# जहानाबाद के इस चमत्कारी बेर के पेड़ पर बिछड़े अपनों को ढूंढने आते हैं लोग

> बिहार के जहानाबाद में एक अनोखा बेर का पेड़ है, जिसे लेकर लोगों में गहरी आस्था है कि यहां कपड़े लटकाने से बिछड़े हुए परिजन वापस लौट आते हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/jehanabad-ke-isa-chamatkari-ber-ke-ped-par-bishde-apno-ko-dhundne-aate-hain-log-39599 · **Language:** Hindi
**Tags:** जहानाबाद, बिहार, चमत्कारी पेड़, दरगाह, आस्था, बिहार न्यूज़

बिहार के जहानाबाद जिले में एक ऐसा अनोखा और चमत्कारिक बेर का पेड़ मौजूद है, जिसके बारे में दूर-दूर तक लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। जिला मुख्यालय में स्थित सदर अस्पताल के बिल्कुल सामने मजार के पास यह पेड़ खड़ा है। इस स्थान को लेकर स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं में यह मान्यता प्रचलित है कि यदि परिवार का कोई सदस्य घर से बिछड़ जाता है या अचानक कहीं खो जाता है, तो उसके पहने हुए कपड़ों को लाकर इस बेर के पेड़ पर फेंक दिया जाता है। लोगों का ऐसा विश्वास है कि यदि वह फेंका हुआ कपड़ा पेड़ की शाखाओं पर अटक जाता है, तो वह व्यक्ति निश्चित रूप से अपने घर वापस लौट आता है। वहीं दूसरी ओर, यदि कपड़ा पेड़ से नीचे गिर जाता है, तो परिजनों की उम्मीदें और प्रार्थनाएं कमजोर पड़ने लगती हैं। आज भी यदि कोई इस स्थल के पास जाकर उस बेर के पेड़ को देखेगा, तो उसे शाखाओं पर लटके हुए अनगिनत इंसानी कपड़े नजर आ जाएंगे।

## अटूट आस्था और मजार परिसर का इतिहास
इस बेर के पेड़ पर लटके हुए कपड़े इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि यहां आने वाले लोगों के दिलों में इस स्थान के प्रति कितनी बड़ी श्रद्धा और विश्वास बसता है। यही एक मुख्य वजह है कि जीवन की परेशानियों से घिरे लोग यहां अपनी गुहार लेकर पहुंचते हैं और मन्नत मांगते हैं। यह प्रसिद्ध बेर का पेड़ हजरत हैदर शाह शैलानी की मजार के परिसर के भीतर ही स्थित है। जब इस पेड़ के सही इतिहास या उम्र के बारे में सवाल किया जाता है, तो दरगाह के गद्दीनशीन द्वारा यह पूरी तरह साफ नहीं किया जाता है कि यह बेर का पेड़ असल में कितना पुराना है। हालांकि, इसी मजार परिसर के भीतर मौजूद एक अन्य पेड़ का इतिहास 116 साल पुराना बताया जाता है। इस पवित्र स्थल पर मन्नत मांगने के लिए केवल किसी एक विशेष समुदाय के लोग ही नहीं आते हैं, बल्कि हर धर्म और वर्ग के लोगों की इस स्थान पर गहरी आस्था है और वे अपनी मनोकामनाओं के साथ यहां पहुंचते हैं।

## दरगाह से जुड़ी प्राचीन परंपराएं और मान्यताएं
दरगाह हजरत हैदर शाह शैलानी के गद्दीनशीन मो. इकबाल अहमद अयूबी ने बातचीत के दौरान बताया कि घर से जो कोई भी व्यक्ति बाहर चला जाता है या अचानक कहीं गुम हो जाता है या फिर बहुत लंबे समय से अपने घर वापस नहीं लौट पाता है, तो ऐसे संकट में फंसे परेशान परिवार के लोग उस व्यक्ति के इस्तेमाल किए हुए कपड़े को यहां लाकर बेर के पेड़ पर फेंकते हैं। यदि वह कपड़ा पेड़ पर ही अटक जाता है, तो ऐसी मान्यता है कि वह शख्स जल्द ही अपने घर सुरक्षित लौट आता है। गद्दीनशीन ने यह भी बताया कि यहां आने के बाद कई ऐसे परिवार भी रहे हैं जिनके बिछड़े हुए अपने उनसे दोबारा आ कर मिले हैं। इस जगह पर सभी धर्मों के लोग पूरी श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं और यह अनोखी परंपरा बेहद प्राचीन काल चली आ रही है। हालांकि वह इस बेर के पेड़ की सटीक उम्र के बारे में तो नहीं बता सकते, लेकिन इसके ही परिसर के अंदर खड़ा एक इमली का पेड़ वर्ष 1916 के सर्वे रिकॉर्ड बुक में दर्ज है।

## विशाल इतिहास और नामचीन हस्तियों का आना
यह ऐतिहासिक दरगाह जिला मुख्यालय में स्थित हॉस्पिटल मोड़ के नजदीक बेहद प्रमुखता से अवस्थित है। इस दरगाह की अपनी एक बहुत ही विशेष और अलग मान्यता है, जिसकी वजह से देश की कई बड़ी और प्रतिष्ठित शख्सियतें यहां आकर चादरपोशी करती हैं। हर साल इस दरगाह पर उर्स का आयोजन भी धूमधाम से किया जाता है और इस वर्ष मनाए जाने वाले उर्स को लेकर भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। गद्दीनशीन इकबाल अहमद अयूबी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह दरगाह करीब 815 साल पुरानी है और यह मजार हजरत हैदर शाह शैलानी की है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वह श्रीलंका से आए थे। जिले के इस खास स्थान पर मजार का होना और इसकी अत्यधिक प्राचीनता ही वह मुख्य कारण है जिसके चलते देश की कई नामचीन हस्तियां इस स्थान तक अपनी हाजिरी लगाने पहुंचती रही हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. यह चमत्कारी बेर का पेड़ कहां स्थित है?
यह बेर का पेड़ बिहार के जहानाबाद जिले में जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल के सामने मजार के पास स्थित है।

### 2. इस पेड़ से कौन सी मान्यता जुड़ी हुई है?
मान्यता है कि घर से बिछड़े या खोए हुए व्यक्ति के कपड़े इस बेर के पेड़ पर फेंकने से यदि वे अटक जाएं, तो वह व्यक्ति वापस लौट आता है।

### 3. इस दरगाह और परिसर का इतिहास कितना पुराना बताया जाता है?
गद्दीनशीन के अनुसार दरगाह करीब 815 साल पुरानी है और इसके परिसर में मौजूद एक इमली का पेड़ 1916 के सर्वे रिकॉर्ड बुक में दर्ज है।

### 4. इस मजार के गद्दीनशीन कौन हैं?
दरगाह हजरत हैदर शाह शैलानी के गद्दीनशीन मो. इकबाल अहमद अयूबी हैं।

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