मिथिलांचल में कुशोत्पाटन अमावस्या का पर्व, जानिए कुश उखाड़ने का शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र भाद्रपद अमावस्या पर वर्ष भर के धार्मिक कार्यों के लिए पवित्र कुश एकत्र करने की परंपरा है। 11 सितंबर 2026 को सुबह 8:45 बजे तक कुश उखाड़ने का श्रेष्ठ मुहूर्त है। भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखती है, जिसे मिथिलांचल सहित देश भर में कुशोत्पाटन या कुशी अमावस्या के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। पितृ पक्ष के आगमन से ठीक पहले आने वाला यह पर्व पवित्र वनस्पति 'कुश' के संचय का मुख्य दिन होता है। इस अवसर पर पुरोहितों से लेकर आम श्रद्धालु तक पूरे वर्ष के धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कुश एकत्र करते हैं। वर्ष भर के धार्मिक कार्यों में कुश की अनिवार्यता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिना कुश के किया गया कोई भी देव पूजन, पितृ तर्पण, यज्ञ अथवा धार्मिक अनुष्ठान अधूरा माना जाता है। इसी कारण भाद्रपद अमावस्या पर विधि-विधान से उखाड़ा गया कुश पूरे साल पवित्र बना रहता है। श्राद्ध कर्म और नियमित पूजा-पाठ के दौरान इसी कुश से बनी पवित्री धारण की जाती है। दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. कुणाल कुमार झा के अनुसार, इस दिन एकत्रित किया गया कुश कभी भी अशुद्ध नहीं होता, बशर्ते इसे शास्त्रोक्त नियमों का पालन करते हुए ही उखाड़ा जाए। कुश उखाड़ने का शुभ मुहूर्त और दिशा संबंधी नियम कुश का संचय करने के लिए प्रातःकाल सूर्योदय की समयावधि को सबसे फलदायी माना गया है। इस वर्ष कुशी अमावस्या 11 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय से लेकर सुबह 8:45 बजे तक कुश उखाड़ने का सबसे उत्तम मुहूर्त निर्धारित है। कुश उखाड़ने से पूर्व व्यक्ति को स्नान करके पूरी तरह पवित्र हो जाना चाहिए। इसके उपरांत पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुंह करके कुश लगे स्थान पर बैठना चाहिए। नियम यह है कि कुश को कभी भी नाखूनों से नहीं तोड़ना चाहिए, बल्कि हमेशा दाहिने हाथ से जड़ सहित उखाड़ना ही विधि सम्मत है। कुश संचय का विशेष मंत्र और उसका अर्थ कुश को जड़ से उखाड़ते समय धरती माता की अनुमति और देवताओं का आह्वान करने के लिए मंत्रोच्चार करना अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों में उल्लेखित मंत्र "कुशाग्रे वसते रुद्रः कुशमध्ये तु केशवः। कुशमूले वसते ब्रह्मा कुशमे देहि मेदिनि॥" का पाठ करते हुए ही कुश उखाड़ना चाहिए। इस मंत्र का भावार्थ है कि पवित्र कुश के अग्र भाग में भगवान शिव (रुद्र), मध्य भाग में भगवान विष्णु (केशव) और मूल भाग में सृष्टि रचयिता ब्रह्मा जी निवास करते हैं। अतः साधक पृथ्वी देवी से प्रार्थना करता है कि वे उसे इस पवित्र वनस्पति को प्रदान करें। इसका आप पर असर कुशोत्पाटन अमावस्या पर धार्मिक अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं और पुरोहितों के लिए यह पर्व बहुत व्यावहारिक महत्व रखता है। • भारत में: पितृ पक्ष और वर्ष भर के धार्मिक कार्यों के लिए पवित्र कुश का संचय केवल इसी तिथि को किया जाता है। नियमपूर्वक उखाड़ा गया यह कुश पूरे 1 साल तक पूजा-पावन कार्यों के लिए शुद्ध बना रहता है। • मिथिलांचल में: दरभंगा सहित मिथिलांचल क्षेत्र के गृहस्थों और पुरोहितों के लिए प्रातःकाल 8:45 बजे तक कुश संचय का विशेष मुहूर्त है। समय सीमा के भीतर सही मंत्रोच्चार के साथ कुश संग्रहित करने से अनुष्ठान सफल माने जाते हैं। ऐसा क्यों हुआ भाद्रपद अमावस्या को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कुश संचय के सबसे उपयुक्त अवसर के रूप में स्थापित किया गया है। • पितृ पक्ष का आगमन: भाद्रपद अमावस्या के तुरंत बाद श्राद्ध पक्ष प्रारंभ होता है, जिसमें तर्पण और पिंडदान के लिए कुश की अनिवार्यता होती है। इसी आवश्यकता को देखते हुए इस तिथि पर कुश संचय की परंपरा बनी। • शास्त्रोक्त मान्यता और पवित्रता: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन सूर्योदय के समय मंत्रोच्चार के साथ उखाड़ा गया कुश कभी बासी या अशुद्ध नहीं होता। इसलिए वर्ष भर की धार्मिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए इसी एक दिन कुश एकत्रित किया जाता है। सवाल-जवाब 1. कुशोत्पाटन अमावस्या 2026 में किस तारीख को है? कुशोत्पाटन अमावस्या 11 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। 2. कुश उखाड़ने का शुभ मुहूर्त क्या है? कुश उखाड़ने का सबसे शुभ मुहूर्त सूर्योदय से लेकर सुबह 8:45 बजे तक है। 3. कुश उखाड़ते समय किस दिशा में मुख करना चाहिए? कुश उखाड़ते समय स्नान कर पवित्र होकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। 4. कुश उखाड़ते समय किस मंत्र का जप करना चाहिए? कुश उखाड़ते समय 'कुशाग्रे वसते रुद्रः कुशमध्ये तु केशवः। कुशमूले वसते ब्रह्मा कुशमे देहि मेदिनि॥' मंत्र का पाठ करना चाहिए। https://trendkia.com/religion/mithilanchal-men-kushotpatana-amavasya-ka-parva-janie-kusha-ukharane-ka-shubha-muhurta-vidhi-aura-mntra-30249 TrendKia — Har trend, sabse pehle.