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  "title": "जन्माष्टमी पर व्रत नहीं रख पा रहे हैं? 16 अगस्त को इन विशेष मंत्रों के जाप से मिलेगा पूरा पुण्य",
  "summary": "जन्माष्टमी के पावन अवसर पर यदि आप उपवास रखने में असमर्थ हैं, तो बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार इन विशेष मंत्रों का जाप करने से व्रत के समान ही फल प्राप्त होता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।",
  "content": "सनातन धर्म में धार्मिक शास्त्रों के अनुसार मंत्रों का अत्यंत विशिष्ट स्थान और महत्व माना गया है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन या किसी विशेष पर्व पर नियमपूर्वक मंत्रों का उच्चारण करता है, तो उसके प्रभाव से ईश्वरीय कृपा प्राप्त की जा सकती है। जीवन में सुख और समृद्धि लाने के लिए भी मंत्र साधना को बहुत असरदार माना जाता है। इस वर्ष 16 अगस्त को धूमधाम के साथ जन्माष्टमी का महापर्व मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर जगत के पालनहार भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप यानी लड्डू गोपाल की विधि-विधान के साथ उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी के दिन उपवास रखकर लड्डू गोपाल की पूजा करना बेहद फलदायी होता है.\n\n \n\nव्रत न कर पाने पर क्या करें\n यदि किन्हीं कारणों से आप जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने में सक्षम नहीं हैं, तो परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस स्थिति में आप कुछ खास और अत्यंत प्रभावशाली मंत्रों का जाप करके भी व्रत के समान ही पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं। इन मंत्रों के नियमित और विधिपूर्वक जाप से जीवन के तमाम दुख-दर्द और संकट दूर हो जाते हैं तथा मनुष्य की हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर कौन से मंत्रों का जाप करना चाहिए, इस बारे में प्रसिद्ध बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने विस्तृत जानकारी साझा की है।\n\n \n\nजन्माष्टमी और श्री कृष्ण जन्मोत्सव का महत्व\n बैद्यनाथ मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने बातचीत के दौरान बताया कि धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ठीक मध्य रात्रि के समय भगवान श्री कृष्ण का अलौकिक जन्म हुआ था। इसी उपलक्ष्य में इस साल 16 अगस्त को पूरे देश भर में हर्षोल्लास के साथ जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। इस विशेष दिन को भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। देश के सभी कृष्ण मंदिरों में इस अवसर पर भारी संख्या में कृष्ण भक्तों का तांता लगा रहता है और चारों तरफ उत्सव का माहौल रहता है। इस दिन व्रतों का पालन करते हुए और पवित्र मंत्रों का उच्चारण करते हुए भगवान श्री कृष्ण की आराधना करनी चाहिए।\n\n \n\nकौन से दो शक्तिशाली मंत्र करें\n तीर्थपुरोहित का कहना है कि यदि आप किसी कारणवश मंदिर जाकर भगवान श्री कृष्ण की पूरी विधि-विधान से पूजा-अर्चना नहीं कर पा रहे हैं, तब भी आपको निराश होने की जरूरत नहीं है। ऐसे में केवल दो अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली मंत्रों का जाप करके आप भगवान को प्रसन्न कर सकते हैं। ये दोनों ही मंत्र भगवान श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं और इनके स्मरण मात्र से कान्हा की विशेष कृपा बरसती है। यदि आप “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा” अथवा “ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः” मंत्र का पूरे मन से जाप करते हैं, तो यह बहुत लाभप्रद सिद्ध होता है। इन मंत्रों के प्रभाव से जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं, भगवान श्री कृष्ण अति प्रसन्न होते हैं और साधक की हर इच्छा पूरी करते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nजन्माष्टमी के पावन पर्व पर व्रत न रख पाने की स्थिति में भी इन मंत्रों के जाप से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ मिलता है।\n\n• भारत में: देश भर के करोड़ों श्रद्धालु जो स्वास्थ्य या अन्य कारणों से उपवास नहीं रख पाते, वे इन मंत्रों के जाप से घर बैठे भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।\n\n• दैनिक जीवन: इन विशेष मंत्रों का नियमित उच्चारण करने से मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।\n\n• आस्था और परंपरा: जो लोग मंदिर जाकर लंबी पूजा में शामिल नहीं हो सकते, वे साधारण तरीके से घर पर ही इन पंक्तियों का जाप करके अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं।\n\n• पारिवारिक माहौल: इस धार्मिक अनुष्ठान से परिवार के सदस्यों में सामंजस्य और आध्यात्मिक जुड़ाव मजबूत होता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजन्माष्टमी के दिन व्रत के स्थान पर मंत्र जाप के महत्व के पीछे धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।\n\n• शास्त्रों का विधान: हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि में हुआ था।\n\n• भक्ति का मार्ग: यदि किसी कारणवश उपवास रखना संभव न हो, तो सच्चे मन से किए गए मंत्र जाप से भी ईश्वरीय ऊर्जा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।\n\n• मंदिर की परंपराएं: बैद्यनाथ मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के विद्वान पुजारियों द्वारा ऐसे विशेष मंत्रों को भक्तों के कल्याण के लिए सुझाया जाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस वर्ष जन्माष्टमी का त्योहार कब मनाया जाएगा?\nइस वर्ष पूरे देश में 16 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा।\n\n2. यदि व्रत न रख सकें तो क्या करना चाहिए?\nव्रत न रख पाने की स्थिति में विशेष मंत्रों का जाप करने से व्रत के समान ही फल प्राप्त होता है।\n\n3. जन्माष्टमी पर कौन से दो प्रमुख मंत्रों का जाप करना चाहिए?\nइस दिन “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा” या “ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः” का जाप करना चाहिए।\n\n4. यह जानकारी किसने दी है?\nयह जानकारी बैद्यनाथ मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने दी है।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-10-18",
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