# मकर संक्रांति पर 23 साल बाद अद्भुत संयोग, एकादशी के साथ इन योगों में दान से पूरी होंगी मनोकामनाएं

> इस बार मकर संक्रांति पर 23 साल बाद एकादशी के साथ सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर स्नान और दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/makar-sankranti-para-23-sala-bada-adbhuta-snyoga-ekadashi-ke-satha-ina-yogon-men-dana-se-puri-hongi-manokamanaen-38767 · **Language:** Hindi
**Tags:** मकर संक्रांति, एकादशी, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, सूर्य गोचर, धर्म अध्यात्म, पंडित शंभू नाथ झा, दरभंगा

दरभंगा में इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व बेहद खास रहने वाला है क्योंकि 14 जनवरी को सूर्य देव उत्तरायण में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ मकर राशि में उनका गोचर होगा। इस पावन अवसर पर 23 साल बाद मकर संक्रांति के दिन एकादशी तिथि का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस पर्व का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। पंडित शंभू नाथ झा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सूर्य देव 14 जनवरी के दिन ही मकर राशि में अपनी यात्रा शुरू करेंगे, जिसके कारण इसी तारीख को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर सूर्य देव भृगु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

## दुर्लभ योग और दान का महत्व
मकर संक्रांति के इस खास दिन पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जो पूजा-पाठ और दान-पुण्य के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं। पंडित शंभू नाथ झा के अनुसार इस शुभ मुहूर्त में साधुओं, दीन-दुखियों, निर्धनों और जरूरतमंदों को दान देने से सूर्य भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सूर्य के मकर राशि में गोचर करने के साथ ही उत्तरायण की शुरुआत हो जाती है, जिसे आध्यात्मिक उन्नति का काल माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल बहुत जल्दी प्राप्त होता है। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन किसी भी पवित्र जल स्रोत में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

## पिता-पुत्र के संबंध और खरमास की समाप्ति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करते ही पिता और पुत्र के संबंधों में सुधार की प्रक्रिया शुरू होती है। इस समय खरमास की समाप्ति हो जाती है और मौसम में बदलाव के साथ ठंड का दौर और आगे बढ़ता है। मकर संक्रांति के दिन लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भी दान-पुण्य करते हैं और उनकी तृप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन भगवान सूर्य की नियमित पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। स्नान, दान और अनुष्ठान का यह पर्व हर व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह लेकर आता है, जिससे लोग अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रेरित होते हैं।

## त्योहार का उल्लास और सामाजिकता
पूरे भारतवर्ष में मकर संक्रांति का त्योहार बेहद हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर लोग नए वस्त्र धारण करते हैं, अपने परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ मिलकर दान-पुण्य के कार्यों में हिस्सा लेते हैं और आपस में खुशियों का आदान-प्रदान करते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को भी मजबूत करने का काम करता है। इस दिन किए जाने वाले सत्कर्म और दान इंसान के जीवन से नकारात्मकता को दूर करके उसे एक नई दिशा प्रदान करते हैं।

## इसका आप पर असर
मकर संक्रांति पर बनने वाले इस दुर्लभ संयोग का सीधा असर देश भर के श्रद्धालुओं के धार्मिक अनुष्ठानों और दान-पुण्य के कार्यक्रमों पर पड़ेगा।

- **भारत में:** देश भर में लोग 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करेंगे और जरूरतमंदों को दान देंगे। इस विशेष संयोग से लोगों को पूजा और अनुष्ठान का कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होगा।
- **दरभंगा में:** स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के लिए इस दिन स्थानीय जल स्रोतों और मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजनों तथा अनुष्ठानों का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा। इस दौरान बाजारों में त्योहारी रौनक और दान सामग्री की खरीददारी में तेजी देखने को मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह दुर्लभ संयोग ग्रहों की गति और पंचांग की गणनाओं के आधार पर कई दशकों के अंतराल के बाद बनता है।

- **ग्रहों की चाल:** सूर्य का हर साल जनवरी के मध्य में मकर राशि में प्रवेश करना उत्तरायण की शुरुआत का कारण बनता है, जिसे ज्योतिषीय गणनाओं में विशेष स्थान प्राप्त है।
- **तिथि का संयोग:** इस वर्ष सौर मास और चंद्र मास की गणनाओं के मेल से 23 वर्षों के बाद मकर संक्रांति के दिन एकादशी तिथि और विशेष नक्षत्र योगों का एक साथ मिलन हुआ है।
- **धार्मिक मान्यता:** प्राचीन पंचांग पद्धतियों और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार ऐसे योगों में किए जाने वाले धार्मिक कार्यों और दान का प्रभाव कई गुना बढ़कर फल देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. मकर संक्रांति कब मनाई जाएगी?
मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

### 2. इस वर्ष मकर संक्रांति पर कौन सा दुर्लभ संयोग बन रहा है?
इस वर्ष 23 साल बाद मकर संक्रांति के दिन एकादशी तिथि के साथ सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है।

### 3. सूर्य देव मकर राशि में कब गोचर करेंगे?
सूर्य देव सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर भृगु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर करेंगे।

### 4. मकर संक्रांति पर दान का क्या महत्व है?
इस दिन साधुओं, दीन-दुखियों और जरूरतमंदों को दान देने से भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

### 5. पंडित शंभू नाथ झा के अनुसार इस दिन का क्या प्रभाव है?
उनके अनुसार इस समय जप, दान और पूजा का फल शीघ्र प्राप्त होता है और मकर संक्रांति के दिन स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है।

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