sarovar-kinare-bane-hain-ye-aitiha-27206 TrendKia — Har trend, sabse pehle.