{
  "type": "article",
  "title": "कार्तिक कृष्ण पक्ष दशमी का दैनिक पंचांग, जानें शुभ काल और शहरवार राहुकाल समय",
  "summary": "4 नवंबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के साथ ब्रह्म और इंद्र योग का प्रभाव रहेगा। दिन के मांगलिक मुहूर्त, नक्षत्र महत्व और प्रमुख शहरों के राहुकाल समय की पूरी जानकारी प्राप्त करें।",
  "content": "वैदिक ज्योतिषीय गणना के अनुसार 4 नवंबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि का संयोग बन रहा है। सप्ताह के तीसरे दिन यानी बुधवार को यह दशमी तिथि दोपहर पूर्व 11:04 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसके तुरंत बाद एकादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिथि और ग्रहों का यह विशेष क्रम पूजा पाठ तथा महत्वपूर्ण दैनिक संकल्पों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।\n\nदिन के प्रमुख ग्रह योग एवं नक्षत्र स्थिति\nदिन की शुरुआत सुबह 08:01 बजे तक ब्रह्म योग के सान्निध्य में होगी। इसके पश्चात इंद्र योग का संचरण प्रारंभ हो जाएगा, जिसे राजकीय तथा प्रशासनिक कार्यों में विजय और सिद्धि दिलाने वाला माना गया है। नक्षत्र मंडल की दृष्टि से आकाश में पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र देर रात 03:30 बजे तक उपस्थित रहेगा। यह समस्त सत्ताईस नक्षत्रों की शृंखला में ग्यारहवें स्थान पर आता है, जिसका प्रतीक चिह्न चारपाई के अग्रिम पायों को माना गया है। इस नक्षत्र का सीधा संबंध सिंह राशि से है।\n\nपूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का वनस्पति जगत में पलाश अर्थात ढाक के वृक्ष से घनिष्ठ संबंध माना जाता है। इस नक्षत्र में उत्पन्न जातकों के लिए विधान है कि वे ढाक की शाखाओं, काष्ठ अथवा पुष्पों को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचाएं। इसके विपरीत, इस दिन अथवा इस नक्षत्र के प्रभाव में रहने वाले व्यक्तियों को पलाश वृक्ष का संरक्षण और पूजन करना श्रेयस्कर फल प्रदान करता है।\n\nदैनिक शुभ मुहूर्त एवं सूर्यास्त समय सारणी\nबुधवार के दिन सूर्य देव का उदय प्रातः 06:35 बजे होगा, जबकि सांध्यकालीन सूर्यास्त शाम 05:34 बजे संपन्न होगा। दिन के विशेष मुहूर्तों की समय सीमा इस प्रकार निर्धारित है\n\n• ब्रह्म मुहूर्त: भोर में 04:51 बजे से आरंभ होकर 05:43 बजे तक।\n• प्रातः सन्ध्या काल: तड़के 05:17 बजे से सुबह 06:35 बजे तक।\n• अभिजित मुहूर्त: इस दिवस कोई अभिजित मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।\n• विजय मुहूर्त: दोपहर 01:54 बजे से 02:38 बजे तक।\n• गोधूलि वेला: सायं 05:34 बजे से 06:00 बजे तक।\n• सायाह्न सन्ध्या: शाम 05:34 बजे से 06:52 बजे तक।\n• अमृत काल: रात्रि 09:05 बजे से 10:41 बजे तक।\n\nविभिन्न महानगरों में राहुकाल की समय सारणी\nशास्त्रों में किसी भी नए उपक्रम अथवा शुभ अनुष्ठान के लिए राहुकाल की अवधि को पूर्णतः त्याज्य माना गया है। देश के प्रमुख शहरों में 4 नवंबर को राहुकाल का समय क्षेत्रीय सूर्योदय के आधार पर भिन्न रहेगा\n\n• दिल्ली: दोपहर 12:05 बजे से 01:27 बजे तक।\n• मुंबई: दोपहर 12:22 बजे से 01:48 बजे तक।\n• चंडीगढ़: दोपहर 12:06 बजे से 01:28 बजे तक।\n• लखनऊ: पूर्वाह्न 11:50 बजे से दोपहर 01:13 बजे तक।\n• भोपाल: दोपहर 12:04 बजे से 01:28 बजे तक।\n• कोलकाता: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक।\n• अहमदाबाद: दोपहर 12:23 बजे से 01:47 बजे तक।\n• चेन्नई: पूर्वाह्न 11:52 बजे से दोपहर 01:20 बजे तक।\n\nआचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, नक्षत्र और योग की इस चाल के आधार पर अपने महत्वपूर्ण निर्णय और धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित करना अत्यंत फलदायी सिद्ध होता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह पंचांग उन पाठकों के लिए सीधे उपयोगी है जो अपने दैनिक धार्मिक अनुष्ठान, पूजा अथवा नवीन कार्य का आरंभ शुभ समय देखकर करना चाहते हैं।\n\n• धार्मिक अनुष्ठानों के लिए: दशमी तिथि दोपहर पूर्व 11:04 बजे तक ही रहेगी, जिसके उपरांत एकादशी तिथि लग जाएगी। यदि आप दशमी से संबंधित व्रत अथवा संकल्प लेना चाहते हैं तो प्रातः काल ही पूर्ण कर लें।\n• महत्वपूर्ण कार्यों के आरंभ के लिए: सुबह 08:01 बजे के बाद आरंभ होने वाला इंद्र योग सरकारी अथवा प्रशासनिक कार्यों में प्रगति के लिए शुभ माना गया है। ऐसे जरूरी कार्यों को दोपहर के विजय मुहूर्त में पूरा करने की योजना बना सकते हैं।\n• अशुभ समय से बचाव के लिए: प्रत्येक शहर में दोपहर के समय लगभग डेढ़ घंटे की अवधि राहुकाल की रहेगी। इस दौरान किसी भी नए आर्थिक अनुबंध, यात्रा या शुभ कार्य को शुरू करने से बचें।\n• विशेष वृक्ष संरक्षण नियम: पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों को ढाक के वृक्ष को किसी भी रूप में क्षति पहुंचाने से बचने की सलाह दी गई है। इसके स्थान पर पलाश के वृक्ष की पूजा करना धार्मिक दृष्टि से लाभकारी बताया गया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदैनिक पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा के विभिन्न राशियों तथा नक्षत्रों में गोचर की परस्पर गतियों पर आधारित होती है, जिससे तिथियों और योगों का क्रमिक परिवर्तन होता है।\n\n• तिथि परिवर्तन का कारण: चंद्रमा और सूर्य के बीच बारह अंश के कोणीय अंतर के पूरा होने पर एक तिथि समाप्त होकर अगली तिथि प्रारंभ होती है। यही वजह है कि दशमी तिथि 4 नवंबर को दोपहर 11:04 बजे समाप्त होकर एकादशी में परिवर्तित हो रही है।\n• योगों का क्रमिक बदलाव: सूर्य और चंद्र के भोगांशों के योग से सत्ताईस योगों का चक्र निरंतर चलता रहता है। प्रातः 08:01 बजे ब्रह्म योग के समापन के साथ ही इंद्र योग का प्रभाव क्षेत्र आरंभ हो रहा है।\n• नक्षत्र का संचरण: चंद्रमा लगभग सत्ताईस दिनों में संपूर्ण भचक्र की परिक्रमा पूरी करता है, जिससे वह प्रतिदिन एक नक्षत्र को पार करता है। इसके चलते पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का विस्तार बुधवार देर रात तक बना हुआ है।\n• राहुकाल का भौगोलिक अंतर: प्रत्येक नगर में सूर्योदय का स्थानीय समय अलग-अलग होने के कारण दिन के आठवें भाग की गणना में अंतर आता है। इसी कारण दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में राहुकाल के प्रारंभ और अंत के समय भिन्न दिखाई देते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. 4 नवंबर 2026 को दशमी तिथि कब तक रहेगी?\nकार्तिक कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि दोपहर पहले 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी।\n\n2. दिन में कौन से दो प्रमुख योग बन रहे हैं?\nसुबह 8 बजकर 1 मिनट तक ब्रह्म योग रहेगा और उसके बाद इंद्र योग प्रभावी होगा।\n\n3. पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव कब तक रहेगा?\nपूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र 4 नवंबर को देर रात 3 बजकर 30 मिनट तक उपस्थित रहेगा।\n\n4. पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए क्या निर्देश है?\nइस नक्षत्र में जन्मे जातकों को पलाश (ढाक) के पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए और उसकी पूजा करनी चाहिए।\n\n5. दिल्ली में राहुकाल का समय क्या रहेगा?\nदिल्ली में राहुकाल दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।\n\n6. क्या 4 नवंबर 2026 को कोई अभिजित मुहूर्त है?\nपंचांग के अनुसार इस दिन कोई भी अभिजित मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।",
  "url": "https://trendkia.com/religion/kartik-krishna-paksha-dashami-ka-dainika-pnchanga-janen-shubha-kala-aura-shaharavara-rahu-kaal-samaya-55754",
  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-11-03",
  "tags": [
    "दैनिक पंचांग",
    "कार्तिक मास",
    "दशमी तिथि",
    "राहुकाल समय",
    "पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र",
    "शुभ मुहूर्त"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia",
  "whatItMeansForYou": "यह पंचांग उन पाठकों के लिए सीधे उपयोगी है जो अपने दैनिक धार्मिक अनुष्ठान, पूजा अथवा नवीन कार्य का आरंभ शुभ समय देखकर करना चाहते हैं।\n\n• धार्मिक अनुष्ठानों के लिए: दशमी तिथि दोपहर पूर्व 11:04 बजे तक ही रहेगी, जिसके उपरांत एकादशी तिथि लग जाएगी। यदि आप दशमी से संबंधित व्रत अथवा संकल्प लेना चाहते हैं तो प्रातः काल ही पूर्ण कर लें।\n• महत्वपूर्ण कार्यों के आरंभ के लिए: सुबह 08:01 बजे के बाद आरंभ होने वाला इंद्र योग सरकारी अथवा प्रशासनिक कार्यों में प्रगति के लिए शुभ माना गया है। ऐसे जरूरी कार्यों को दोपहर के विजय मुहूर्त में पूरा करने की योजना बना सकते हैं।\n• अशुभ समय से बचाव के लिए: प्रत्येक शहर में दोपहर के समय लगभग डेढ़ घंटे की अवधि राहुकाल की रहेगी। इस दौरान किसी भी नए आर्थिक अनुबंध, यात्रा या शुभ कार्य को शुरू करने से बचें।\n• विशेष वृक्ष संरक्षण नियम: पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों को ढाक के वृक्ष को किसी भी रूप में क्षति पहुंचाने से बचने की सलाह दी गई है। इसके स्थान पर पलाश के वृक्ष की पूजा करना धार्मिक दृष्टि से लाभकारी बताया गया है।",
  "whyItHappened": "दैनिक पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा के विभिन्न राशियों तथा नक्षत्रों में गोचर की परस्पर गतियों पर आधारित होती है, जिससे तिथियों और योगों का क्रमिक परिवर्तन होता है।\n\n• तिथि परिवर्तन का कारण: चंद्रमा और सूर्य के बीच बारह अंश के कोणीय अंतर के पूरा होने पर एक तिथि समाप्त होकर अगली तिथि प्रारंभ होती है। यही वजह है कि दशमी तिथि 4 नवंबर को दोपहर 11:04 बजे समाप्त होकर एकादशी में परिवर्तित हो रही है।\n• योगों का क्रमिक बदलाव: सूर्य और चंद्र के भोगांशों के योग से सत्ताईस योगों का चक्र निरंतर चलता रहता है। प्रातः 08:01 बजे ब्रह्म योग के समापन के साथ ही इंद्र योग का प्रभाव क्षेत्र आरंभ हो रहा है।\n• नक्षत्र का संचरण: चंद्रमा लगभग सत्ताईस दिनों में संपूर्ण भचक्र की परिक्रमा पूरी करता है, जिससे वह प्रतिदिन एक नक्षत्र को पार करता है। इसके चलते पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का विस्तार बुधवार देर रात तक बना हुआ है।\n• राहुकाल का भौगोलिक अंतर: प्रत्येक नगर में सूर्योदय का स्थानीय समय अलग-अलग होने के कारण दिन के आठवें भाग की गणना में अंतर आता है। इसी कारण दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में राहुकाल के प्रारंभ और अंत के समय भिन्न दिखाई देते हैं।",
  "questionsAndAnswers": [
    {
      "question": "4 नवंबर 2026 को दशमी तिथि कब तक रहेगी?",
      "answer": "कार्तिक कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि दोपहर पहले 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी।"
    },
    {
      "question": "दिन में कौन से दो प्रमुख योग बन रहे हैं?",
      "answer": "सुबह 8 बजकर 1 मिनट तक ब्रह्म योग रहेगा और उसके बाद इंद्र योग प्रभावी होगा।"
    },
    {
      "question": "पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव कब तक रहेगा?",
      "answer": "पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र 4 नवंबर को देर रात 3 बजकर 30 मिनट तक उपस्थित रहेगा।"
    },
    {
      "question": "पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए क्या निर्देश है?",
      "answer": "इस नक्षत्र में जन्मे जातकों को पलाश (ढाक) के पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए और उसकी पूजा करनी चाहिए।"
    },
    {
      "question": "दिल्ली में राहुकाल का समय क्या रहेगा?",
      "answer": "दिल्ली में राहुकाल दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।"
    },
    {
      "question": "क्या 4 नवंबर 2026 को कोई अभिजित मुहूर्त है?",
      "answer": "पंचांग के अनुसार इस दिन कोई भी अभिजित मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।"
    }
  ]
}