# झारखंड का बारनी घाट: जहां देवताओं के विश्राम की कथा और चट्टानों पर उभरे रहस्यमयी निशान

> बोकारो के चास प्रखंड स्थित कुमरी गांव में दामोदर नदी किनारे बसा बारनी घाट चट्टानों पर उकेरी आकृतियों, स्वयंभू शिवलिंगों और लोककथाओं के कारण श्रद्धालुओं व पर्यटकों का बड़ा आकर्षण है।

**Category:** धर्म · **Published:** 2026-06-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/jharkhand-ka-barani-ghata-jahan-devataon-ke-vishrama-ki-katha-aura-chattanon-par-182

झारखंड के बोकारो जिले में चास प्रखंड के अंतर्गत आने वाले कुमरी गांव में दामोदर नदी के तट पर स्थित बारनी घाट, जिसे आसपास के लोग बारुनी घाट भी कहते हैं, आस्था, इतिहास और लोकमान्यताओं का एक विलक्षण संगम है। यहां की प्राकृतिक चट्टानों पर उभरे रहस्यमयी निशान, देवी-देवताओं जैसी दिखने वाली आकृतियां और एक ही जगह विराजमान कई शिवलिंग इस स्थल को विशिष्ट पहचान देते हैं। इन्हीं खूबियों के चलते यह घाट श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचता है।

## विशाल चट्टानों पर उभरी आकृतियां
इस घाट की सबसे प्रमुख विशेषता यहां की बड़ी-बड़ी चट्टानों पर उकेरी प्रतीत होने वाली आकृतियां हैं। गांव के लोगों का विश्वास है कि इन आकृतियों में भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरूप झलकते हैं। इसके साथ ही चट्टानों पर शंख, चरण पादुका और कई अन्य धार्मिक प्रतीक जैसे चिन्ह भी देखे जा सकते हैं, जो लोगों के मन में कौतूहल के साथ-साथ गहरी श्रद्धा भी जगाते हैं।

## पीढ़ियों से चले आ रहे धार्मिक चिन्ह
कुमरी गांव के निवासी अतुल महतो का कहना है कि घाट पर मौजूद स्वयंभू शिवलिंग और प्राचीन धार्मिक चिन्ह यहां कई पीढ़ियों से विद्यमान हैं। गांव के बुजुर्गों से सुनी बातों के अनुसार इस स्थल की धार्मिक मान्यता बेहद पुरानी है। प्रत्येक वर्ष चैती महीने में यहां भव्य बारनी मेले का आयोजन होता है, जिसमें बोकारो के साथ-साथ आसपास के अनेक जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।

## मान्यता: यहां देवताओं ने किया था विश्राम
स्थानीय ग्रामीण विशाल राय बताते हैं कि बारनी घाट महज एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि लोककथाओं और पुरातन विश्वासों का भी केंद्र है। यहां के लोगों में यह धारणा गहराई से बैठी है कि किसी प्राचीन युग में देवी-देवताओं ने इसी स्थान पर विश्राम किया था। माना जाता है कि उसी समय उनके चरणों के निशान चट्टानों पर अंकित हो गए, जिन्हें श्रद्धालु आज भी चरण पादुका मानकर पूजते हैं। साथ ही एक ही स्थल पर कई शिवलिंगों का होना इस घाट को बाकी धार्मिक स्थलों से अलग खड़ा कर देता है।

## श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र
घाट परिसर में बना ओंकारेश्वर मंदिर भी भक्तों की आस्था का अहम स्थल है। यहां प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा होती है और दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। बारनी घाट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु और पर्यटक सड़क मार्ग से कुमरी गांव तक आसानी से पहुंच सकते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक महत्व और रहस्य से भरे प्रतीकों से सजा यह स्थल बोकारो के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्रों में अपनी अलग छाप रखता है।

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