# कोढ़ रोग से मुक्ति दिलाने वाला योगिनी एकादशी व्रत, जानें राजा कुबेर के श्राप की पूरी कथा

> 10 जुलाई 2026 को रखा जाएगा योगिनी एकादशी व्रत, मान्यता है कि यह 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य देता है। जानिए राजा कुबेर के सेवक हेममाली को मिले श्राप और उससे मुक्ति की पूरी कथा।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-07-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/korha-roga-se-mukti-dilane-vala-yogini-ekadashi-vrata-janen-raja-kubera-ke-shrapa-ki-puri-katha-5122 · **Language:** Hindi
**Tags:** योगिनी एकादशी, एकादशी व्रत कथा, राजा कुबेर, हेममाली की कहानी, मार्कंडेय ऋषि, आषाढ़ माह व्रत

सावन से ठीक पहले आने वाली योगिनी एकादशी हिंदू धर्म में बेहद खास मानी जाती है, क्योंकि यह देवशयनी एकादशी से पहले पड़ने वाली एकादशी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि पूर्वक व्रत रखने से इंसान के जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है। सिर्फ इतना ही नहीं, यह व्रत इतना प्रभावशाली माना गया है कि इसे रखने वाले को 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य फल मिलता है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है। जो लोग लंबे समय से किसी गंभीर बीमारी, आर्थिक तंगी या पारिवारिक कलह से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह व्रत खास तौर पर लाभकारी बताया गया है। साल 2026 में योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को रखा जाएगा।

## व्रत का महत्व और इससे जुड़ी मान्यताएं
शास्त्रों में योगिनी एकादशी को लेकर कहा गया है कि यह साधारण व्रतों की तुलना में कहीं अधिक फलदायी है। जो व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत रखता है, उसके पुराने से पुराने पाप भी नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि आर्थिक संकट, स्वास्थ्य समस्या या घर-परिवार में लगातार आ रही मुश्किलों से परेशान लोग इस दिन विशेष श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं। इस व्रत की पावन कथा भी उतनी ही रोचक है जितना इसका फल बताया गया है।

## अलकापुरी के राजा कुबेर और सेवक हेममाली की कहानी
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में अलकापुरी नाम की एक नगरी हुआ करती थी, जहां धन के स्वामी राजा कुबेर राज करते थे। कुबेर भगवान शिव के अनन्य भक्त थे और रोज़ विधि पूर्वक उनकी पूजा-अर्चना करते थे। उनकी सेवा में हेममाली नाम का एक यक्ष सेवक तैनात था, जिसका काम रोज़ाना पूजा के लिए ताजे फूल लाना था। हेममाली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था, जो अत्यंत सुंदर थी। एक दिन हेममाली फूल लाने के अपने नियमित काम को भूलकर पत्नी विशालाक्षी के साथ रस-रंग में डूब गया। इस वजह से उसे पूजा के लिए फूल पहुंचाने में काफी देर हो गई। जब राजा कुबेर के दरबार में देर होने का कारण पूछा गया, तो सेवकों ने पूरी बात बता दी। यह सुनते ही कुबेर आगबबूला हो गए और उन्होंने हेममाली को कोढ़ी बनकर मृत्युलोक में कष्ट भोगने का श्राप दे दिया।

## श्राप के बाद हेममाली की पीड़ा और मुनि मार्कंडेय से भेंट
राजा कुबेर के इस श्राप का असर तुरंत दिखा और हेममाली स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर आ पहुंचा। यहां उसे कोढ़ जैसी असाध्य बीमारी हो गई। शरीर से पीड़ित हेममाली दर-दर भटकता रहा और इसी हालत में घूमते-घूमते वह हिमालय क्षेत्र की तरफ निकल पड़ा। भटकते हुए एक दिन वह मुनि मार्कंडेय के आश्रम जा पहुंचा। उसकी दयनीय हालत देखकर मार्कंडेय ऋषि ने पूछा कि आखिर उसने ऐसा कौन-सा निकृष्ट कर्म किया है, जिसकी वजह से उसे यह दंड भोगना पड़ रहा है। हेममाली ने अपनी लापरवाही, राजा कुबेर के गुस्से और मिले श्राप की पूरी घटना मुनि को कह सुनाई। उसकी बात सुनकर मार्कंडेय ऋषि को उस पर दया आ गई।

## मार्कंडेय ऋषि ने बताया मुक्ति का उपाय
मुनि मार्कंडेय ने हेममाली से कहा कि उसके इस कष्ट से छुटकारा पाने का एक ही रास्ता है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ माह के कृष्णपक्ष में आने वाली योगिनी एकादशी का व्रत यदि पूरी विधि के साथ रखा जाए, तो इससे न सिर्फ कोढ़ रोग से मुक्ति मिलेगी, बल्कि वह वापस स्वर्गलोक में भी लौट सकेगा। यह सुनकर हेममाली में उम्मीद जगी और उसने ऋषि के बताए अनुसार व्रत करने का संकल्प लिया।

## व्रत के प्रभाव से मिली स्वर्ग की वापसी
हेममाली ने मुनि मार्कंडेय के निर्देशानुसार पूरी श्रद्धा और नियम के साथ योगिनी एकादशी का व्रत रखा। इस व्रत के प्रभाव से उसका शरीर कोढ़ रोग से पूरी तरह मुक्त हो गया और वह अपने पुराने दिव्य रूप में वापस आ गया। इतना ही नहीं, उसे स्वर्ग में उसका खोया हुआ स्थान भी दोबारा मिल गया। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने खुद योगिनी एकादशी का महत्व बताते हुए यह भी कहा है कि जो भी व्यक्ति यह व्रत रखता है और श्रद्धा से इसकी कथा सुनता है, उसे 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही उसके सभी पाप भी सदा के लिए मिट जाते हैं।

## इसका आप पर असर
यह व्रत सीधे तौर पर धार्मिक आस्था से जुड़ा है, फिर भी इसकी तारीख और मान्यताएं जानना श्रद्धालुओं के लिए जरूरी है।

- **व्रत रखने वालों के लिए:** 2026 में योगिनी एकादशी 10 जुलाई को है, इसलिए जो लोग यह व्रत रखना चाहते हैं उन्हें पहले से तैयारी और पूजा विधि की जानकारी रखनी चाहिए।
- **श्रद्धालुओं के लिए:** मान्यता है कि बीमारी, आर्थिक तंगी या पारिवारिक परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए यह व्रत विशेष राहत देने वाला माना गया है, इसलिए ऐसे लोग इस दिन विशेष श्रद्धा से व्रत और कथा श्रवण कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. 2026 में योगिनी एकादशी व्रत कब रखा जाएगा?
2026 में योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को रखा जाएगा।

### 2. योगिनी एकादशी व्रत किस एकादशी से पहले आता है?
योगिनी एकादशी, देवशयनी एकादशी से पहले आने वाली एकादशी है।

### 3. योगिनी एकादशी व्रत रखने से क्या फल मिलता है?
मान्यता है कि इस व्रत से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं, 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य मिलता है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

### 4. योगिनी एकादशी की कथा किस राजा से जुड़ी है?
यह कथा अलकापुरी के राजा कुबेर और उनके यक्ष सेवक हेममाली से जुड़ी है।

### 5. हेममाली को श्राप क्यों मिला था?
हेममाली पूजा के लिए फूल लाने के बजाय अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ मशगूल हो गया और देर होने पर राजा कुबेर ने क्रोधित होकर उसे कोढ़ी बनने का श्राप दे दिया।

### 6. हेममाली को श्राप से मुक्ति कैसे मिली?
मुनि मार्कंडेय के बताए अनुसार हेममाली ने विधि पूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत रखा, जिससे वह कोढ़ रोग से मुक्त होकर स्वर्ग में वापस लौट सका।

### 7. योगिनी एकादशी व्रत का महत्व किसने बताया है?
कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस व्रत का महत्व बताया और इसे 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फलदायी बताया।

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