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  "title": "मुजफ्फरपुर के पताही गांव में किसान राजीव कुमार ने स्थापित की 51 फीट ऊंची शिव प्रतिमा, वाराणसी और रामेश्वरम से मिली थी प्रेरणा",
  "summary": "बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर परिसर में निर्मित 51 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन चुकी है।",
  "content": "बिहार के मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत पताही इलाके में आस्था का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है, जहां एक स्थानीय किसान के प्रयास से गांव का मंदिर पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बन गया है। पताही निवासी राजीव कुमार ने अपने गांव के बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ की 51 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित कराई है। एनएच-122 रेवा रोड के किनारे स्थित इस भव्य प्रतिमा का निर्माण राजीव कुमार ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पूरा कराया है। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले राहगीर और वाहन चालक अक्सर इस विहंगम दृश्य को देखकर रुक जाते हैं और अपने मोबाइल कैमरों में तस्वीरें कैद करते हैं।\n\nवाराणसी और रामेश्वरम की तीर्थयात्रा से मिला था विचार\nइस विशाल प्रतिमा की स्थापना के पीछे एक दिलचस्प आध्यात्मिक कहानी जुड़ी हुई है। राजीव कुमार के अनुसार, लगभग सात वर्ष पूर्व वह अपने मित्रों के साथ प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों वाराणसी और रामेश्वरम की यात्रा पर गए थे। वहां उन्होंने भगवान शिव की भव्य और विशाल प्रतिमाओं के दर्शन किए। उन आलौकिक मूर्तियों को देखकर उनके मन में यह विचार आया कि अपने पैतृक गांव में भी देवों के देव महादेव की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने निरंतर प्रयास जारी रखे और आखिरकार लगभग चार साल पहले मंदिर परिसर में 51 फीट ऊंची शिव प्रतिमा की स्थापना का कार्य संपन्न हुआ।\n\nतीन दशक पुराना है बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर का इतिहास\nबाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर का इतिहास लगभग तीन दशक पुराना है। राजीव कुमार बताते हैं कि करीब 30 वर्ष पहले इस स्थान पर एक जल निकाय यानी पोखर हुआ करता था। उस दौर में यहां अक्सर नाग-नागिन के जोड़े दिखाई दिया करते थे। इस स्थिति को देखते हुए गांव के विद्वान ब्राह्मणों ने ग्रामीणों को सलाह दी कि इस पवित्र स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर नियमित पूजा-अर्चना शुरू की जाए। विद्वानों के परामर्श पर पोखर के किनारे शिवलिंग स्थापित किया गया। शुरुआत में केवल गांव के निवासी ही वहां पूजा करने आते थे, लेकिन धीरे-धीरे इस स्थान की महिमा आसपास के इलाकों में फैलती चली गई।\n\nसावन माह में उमड़ती है भारी भीड़ और मांगलिक कार्यों के लिए बनी पहली पसंद\nसमय बीतने के साथ यह स्थल बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया और आज यह मुजफ्फरपुर जिले का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बन चुका है। पवित्र सावन महीने के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजनों का आयोजन होता है। सावन के प्रत्येक सोमवार और सावन शिवरात्रि के अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। राजीव कुमार का कहना है कि मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के विस्तृत क्षेत्रों में इतनी विशाल शिव प्रतिमा अन्यत्र देखने को नहीं मिलती है। यही कारण है कि अब यह मंदिर न केवल दैनिक पूजा-पाठ बल्कि विवाह समारोहों और अन्य शुभ मांगलिक कार्यक्रमों के लिए भी स्थानीय लोगों की पहली पसंद बन चुका है।\n\nइसका आप पर असर\n• बिहार में: मुजफ्फरपुर और आसपास के श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और मांगलिक आयोजनों के लिए एक नया भव्य धार्मिक स्थल प्राप्त हुआ है।\n• भारत भर में: ग्रामीण इलाकों में जनभागीदारी से बने यह स्मारक सामुदायिक प्रयास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मुजफ्फरपुर में 51 फीट ऊंची शिव प्रतिमा का निर्माण किसने कराया?\nपताही गांव के निवासी और किसान राजीव कुमार ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से इस विशाल प्रतिमा का निर्माण कराया है।\n\n2. यह शिव प्रतिमा किस स्थान पर स्थित है?\nयह प्रतिमा बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एनएच-122 रेवा रोड के किनारे बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर परिसर में स्थित है।\n\n3. राजीव कुमार को यह विशाल प्रतिमा बनाने की प्रेरणा कहां से मिली?\nलगभग सात साल पहले वाराणसी और रामेश्वरम की धार्मिक यात्रा के दौरान विशाल मूर्तियों के दर्शन कर उन्हें अपने गांव में शिव प्रतिमा स्थापित करने का विचार आया था।\n\n4. बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर का इतिहास क्या है?\nकरीब 30 साल पहले एक पोखर के पास नाग-नागिन दिखने पर स्थानीय ब्राह्मणों की सलाह पर यहां शिवलिंग स्थापित कर पूजा शुरू की गई थी।\n\nप्रेरणा और सबक\n• दृढ़ संकल्प का महत्व: यात्रा के दौरान मन में आए एक शुभ विचार को चार साल की लगन से हकीकत में बदला जा सकता है।\n• सामुदायिक एकजुटता: बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ग्रामीणों और पड़ोसियों का सहयोग सबसे बड़ी ताकत बनता है।\n• सांस्कृतिक जड़ों का संवर्धन: अपनी स्थानीय मान्यताओं को संवारकर अपने गांव को एक नई पहचान दी जा सकती है।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-08-10",
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