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  "title": "मेवाड़ के जोगणिया माता शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्र मेले का आगाज, उमड़े भक्त",
  "summary": "भीलवाड़ा के निकट स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ जोगणिया माता धाम में घटस्थापना और ध्वजारोहण के साथ नौ दिवसीय नवरात्र उत्सव आरंभ हो गया है, जहां 20 अक्टूबर तक विविध धार्मिक अनुष्ठान चलेंगे।",
  "content": "मेवाड़ अंचल के प्रमुख आस्था केंद्र श्री जोगणिया माता धाम में शारदीय नवरात्र पर्व का शुभारंभ अत्यंत उल्लासपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पवित्र ध्वजारोहण और शुभ घटस्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाले इस पारंपरिक उत्सव का विधिवत आरंभ कर दिया गया है। इसके साथ ही परिसर में लगने वाले वार्षिक मेले की गतिविधियां भी शुरू हो चुकी हैं। उद्घाटन के अवसर पर पास के पवित्र सरोवर से मंदिर तक एक भव्य और विशाल कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें पारंपरिक ढोल और बैंड बाजों की थाप पर जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु शामिल हुए। मुख्य गर्भगृह के साथ-साथ परिसर में स्थित चौंसठ योगिनी और भगवान शिव के देवालयों में विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष महाआरती एवं पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई।\n\nदूर-दराज के राज्यों से जुटती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़\nजोगणिया माता धाम की महत्ता केवल भीलवाड़ा अथवा चित्तौड़गढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण राजस्थान और पड़ोसी मध्य प्रदेश से भी लाखों भक्तजन यहां मनोकामनाएं लेकर शीश नवाने पहुंचते हैं। समूचे मेवाड़ क्षेत्र में यह पीठ अपनी अलौकिक मान्यताओं और चमत्कारों के लिए विख्यात है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले आगंतुकों के विश्वास के कारण नवरात्र के पावन दिनों में यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है। पूरे मंदिर क्षेत्र को मनमोहक रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक बिजली की लड़ियों से सुसज्जित किया गया है, जिससे शाम होते ही पूरा परिसर प्रकाशमान नजर आता है।\n\nधार्मिक अनुष्ठानों की लंबी श्रृंखला और 20 अक्टूबर तक आयोजन\nआगामी दिनों में आयोजित होने वाले विविध कार्यक्रमों का ब्योरा साझा करते हुए श्री जोगणिया माता शक्ति पीठ प्रबंध एवं विकास संस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने व्यवस्थाओं की जानकारी दी।\n\n ## \"नवरात्रि महोत्सव के साथ मेले का भी शुभारंभ हो गया है।\"\nअध्यक्ष सत्यनारायण जोशी के अनुसार, उत्सव के दौरान माता का नित्य नूतन भव्य श्रृंगार किया जाएगा और प्रतिदिन दोनों पहर विधिपूर्वक महाआरती की जाएगी। नौ दिवसीय अवधि में विभिन्न आध्यात्मिक आयोजनों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिनमें श्रीमद् देवी भागवत कथा का वाचन, अखंड रामायण का पाठ, पंच कुंडीय महायज्ञ, दुर्गा सप्तशती पाठ तथा गायत्री यज्ञ प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त संध्याकालीन बेला में प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भजन संध्या, धर्मोपदेश और मर्यादा पुरुषोत्तम की जीवन लीला पर आधारित रामलीला का मंचन किया जाएगा। यह समूचा आध्यात्मिक उत्सव 20 अक्टूबर को औपचारिक रूप से संपन्न होगा।\n\nभक्तों की सुविधा के पुख्ता इंतजाम और दुर्गाष्टमी पर रात्रि दर्शन\nविशाल संख्या में एकत्र होने वाले जनसमूह को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन समिति ने व्यापक प्रबंध किए हैं। परिसर में सुचारु दर्शन व्यवस्था के साथ-साथ वाहनों की सुरक्षित पार्किंग, यात्रियों के ठहरने के लिए विश्राम स्थल, स्वच्छ पेयजल, सुलभ भोजन व्यवस्था तथा निरंतर विद्युत आपूर्ति के ठोस बंदोबस्त किए गए हैं, जिससे किसी भी दर्शनार्थी को असुविधा का सामना न करना पड़े। पर्व के अत्यंत विशिष्ट अवसर यानी दुर्गा अष्टमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट रातभर खुले रहेंगे, ताकि हर कोई सुगमता से माता के दर्शन कर सके। वहीं आगामी विजयादशमी के पावन पर्व पर दशहरा उत्सव धूमधाम से आयोजित किया जाएगा।\n\nएक ही प्रांगण में चौंसठ देवियों की अनुपम मूर्तियां\nइस प्राचीन शक्तिपीठ की सबसे अनूठी विशेषता यहां स्थापित असंख्य देवियों के विग्रह हैं, जहां चौंसठ जोगणिया स्वरूपों के दर्शन एक ही स्थान पर सुलभ होते हैं। इनमें राष्ट्र की अधिष्ठात्री भारत माता, मां शैलपुत्री, मां महागौरी और माता कालरात्रि के स्वरूप विराजमान हैं। इसके अलावा संगीतमय स्वरूपों में वीणा वादिनी, मृदंग वादिनी तथा शहनाई वादिनी के विग्रह स्थापित हैं। मंदिर में मां चामुंडा, माता भद्रकाली, माता धूमावती, माता ब्राह्मी, माता ज्वालामुखी, मां गंधारी, मां अघोर, माता सूर्यपुत्री, माता वायु वीणा, माता वायु वेगा, माता सर्वमंगला, माता अजीता, मां गंगा, यमुना, माता उमा, माता काली, माता नारायणी, मां चंद्र कांति, माता समुद्र, मां मूर्ति, आयोगनी मां, माता स्तुति, गटाबरी माता, कामायनी माता, अंबिका मां, महेश्वरी माता, कावेरी माता, रात्रि माता और मां कंकाड़ी सहित कई दिव्य स्वरूपों की मूर्तियां स्थापित हैं, जिनके दर्शन कर श्रद्धालु पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nजोगणिया माता मंदिर में नवरात्र मेले के आयोजन से श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं प्रभावी हुई हैं।\n\n• राजस्थान और मध्य प्रदेश में: इस धार्मिक मेले के दौरान सीमावर्ती जिलों से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए चौबीसों घंटे दर्शन, खान-पान और ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। इसके चलते दर्शनार्थियों को किसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे सुगमता से यात्रा पूरी कर सकेंगे।\n• मेवाड़ और भीलवाड़ा में: स्थानीय स्तर पर पार्किंग, जल आपूर्ति और विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है ताकि भारी भीड़ का प्रबंधन आसानी से हो सके। स्थानीय दुकानदारों और मेला व्यापारियों को 20 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन से व्यवसाय का बेहतर अवसर मिलेगा।\n• दुर्गा अष्टमी के दिन: दुर्गा अष्टमी पर मंदिर के कपाट पूरी रात खुले रखे जाएंगे। इससे देर रात पहुंचने वाले भक्त भी बिना किसी बाधा के सुलभ दर्शन का लाभ ले सकेंगे।\n• यात्रियों के लिए सुविधाएं: मंदिर परिसर में वाहन पार्किंग, ठहरने के स्थान और पेयजल के विशेष इंतजाम किए गए हैं। दूर-दराज से आने वाले परिवारों को अपनी यात्रा की योजना बनाने में इससे अत्यधिक सुविधा मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह उत्सव प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में हिंदू परंपराओं और शक्ति उपासना की सदियों पुरानी मान्यताओं के तहत आयोजित किया जाता है।\n\n• धार्मिक परंपरा: आश्विन मास के शारदीय नवरात्र पर शक्तिपीठों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष आराधना और घटस्थापना की परंपरा रही है। इसी प्राचीन रीति का पालन करते हुए जोगणिया धाम में ध्वजारोहण कर इस नौ दिवसीय महोत्सव की शुरुआत की गई है।\n• मान्यताओं की प्रधानता: मेवाड़ और आसपास के अंचल में जोगणिया माता को अत्यंत सिद्ध और मनोकामना पूर्ण करने वाली कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। इस गहरी लोक आस्था के कारण प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु शारदीय नवरात्र में यहां शीश नवाने एकत्र होते हैं।\n• 64 योगिनियों का सानिध्य: मंदिर प्रांगण में 64 योगिनी स्वरूपों की दुर्लभ प्रतिमाएं स्थापित हैं। साधक और सामान्य श्रद्धालु नवरात्र के दौरान एक ही स्थान पर इन समस्त शक्तियों की आराधना को अत्यंत फलदायी मानते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जोगणिया माता मंदिर में नवरात्र महोत्सव का शुभारंभ किन अनुष्ठानों से हुआ?\nमहोत्सव का शुभारंभ पवित्र ध्वजारोहण, घटस्थापना और सरोवर से मंदिर तक भव्य कलश यात्रा निकालकर किया गया।\n\n2. नवरात्र के दौरान मंदिर में कौन-कौन से मुख्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे?\nमंदिर में देवी भागवत कथा, पंच कुंडीय महायज्ञ, अखंड रामायण पाठ, दुर्गा पाठ, गायत्री यज्ञ, रामलीला और भजन संध्या के आयोजन होंगे।\n\n3. यह धार्मिक महोत्सव किस तारीख को संपन्न होगा?\nयह नौ दिवसीय धार्मिक महोत्सव 20 अक्टूबर को संपन्न होगा।\n\n4. दुर्गा अष्टमी के दिन दर्शन के लिए क्या विशेष व्यवस्था की गई है?\nदुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर के पट रातभर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुले रहेंगे।\n\n5. जोगणिया माता मंदिर परिसर की प्रमुख विशेषता क्या है?\nइस मंदिर परिसर में भारत माता, शैलपुत्री और वीणा वादिनी सहित चौंसठ देवियों की प्रतिमाओं के दर्शन एक ही जगह होते हैं।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-10-11",
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