मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में सावन की धूम, हरे मखमल के हिंडोले में विराजे भगवान श्रावण मास के पावन अवसर पर मथुरा के प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को विशेष हिंडोले में विराजमान किया गया। इस दौरान देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अलौकिक दर्शन का लाभ उठाया। मथुरा का ऐतिहासिक द्वारकाधीश मंदिर सावन के महीने में पूरी तरह भक्ति और आध्यात्मिक रंगों में रंग जाता है। पुष्टिमार्गीय संप्रदाय की अनूठी परंपराओं का पालन करते हुए इस पावन काल में आराध्य के बाल स्वरूप को प्रतिदिन अलग-अलग और भव्य हिंडोलों में झुलाया जाता है। सावन के विशेष आयोजन श्रावण मास के दौरान मंदिर परिसर में घटाओं और हिंडोले से जुड़े तमाम अनुष्ठान होते हैं। मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट के अनुसार, इन सभी धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा कांकरोली नरेश और तृतीय पीठाधीश्वर गोस्वामी श्री श्री 108 डॉक्टर वागीश कुमार जी महाराज के मार्गदर्शन में तैयार की जाती है। उनके अलावा युवराज वेदांत कुमार जी महाराज तथा सिद्धांत कुमार जी महाराज की देखरेख में इन उत्सवों को बेहद सुचारू रूप से पूरा कराया जाता है। हरे मखमल के हिंडोले में दर्शन इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सावन शुक्ल षष्ठी के दिन ठाकुर द्वारकाधीश को हरे मखमल से सजे अत्यंत सुंदर और भव्य हिंडोले में बैठाया गया। इस मनोहारी दर्शन का समय सुबह 5:10 बजे से 5:40 बजे तक निर्धारित किया गया था। इस खास झलक को पाने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मथुरा पहुंचे और पूरा मंदिर परिसर उनके जयकारों से गूंज उठा। भक्ति और आस्था का संगम सावन के दिनों में मंदिर की सजावट देखने लायक होती है, जिससे यहां आने वाले हर भक्त को एक बेहद अलौकिक अहसास होता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की गहरी मान्यता है कि वे अपनी जो भी मनोकामनाएं लेकर आते हैं, भगवान उन्हें अवश्य पूरा करते हैं। यह पूरा महीना संस्कृति, परंपरा और अटूट आस्था का एक अनूठा उदाहरण पेश करता है। इसका आप पर असर सावन के इस पावन महीने में मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था और समय तय किए गए हैं। • उत्तर प्रदेश में: स्थानीय और बाहर से आने वाले पर्यटकों को सुबह के समय होने वाले विशेष हिंडोला दर्शन के तय समय यानी 5:10 बजे से 5:40 बजे तक का ध्यान रखना होगा। भारी भीड़ के चलते मंदिर परिसर में दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। • भारतभर में: देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा और ठहरने की योजना पहले से बना लेनी चाहिए क्योंकि सावन मास के दौरान शहर में भारी भीड़ उमड़ती है। धार्मिक आयोजनों के कारण स्थानीय यातायात व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ द्वारकाधीश मंदिर में सावन मास के दौरान होने वाले ये विशेष आयोजन पुष्टिमार्गीय संप्रदाय की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं। • धार्मिक परंपरा: सावन के महीने में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को प्रकृति के बीच हिंडोले में झुलाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। • आचार्य मार्गदर्शन: मंदिर के पीठाधीश्वर और आचार्यों के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में सभी अनुष्ठानों का समय और स्वरूप तय किया जाता है। • विशेष तिथियां: सावन शुक्ल पक्ष की षष्ठी जैसी महत्वपूर्ण तिथियों पर भगवान का विशेष शृंगार और भव्य हिंडोला सजाने का विधान है। सवाल-जवाब 1. द्वारकाधीश मंदिर कहां स्थित है? द्वारकाधीश मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित है। 2. सावन शुक्ल षष्ठी के दर्शन का समय क्या था? हरे मखमल के हिंडोले के दर्शन प्रातः 5:10 बजे से 5:40 बजे तक खुले रहे। 3. इन धार्मिक कार्यक्रमों का मार्गदर्शन कौन करते हैं? सभी कार्यक्रमों का निर्धारण कांकरोली नरेश डॉक्टर वागीश कुमार जी महाराज के निर्देशन में होता है। 4. सावन में भगवान को किस प्रकार के हिंडोले में विराजमान किया गया? सावन शुक्ल षष्ठी को भगवान द्वारकाधीश को हरे मखमल के भव्य हिंडोले में विराजमान किया गया। https://trendkia.com/religion/mathura-dwarkadhish-temple-celebrates-sawan-as-lord-saptarangi-enjoys-green-velvet-swing-51466 TrendKia — Har trend, sabse pehle.