महाभारत कालीन आस्था का केंद्र बना बरेली का वनखंडी नाथ मंदिर, सावन में जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित प्राचीन श्री बाबा वनखंडी नाथ महादेव मंदिर में सावन मास के अवसर पर श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। महाभारत काल से जुड़े इस सिद्ध पीठ में स्वयंभू शिवलिंग के जलाभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व है। उत्तर प्रदेश के नाथ नगरी नाम से मशहूर बरेली शहर में श्रावण मास की शुरुआत होते ही शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। जोगी नवादा क्षेत्र में स्थित श्री बाबा वनखंडी नाथ महादेव मंदिर में दूर-दूर से कांवड़िए और श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस सिद्ध पीठ की स्थापना महाभारत काल से जुड़ी हुई है, जहां आज भी लाखों लोगों की अटूट आस्था जुड़ी है। महाभारत काल से जुड़ी मान्यता और इतिहास इतिहास के जानकार डॉक्टर राजेश कुमार शर्मा के अनुसार लगभग एक हजार साल पहले बाबा अलखनाथ के यहां आगमन से बरेली को नाथ नगरी के रूप में ख्याति मिली थी। हालांकि जोगी नवादा के वनखंडी नाथ महादेव मंदिर की पौराणिकता इससे भी कहीं अधिक पुरानी है। माना जाता है कि मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है और इसकी स्थापना महाभारत काल में हुई थी। पौराणिक गाथाओं के अनुसार पांचाल देश के राजा द्रुपद की पुत्री माता द्रौपदी स्वयं यहां आकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और जल अर्पण करती थीं। इसके अतिरिक्त पांडवों ने अपने अज्ञातवास की अवधि के दौरान भी इस पवित्र स्थान पर भगवान शिव की आराधना की थी। सावन में उमड़ती है कांवड़ियों की भारी भीड़ श्रावण मास के दौरान इस ऐतिहासिक मंदिर परिसर की शोभा और धार्मिक महत्व काफी बढ़ जाता है। गंगाधामों से पवित्र गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़िए तथा आम श्रद्धालु भोलेनाथ को जल अर्पित करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे दिल से यहां आकर भगवान शिव के दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। मंदिर के आचार्य श्याम मोहन शास्त्री बताते हैं कि अनादि काल से चली आ रही महाअभिषेक की परंपरा इस धाम की विशिष्ट पहचान है। उनके अनुसार सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव पर जल और दूध चढ़ाने से विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होता है। दिन में स्वरूप बदलता है स्वयंभू शिवलिंग इस मंदिर से जुड़ी एक चमत्कारिक मान्यता यह भी है कि यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग का रंग और आकार दिन के अलग-अलग प्रहर में परिवर्तित होता हुआ दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव का अलौकिक प्रभाव मानते हैं। पिछले लगभग पांच दशकों यानी पचास वर्षों से मंदिर में दर्शन के लिए आ रहे श्रद्धालु राजेश पांडे का कहना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में अनगिनत लोगों की मन्नतें यहां पूरी होते देखी हैं। वहीं चंदपुर से आए एक अन्य भक्त ने बताया कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से इस दरबार में हाजिरी लगाता आ रहा है और यहां आने पर अद्भुत आत्मिक व आध्यात्मिक शांति महसूस होती है। इसका आप पर असर • भारत भर के श्रद्धालुओं के लिए: सावन के पवित्र महीने में पौराणिक महत्व वाले शिव धामों के दर्शन और जलाभिषेक की धार्मिक परंपरा का महत्व बढ़ जाता है। • बरेली और आसपास के निवासियों के लिए: जोगी नवादा स्थित मंदिर परिसर में सावन के दौरान जलाभिषेक और सुलभ दर्शन के विशेष प्रबंध किए गए हैं। सवाल-जवाब 1. श्री बाबा वनखंडी नाथ महादेव मंदिर कहां स्थित है? यह प्राचीन शिव मंदिर उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में जोगी नवादा क्षेत्र में स्थित है। 2. वनखंडी नाथ मंदिर का इतिहास कितना पुराना माना जाता है? इस मंदिर के स्वयंभू शिवलिंग की स्थापना महाभारत काल से जुड़ी मानी जाती है, जो लगभग 1,000 वर्ष पूर्व बाबा अलखनाथ के आगमन से भी प्राचीन है। 3. इस मंदिर में किन पौराणिक पात्रों द्वारा पूजा करने की मान्यता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री माता द्रौपदी और अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी। 4. वनखंडी नाथ मंदिर के शिवलिंग के बारे में क्या खास मान्यता प्रचलित है? स्थानीय श्रद्धालुओं का दावा है कि यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग का स्वरूप दिन में अलग-अलग समय पर बदलता हुआ प्रतीत होता है। 5. सावन के महीने में इस मंदिर में क्या धार्मिक अनुष्ठान होते हैं? सावन मास में दूर-दूर से आए कांवड़िए और श्रद्धालु गंगाजल एवं दूध से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। https://trendkia.com/religion/mahabharata-kalina-astha-ka-kendra-bana-bareilly-ka-vankhandi-nath-mndira-savana-men-jalabhisheka-ke-lie-pahuncha-rahe-shraddhalu-12537 TrendKia — Har trend, sabse pehle.