# मथुरा के नंद भवन का जादुई पारस वृक्ष, जहां मन्नत मांगते ही पूरी होती हैं मुरादें

> मथुरा के गोकुल में स्थित नंद भवन में द्वापर युग का एक प्राचीन पारस वृक्ष मौजूद है, जिसके नीचे बाल कृष्ण विश्राम किया करते थे। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पवित्र पेड़ पर धागा बांधने से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-07-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/mathura-ke-nand-bhavan-ka-jadui-paras-vriksha-jahan-mannata-mangate-hi-puri-hoti-hain-muraden-6189 · **Language:** Hindi
**Tags:** मथुरा, गोकुल, नंद भवन, श्री कृष्ण, पारस वृक्ष, धार्मिक आस्था

मथुरा और समूचे ब्रज क्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का विशेष महत्व है। गोकुल की पावन धरती पर कदम रखने के बाद से ही बाल कृष्ण ने अपनी अद्भुत लीलाएं दिखानी शुरू कर दी थीं। इसी गोकुल नगरी में नंद भवन के परिसर में एक ऐसा प्राचीन वृक्ष स्थित है, जो भगवान कृष्ण के बालपन की स्मृतियों को संजोए हुए है और जिसके नीचे स्वयं कन्हैया विश्राम किया करते थे।

## यमुना के उफान और श्री कृष्ण का गोकुल आगमन
भाद्रपद मास की सप्तमी तिथि की वह भयावह रात आज भी जनमानस के मन में बसी है, जब घनघोर वर्षा, कड़कड़ाती बिजली और उफनती यमुना के बीच वासुदेव जी नन्हे कृष्ण को मथुरा के कारागार से सुरक्षित गोकुल लेकर पहुंचे थे। मान्यताओं के अनुसार, उस रात यमुना नदी श्री कृष्ण के चरण कमलों को स्पर्श करने के लिए आतुर थी। जैसे ही वासुदेव ने यमुना के जल में प्रवेश किया, यमुना का जल स्तर तेजी से बढ़ने लगा और तब तक शांत नहीं हुआ जब तक उसने कृष्ण के चरणों को स्पर्श नहीं कर लिया। बाल कृष्ण को बाबा नंद के सुरक्षित हाथों में सौंपकर वासुदेव योगमाया को लेकर पुनः मथुरा के कारागार लौट आए थे।

## द्वापर युग का साक्षी 'पारस' वृक्ष
नंद भवन के आंगन में आज भी द्वापर काल का वह रहस्यमयी और दुर्लभ पेड़ खड़ा है, जिसे 'पारस' वृक्ष के नाम से जाना जाता है। इस पेड़ की दिव्यता के बारे में मंदिर के सेवायत पुजारी मोर मुकुट पाराशर विस्तार से बताते हैं। उनके अनुसार, यह वृक्ष अत्यंत प्राचीन है और द्वापर युग से ही नंद भवन की शोभा बढ़ा रहा है। यह पारस पेड़ देखने में साधारण पीपल के वृक्ष से भिन्न प्रतीत होता है, जो इसकी विशिष्टता को और अधिक बढ़ाता है।

## मनोकामना पूरी करने वाला आस्था का केंद्र
पुजारी मोर मुकुट पाराशर के मुताबिक, यह पारस वृक्ष एक अद्भुत आस्था का केंद्र है। गोकुल के नंद भवन के अतिरिक्त यह वृक्ष कहीं और नहीं पाया जाता। भक्तगण अपनी गहरी आस्था के साथ इस पेड़ पर धागा या मन्नत की डोर बांधते हैं, और यह मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। जो श्रद्धालु यहां आते हैं और जिनकी मन्नतें पूरी हो जाती हैं, वे अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार भगवान को भोग अर्पित करके अपना कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह स्थान आज भी भक्तों के लिए चमत्कार और भक्ति का एक जीवंत केंद्र बना हुआ है, जहां बाल गोपाल की उपस्थिति का अहसास आज भी श्रद्धालुओं को होता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** मथुरा और गोकुल जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को स्थानीय मान्यताओं और सांस्कृतिक धरोहरों के बारे में गहरी जानकारी मिलती है।

**मथुरा में:** गोकुल आने वाले भक्त नंद भवन में स्थित इस प्राचीन पारस वृक्ष के दर्शन कर सकते हैं, जो उनकी धार्मिक मान्यताओं और आस्था को बल प्रदान करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. नंद भवन में स्थित पारस वृक्ष कितना पुराना है?
मान्यताओं के अनुसार, यह वृक्ष द्वापर युग से ही यहां स्थित है और भगवान श्री कृष्ण के समय का साक्षी है।

### 2. पारस वृक्ष की क्या विशेषता है?
यह पेड़ साधारण पीपल से बिल्कुल अलग दिखता है और इसे चमत्कारी माना जाता है, जहां मन्नत पूरी होने की मान्यता है।

### 3. लोग इस पेड़ के पास क्यों आते हैं?
श्रद्धालु इस पेड़ पर अपनी मनोकामनाओं के लिए धागा बांधने आते हैं और मन्नत पूरी होने पर भगवान को भोग अर्पित करते हैं।

### 4. क्या यह पेड़ कहीं और भी पाया जाता है?
नहीं, गोकुल के नंद भवन के अतिरिक्त यह अद्भुत पारस वृक्ष अन्य किसी स्थान पर देखने को नहीं मिलता है।

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