# मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शुरू, भक्तिमय भजनों से गूंजेंगे घर और मंदिर

> 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक चलने वाले नवरात्रि उत्सव के दौरान श्रद्धालु शक्ति स्वरूपा देवी के विविध रूपों की उपासना कर रहे हैं, जहां पारंपरिक गीतों और कीर्तनों से वातावरण पावन बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/maa-durga-ki-aaradhna-ka-mahaparva-shuru-bhaktimay-bhajano-se-gunjenge-ghar-aur-mandir-46194 · **Language:** Hindi
**Tags:** नवरात्रि, नवरात्रि भजन, मां दुर्गा, शैलपुत्री, कूष्मांडा, कालरात्रि

अश्विन मास में देवी शक्ति की आराधना का विशेष उत्सव 11 अक्टूबर से आरंभ हो चुका है, जिसका समापन 19 अक्टूबर को होगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालु पूरे नियम और निष्ठा के साथ उपवास रखते हैं तथा देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं। देश भर में पूजा पंडालों, तीर्थ स्थलों और घरों में सुबह से देर रात तक आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है, जहां पारंपरिक भक्ति गीतों के जरिए देवी की महिमा का गुणगान किया जा रहा है।

## पारंपरिक गीतों से भक्तिमय हुआ माहौल
इस पावन अवधि के दौरान घरों और सामूहिक स्थलों पर भजन कीर्तन का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु सुबह की पूजा और संध्या आरती के समय भक्ति रचनाओं को सुनकर अथवा गाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। ऐसे अवसरों पर लखबीर सिंह लक्खा और अन्य प्रसिद्ध गायकों द्वारा गाए गए देवी गीत अत्यंत लोकप्रिय रहते हैं। इन भजनों में मां के अलौकिक दरबार, ऊंचे पर्वतों पर स्थित उनके भवन और भक्तों की अटूट आस्था का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।

इन गीतों में मैया के दरबार की भव्यता, उनके चरणों से बहती पावन धारा और लाल चुनरी व पुष्प मालाओं से सजे दिव्य रूप की स्तुति की जाती है। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन और निष्कपट भाव से शीश नवाने वालों पर देवी की असीम कृपा बरसती है और वे अपने भक्तों की सूनी झोलियां खुशियों से भर देती हैं। इस कारण सामूहिक कीर्तनों में इन पारंपरिक रचनाओं का गायन निरंतर चलता रहता है।

## नवदुर्गा के पावन स्वरूपों का स्मरण
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां भगवती के अलग-अलग रूपों की पूजा का विधान है। उपासना के क्रम में प्रथम दिन नंदी बैल की सवारी करने वाली मां शैलपुत्री का ध्यान किया जाता है, जो दृढ़ता और साधना का प्रतीक मानी जाती हैं। इसके पश्चात सृष्टि की रचना करने वाली मां कूष्मांडा की अद्भुत लीलाओं और उनके तेज का स्मरण किया जाता है, जिन्हें ब्रह्मांड की आदि शक्ति कहा गया है।

साधना के अंतिम चरणों में मां कालरात्रि के रौद्र और विनाशक रूप का स्मरण होता है, जो महाप्रलय लाने वाली शक्ति के रूप में जानी जाती हैं और दुष्टों का संहार कर भक्तों को अभय प्रदान करती हैं। श्रद्धालु पूरे नौ दिन उपवास, मंत्र जप और कन्या पूजन की परंपराओं का निर्वाह करते हुए सुख, समृद्धि और आत्मिक शांति की कामना करते हैं।

## इसका आप पर असर
नवरात्रि का यह पावन पर्व श्रद्धालुओं के दैनिक जीवन, खान-पान और पारिवारिक माहौल में महत्वपूर्ण बदलाव लाता है।

- **दैनिक दिनचर्या:** श्रद्धालु सुबह और शाम के समय नियमित पूजा, आरती और भजन कीर्तन में भाग लेते हैं। इससे घर में सकारात्मक माहौल बनता है और परिवार के सदस्यों के बीच सहभागिता बढ़ती है।
- **आहार और नियम:** नौ दिनों के उपवास के दौरान सात्विक और फलहारी खान-पान का पालन किया जाता है। यह संयमित जीवनशैली और आत्म-नियंत्रण को प्रोत्साहित करता है।
- **सामाजिक सद्भाव:** सामूहिक कीर्तन और पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं का मिलनसार माहौल बनता है। इससे सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत होता है।
- **कन्या पूजन की परंपरा:** पर्व के दौरान बालिकाओं को भोजन कराकर आशीर्वाद लेने की परंपरा निभाई जाती है। यह समाज में बालिकाओं के प्रति सम्मान और संरक्षण के भाव को सुदृढ़ करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
नवरात्रि का आयोजन ऋतु परिवर्तन और आध्यात्मिक ऊर्जा के नवीनीकरण के उपलक्ष्य में देवी शक्ति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए किया जाता है।

- **धार्मिक परंपरा:** हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक शक्ति साधना का विशेष विधान रहा है। यह कालखंड मां भगवती के विविध स्वरूपों के आह्वान और आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
- **सद्गुणों की पुनर्स्थापना:** धार्मिक मान्यताओं में यह अवधि आसुरी प्रवृत्तियों पर दैवीय शक्तियों की विजय का प्रतीक मानी जाती है। इसी कारण भक्तगण मां के शैलपुत्री, कूष्मांडा और कालरात्रि जैसे रूपों का ध्यान करते हैं।
- **भक्ति गीतों की भूमिका:** पारंपरिक भजन और कीर्तन भक्तों के मन को एकाग्र करने और भक्ति रस में लीन करने का माध्यम बनते हैं। संगीत के माध्यम से देवी के गुणों और कथाओं का स्मरण सहज हो जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. नवरात्रि का यह पर्व किस तारीख से किस तारीख तक मनाया जा रहा है?
यह पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक मनाया जा रहा है।

### 2. नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु किस प्रकार की साधना करते हैं?
श्रद्धालु नौ दिनों तक विधि-विधान से देवी की पूजा-अर्चना करते हैं, उपवास रखते हैं और भजन कीर्तन का आयोजन करते हैं।

### 3. प्रथम दिन देवी के किस स्वरूप की आराधना की जाती है?
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिनकी सवारी नंदी बैल है।

### 4. चौथी देवी के रूप में किनकी पूजा होती है?
चौथी देवी के रूप में मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है, जिनकी लीला को अत्यंत निराला और दिव्य माना गया है।

### 5. कालरात्रि देवी की क्या विशेषता बताई गई है?
मां कालरात्रि को महाप्रलय ढाने वाली और प्रचंड शक्ति स्वरूपा देवी के रूप में जाना जाता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._