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  "type": "article",
  "title": "कार्तिक माह में रमा एकादशी 5 नवंबर को, जानिए सम्पूर्ण पूजन विधान और पारण मुहूर्त",
  "summary": "कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी का उपवास 5 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष विधान है।",
  "content": "कार्तिक मास के दौरान जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस पावन महीने में किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान, तप और साधना से साधक को अक्षय पुण्यों का आशीष मिलता है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है, जो दिवाली से कुछ दिन पहले आती है। इस पावन अवसर पर नारायण के साथ माता लक्ष्मी की उपासना करने से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और वैभव का वास होता है। इस वर्ष कार्तिक माह की इस पहली एकादशी का व्रत 5 नवंबर को श्रद्धापूर्वक रखा जा रहा है।\n\nरमा एकादशी पूजन की प्रामाणिक विधि\nएकादशी के पावन दिन पर सुबह सबेरे सूर्योदय से पूर्व शैया त्यागकर दैनिक नित्यकर्मों से निवृत्त होना चाहिए। इसके उपरांत स्नान ध्यान करके स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा है। भगवान विष्णु को पीतांबर प्रिय होने के कारण पीले रंग का प्रयोग उत्तम फलदायी माना जाता है। स्नान के बाद अपने आराध्य देव के सम्मुख खड़े होकर अंजलि में शुद्ध जल एवं अक्षत लेकर दिनभर उपवास रखने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए। इसके पश्चात घर के पूजा स्थल अथवा मंदिर को भलीभांति गंगाजल या स्वच्छ जल से पवित्र करें और वहां लकड़ी का एक साफ पाटा स्थापित करें।\n\nउस पवित्र चौकी पर साफ पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु तथा माता महालक्ष्मी की प्रतिमा अथवा सुंदर चित्रपट को प्रतिष्ठापित करना चाहिए। प्रतिमा के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें और सुगंधित धूपबत्ती जलाएं। इसके बाद नारायण को पीत चंदन, रोली, अक्षत, पीले पुष्प, मौसमी फल और शुद्ध नैवेद्य श्रद्धाभाव से अर्पित करें। साथ ही माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सोलह श्रृंगार की पूजन सामग्री भेंट करनी चाहिए।\n\nवैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल को सम्मिलित करना अनिवार्य नियम है। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी पत्र के श्रीहरि किसी भी भोग या नैवेद्य को ग्रहण नहीं करते हैं। संपूर्ण पूजन संपन्न करने के पश्चात एकादशी व्रत महात्म्य की पवित्र कथा का श्रवण अथवा पठन अवश्य करें। कथा के समापन पर नारायण की धूप, दीप और कपूर से मंगल आरती उतारें तथा पवित्र वैदिक मंत्रों का एकाग्रचित्त होकर जाप करें।\n\nरमा एकादशी 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और शुभ मुहूर्त\nवैदिक पंचांग की गणनाओं के आधार पर कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 4 नवंबर को पूर्वाह्न 11 बजकर 3 मिनट पर हो जाएगी। इस तिथि का विस्तार अगले दिन यानी 5 नवंबर को प्रातः काल 10 बजकर 35 मिनट तक बना रहेगा। सूर्योदयव्यापिनी उदया तिथि की मान्यता के अनुसार व्रत का अनुष्ठान 5 नवंबर को ही किया जाना शास्त्रसम्मत है।\n\nपूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाने वाला ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5 बजे से लेकर प्रातः 5 बजकर 50 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके उपरांत दोपहर के समय विजय और सफलता प्रदान करने वाला अभिजित मुहूर्त पूर्वाह्न 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं संध्या वंदन और दीपदान के लिए उपयुक्त गोधूलि मुहूर्त शाम को 6 बजकर 3 मिनट से शाम 6 बजकर 29 मिनट की अवधि में रहेगा। इन निर्धारित शुभ मुहूर्तों में की गई पूजा विशेष फल प्रदान करती है।\n\nविष्णु कृपा प्राप्ति के लिए कल्याणकारी मंत्र\nएकादशी के दिन मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रभु के इन पावन मंत्रों का तुलसी माला से कम से कम 108 बार जाप करना अत्यंत शुभकारी माना गया है\n\n• नारायण मंत्र: ॐ नमोः नारायणाय॥\n• वासुदेव मंत्र: ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥\n• विष्णु गायत्री मंत्र: ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥\n\nपारण के नियम और द्वादशी का सही समय\nकिसी भी एकादशी व्रत की पूर्णता उसके शास्त्रीय पारण से ही संभव होती है। पारण का सीधा अर्थ व्रत के उपरांत अन्न जल ग्रहण करके उपवास को विधिपूर्वक संपन्न करना है। इस वर्ष रमा एकादशी व्रत का पारण 6 नवंबर 2026 के दिन संपन्न किया जाएगा। व्रत खोलने के लिए सबसे प्रशस्त समय प्रातः काल 6 बजकर 41 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 57 मिनट के मध्य रहेगा।\n\nशास्त्रों के कड़े निर्देश के अनुसार एकादशी व्रत का पारण हर हाल में द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पूर्व कर लेना अनिवार्य है। 6 नवंबर को द्वादशी तिथि का समापन प्रातः काल 10 बजकर 30 मिनट पर हो जाएगा। धार्मिक नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि द्वादशी अवधि बीत जाने के बाद पारण करना घोर दोष अथवा पाप के समान माना जाता है। इसके अतिरिक्त यदि किसी कारणवश द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व ही पूरी हो चुकी हो, तो उस स्थिति में साधक को सूर्योदय के पश्चात ही पारण करना चाहिए। अतः व्रतियों को समय सीमा का ध्यान रखते हुए प्रातः काल शुभ वेला में ही अपने व्रत का उद्यापन करना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nइस व्रत का पालन करने वाले भक्तों के लिए पूजा की तिथियों और समय सीमा का सही पालन करना अत्यंत आवश्यक है।\n\n• पूजा का समय: व्रत का अनुष्ठान 5 नवंबर को उदया तिथि के अनुसार किया जाएगा। व्रती प्रातः 5:00 से 5:50 बजे के ब्रह्म मुहूर्त में मुख्य अनुष्ठान आरंभ कर सकते हैं।\n• पारण की समय सीमा: उपवास खोलने का शुभ समय 6 नवंबर को सुबह 6:41 से 8:57 बजे के बीच निर्धारित है। साधकों को सुबह 10:30 बजे द्वादशी समाप्त होने से पहले ही भोजन ग्रहण करना होगा।\n• तुलसी का प्रयोग: भोग में तुलसी के पत्तों का होना अनिवार्य है। बिना तुलसी दल के अर्पित किया गया नैवेद्य अधूरा माना जाता है।\n• वस्त्र और नियम: पूजा के दौरान पीले परिधान धारण करने की सलाह दी जाती है। यह रंग श्रीहरि को अति प्रिय माना गया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकार्तिक माह में आने वाली रमा एकादशी का आयोजन पंचांग तिथियों और प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किया जाता है।\n\n• कार्तिक मास की महत्ता: कार्तिक का पूरा महीना भगवान विष्णु की विशेष उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। इस अवधि में किए गए जप, तप और उपवास का आध्यात्मिक फल कई गुना अधिक मिलता है।\n• तिथि की गणना: एकादशी तिथि 4 नवंबर को सुबह 11:03 बजे आरंभ होकर 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे तक रहेगी। शास्त्रों में उदया तिथि की प्रधानता होने के कारण 5 नवंबर को ही व्रत रखने का निर्णय लिया गया है।\n• द्वादशी में पारण का विधान: एकादशी व्रत का समापन सदैव द्वादशी तिथि के भीतर ही करने का शास्त्रीय नियम है। इसी कारण 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे द्वादशी समाप्त होने से पहले पारण का समय निर्धारित किया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रमा एकादशी का व्रत किस तारीख को रखा जाएगा?\nरमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर को उदया तिथि के आधार पर रखा जाएगा।\n\n2. एकादशी तिथि कब से कब तक रहेगी?\nएकादशी तिथि 4 नवंबर को पूर्वाह्न 11 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी।\n\n3. पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त कौन से हैं?\nप्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:00 से 5:50 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:59 से 12:45 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:03 से 6:29 बजे तक रहेगा।\n\n4. रमा एकादशी व्रत का पारण कब और किस समय किया जाएगा?\nव्रत का पारण 6 नवंबर 2026 को सुबह 6 बजकर 41 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 57 मिनट के बीच किया जाएगा।\n\n5. पारण के लिए द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय क्या है?\nद्वादशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी, जिससे पहले पारण करना आवश्यक है।\n\n6. भगवान विष्णु के भोग में किस चीज का होना अनिवार्य माना गया है?\nभगवान विष्णु के भोग में तुलसी के पत्ते का होना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि इसके बिना भोग स्वीकार नहीं होता।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-11-04",
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