ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025: इस खास दिन बन रहे हैं दुर्लभ योग, सुख और समृद्धि के लिए आजमाएं ये अचूक उपाय हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ पूर्णिमा का बहुत अधिक आध्यात्मिक महत्व है, जिसे जेठ पूर्णिमा भी कहते हैं। इस बार इस तिथि पर कई दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं, जिसमें मां लक्ष्मी की कृपा पाने के विशेष उपाय किए जा सकते हैं। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का दिन अत्यधिक आध्यात्मिक महत्व रखता है, जिसे सामान्य भाषा में जेठ पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने और व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की विधिवत पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। उज्जैन के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस साल की ज्येष्ठ पूर्णिमा विशेष रूप से खास है क्योंकि इस दिन मूल नक्षत्र और शुक्ल योग का दुर्लभ संगम देखने को मिलेगा, जो भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी साबित हो सकता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग की गणनाओं के आधार पर, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 29 जून को भोर में 3 बजकर 6 मिनट पर हो रहा है। इस तिथि की समाप्ति अगले दिन यानी 30 जून को सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर होगी। उदयातिथि की मान्यताओं का पालन करते हुए ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व 29 जून को ही मनाया जाना उचित है। यदि आप इस दिन स्नान और पूजा का पूर्ण लाभ उठाना चाहते हैं, तो ब्रह्म मुहूर्त में उठना अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक अनुष्ठानों और पवित्र स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय 4 बजकर 6 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक निर्धारित है। धार्मिक महत्व और लाभ ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण का पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। विधि-विधान से पूजा करने पर परिवार के भीतर सुख और शांति का वातावरण बनता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। संध्या के समय माता लक्ष्मी की उपासना करना और उन्हें प्रिय भोग अर्पित करना धन और वैभव की प्राप्ति में सहायक माना जाता है। इसके अतिरिक्त, इस दिन चंद्रदेव को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है और मन की चंचलता दूर होकर आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। पूर्णिमा पर अवश्य करें ये विशेष उपाय • लक्ष्मी कृपा: माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने के बाद खीर में मिश्री डालकर उन्हें अर्पित करें। कहा जाता है कि इससे घर में खुशहाली और संपन्नता बनी रहती है। • चंद्रमा की पूजा: पूर्णिमा की रात चंद्रमा को दूध, जल, अक्षत और सफेद फूलों का अर्घ्य दें। यह मानसिक सुकून और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका है। • मुख्य द्वार पर दीप: पूर्णिमा की सुबह अपने घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना सौभाग्य का सूचक माना जाता है। इससे घर के वातावरण में मंगलमय और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। • शिव पूजन: पूर्णिमा के अवसर पर शिवलिंग पर बेलपत्र और पुष्प अर्पित करें। भगवान शिव की कृपा से भक्त के जीवन में सुख और शांति का आशीर्वाद मिलता है। • अन्नदान: ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन दान और सेवा कार्यों का विशेष महत्व है। किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और मन को शांति मिलती है। इसका आप पर असर देशभर में: इस विशेष दिन पर किए गए दान और पूजा से मानसिक शांति और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। उज्जैन में: स्थानीय निवासियों के लिए महाकालेश्वर मंदिर और अन्य पवित्र स्थलों पर दर्शन करना इस शुभ संयोग में विशेष फलदायी हो सकता है। सवाल-जवाब 1. ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 कब है? ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून 2025 को मनाई जाएगी। 2. स्नान के लिए सबसे शुभ समय क्या है? स्नान के लिए सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त है, जो सुबह 4 बजकर 6 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। 3. इस दिन किन देवताओं की पूजा करनी चाहिए? इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और भगवान शिव की पूजा करना बहुत फलदायी माना गया है। 4. घर में सुख-समृद्धि के लिए क्या करें? घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं और मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं। https://trendkia.com/religion/jyeshtha-purnima-2025-isa-khasa-dina-bana-rahe-hain-durlabha-yoga-sukha-aura-samriddhi-ke-lie-ajamaen-ye-achuka-upaya-3407 TrendKia — Har trend, sabse pehle.