भगवान विष्णु और बुध देव की कृपा दिलाता है दसमुखी रुद्राक्ष, जानें इसे पहनने के नियम और अद्भुत फायदे दसमुखी रुद्राक्ष को भगवान विष्णु के दस अवतारों और दस दिशाओं का प्रतीक माना गया है। सही विधि से इसे सोमवार को धारण करने पर करियर में पदोन्नति, आर्थिक समृद्धि और कालसर्प दोष से मुक्ति प्राप्त होती है। सनातन परंपरा में रुद्राक्ष को भगवान शिव का साक्षात स्वरूप माना गया है, लेकिन दसमुखी रुद्राक्ष की विशेषता यह है कि इसमें देवों के देव महादेव और सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु दोनों की पावन कृपा निहित है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दसमुखी रुद्राक्ष का सीधा संबंध भगवान विष्णु के दस दिव्य अवतारों और दसों दिशाओं से है। माना जाता है कि इस पवित्र मनके का निर्माण भगवान शिव के दसवें अश्रु बिंदु से हुआ था। ज्योतिष शास्त्र में इस रुद्राक्ष के स्वामी ग्रह बुध देव हैं और इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु स्वयं हैं। बुध ग्रह के बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक होने तथा भगवान विष्णु के आशीर्वाद से इसे धारण करने वाले व्यक्ति को करियर, कारोबार और पारिवारिक जीवन में चमत्कारी एवं शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं। आइए जानते हैं कि इस रुद्राक्ष को सिद्ध करके धारण करने की सही पूजा विधि क्या है और इससे जीवन में कौन-कौन से बड़े लाभ प्राप्त होते हैं। दसमुखी रुद्राक्ष को सिद्ध और धारण करने की संपूर्ण विधि किसी भी रुद्राक्ष का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उसे नियमपूर्वक सिद्ध करना और शुभ मुहूर्त में धारण करना अत्यंत आवश्यक होता है। दसमुखी रुद्राक्ष को धारण करने के लिए सोमवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। सोमवार की प्रातः काल स्नान करके और ध्यान लगाकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर एक स्टील, पीतल या चांदी का बर्तन रखें और उसमें दसमुखी रुद्राक्ष को स्थापित करें। रुद्राक्ष पर चंदन, सुगंधित इत्र, तिल, रोली और अक्षत (बिना टूटे हुए चावल) अर्पित करें। पूजन सामग्री अर्पित करने के पश्चात रुद्राक्ष को जागृत करने के लिए मंत्र जप शुरू करें। सबसे पहले 'ॐ ह्रीं नमः' मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करते हुए 108 बार जप करें। इसके तुरंत बाद 'ॐ नमो विष्णवे वासुदेवाये नमः' मंत्र का कम से कम 11 बार भक्तिभाव से जप करें। मंत्र जप पूरा होने पर रुद्राक्ष को शुद्ध गंगाजल या देसी गाय के कच्चे दूध से स्नान कराकर पूरी तरह पवित्र कर लें। अंत में इसे लाल या पीले रंग के रेशमी धागे में पिरोकर अपने दाहिने हाथ की भुजा में या फिर गले में श्रद्धापूर्वक धारण करें। दसमुखी रुद्राक्ष धारण करने से मिलने वाले अद्भुत लाभ दसमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले साधक को जीवन के विविध क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव का अनुभव होता है। जो लोग कुंडली में कालसर्प दोष से पीड़ित हैं, उनके लिए यह रुद्राक्ष किसी वरदान से कम नहीं है। इसे धारण करने से कालसर्प दोष का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है और जीवन में आ रही मानसिक व व्यावहारिक बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही, यह मनका पारिवारिक जीवन में सुख, शांति और आपसी प्रेम को बढ़ाता है। जो दंपत्ति संतान प्राप्ति या अपनी वंश वृद्धि की कामना रखते हैं, उनके लिए भी दसमुखी रुद्राक्ष को धारण करना बेहद शुभ माना गया है। करियर और व्यापार के दृष्टिकोण से भी यह रुद्राक्ष अत्यंत फलदायी है। यदि आपके नौकरी या करियर में लगातार परेशानियां आ रही हैं, तो दसमुखी रुद्राक्ष के प्रभाव से वे सभी अड़चनें समाप्त हो जाती हैं और कार्यस्थल पर पदोन्नति व उन्नति के नए मार्ग खुलते हैं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को धन लाभ और वित्तीय स्थिरता प्राप्त होती है। व्यापार करने वाले जातकों को इसे पहनने से व्यवसाय में निरंतर वृद्धि और लाभ मिलता है। मान्यताओं के अनुसार, इसे धारण करने वाले व्यक्ति के विरोधी या शत्रु उसका कोई अहित नहीं कर पाते। बुध ग्रह का प्रभाव होने के कारण धारक की वाणी में स्पष्टता और आकर्षण आता है, जिससे वह अपनी बात प्रभावी ढंग से रख पाता है। इसके अलावा, यह पवित्र रुद्राक्ष धारक के चारों ओर सुरक्षा चक्र बनाकर किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को पास नहीं भटकने देता। इसका आप पर असर दसमुखी रुद्राक्ष धारण करने से साधकों और नौकरीपेशा लोगों के जीवन में व्यावहारिक एवं सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। • करियर में प्रगति: कार्यस्थल पर लंबे समय से आ रही रुकावटें दूर होती हैं। इससे पदोन्नति और वेतन वृद्धि के नए अवसर बनने की संभावना बढ़ती है। • व्यापारियों के लिए लाभ: व्यापार में निरंतर लाभ प्राप्त करने में मदद मिलती है। बाजार की प्रतिस्पर्धा और विरोधियों की साजिशों का प्रभाव कम होता है। • पारिवारिक सुख और शांति: गृह क्लेश समाप्त होकर परिवार में तालमेल बेहतर होता है। वंश वृद्धि की कामना करने वाले दंपतियों को शुभ परिणाम मिलते हैं। • मानसिक एवं वाणी सुधार: बुध ग्रह के प्रभाव से सोचने की क्षमता और संवाद शैली में निखार आता है। इससे सार्वजनिक रूप से अपनी बात स्पष्ट रखने में आसानी होती है। • दोषों से सुरक्षा: कालसर्प दोष और आसपास की नकारात्मक ऊर्जा से राहत मिलती है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। ऐसा क्यों हुआ धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार दसमुखी रुद्राक्ष की उत्पत्ति और उसकी शक्तियां विशेष दिव्य कारणों से जुड़ी हुई हैं। • भगवान शिव के अश्रु से उत्पत्ति: पौराणिक कथाओं के अनुसार यह पावन रुद्राक्ष भगवान शिव के दसवें अश्रु बिंदु से प्रकट हुआ था, जिसके कारण इसमें अपार आध्यात्मिक ऊर्जा निहित है। • दस अवतारों और दिशाओं का प्रतीक: यह मनका भगवान विष्णु के सभी दस अवतारों और ब्रह्मांड की दस दिशाओं का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे धारक को हर ओर से सुरक्षा मिलती है। • बुध ग्रह और विष्णु जी का संबंध: ज्योतिष शास्त्र में इस रुद्राक्ष के स्वामी ग्रह बुध और अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु हैं। बुध बुद्धि तथा वाणी के कारक हैं, जिससेइसे धारण करने पर बौद्धिक और व्यावहारिक सफलता प्राप्त होती है। सवाल-जवाब 1. दसमुखी रुद्राक्ष के अधिष्ठाता देवता और स्वामी ग्रह कौन हैं? दसमुखी रुद्राक्ष के अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु हैं और इसके स्वामी ग्रह बुध हैं। 2. दसमुखी रुद्राक्ष को किस दिन धारण करना चाहिए? दसमुखी रुद्राक्ष को सोमवार के दिन प्रातः काल स्नान-ध्यान के पश्चात पूरी पूजा विधि से धारण करना चाहिए। 3. रुद्राक्ष पूजन के समय किन मंत्रों का जप करना आवश्यक है? पूजन के दौरान 'ॐ ह्रीं नमः' मंत्र का 108 बार और 'ॐ नमो विष्णवे वासुदेवाये नमः' का कम से कम 11 बार जप करना चाहिए। 4. दसमुखी रुद्राक्ष की पूजा किस बर्तन में रखकर करनी चाहिए? इसे स्टील, पीतल या चांदी के बर्तन में रखकर चंदन, इत्र, तिल, रोली और अक्षत अर्पित करके पूजा करनी चाहिए। 5. क्या दसमुखी रुद्राक्ष से कालसर्प दोष में राहत मिलती है? हां, दसमुखी रुद्राक्ष धारण करने से कालसर्प दोष से राहत मिलती है और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति आती है। https://trendkia.com/religion/lord-vishnu-aura-mercury-deva-ki-kripa-dilata-hai-dasamukhi-rudraksha-janen-ise-pahanane-ke-niyama-aura-adbhuta-phayade-29731 TrendKia — Har trend, sabse pehle.