बाबा नीम करौरी का जन्मस्थान फिरोजाबाद का अकबरपुर, दो दशक तक संभाली थी प्रधानी की कमान उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में स्थित अकबरपुर गांव विश्वविख्यात आध्यात्मिक संत बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली है। इस गांव में उन्होंने करीब बीस साल तक प्रधान के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं और उनके जीवन से जुड़े कई अनसुने प्रसंग आज भी यहां मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद जिला यूं तो कांच के तमाम उत्पादों और अपनी अनूठी कारीगरी के लिए दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान रखता है, लेकिन इसके साथ ही यह धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी खासे महत्व की नगरी है। दुनिया भर में अपनी चमत्कारिक लीलाओं और असीम कृपा के लिए प्रसिद्ध संत बाबा नीम करौरी की पावन जन्मभूमि होने के नाते इस इलाके को वैश्विक स्तर पर एक विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त है। यद्यपि उनके चमत्कारों के अनगिनत किस्से देश और दुनिया के कोने-कोने में सुने और सुनाए जाते हैं, किंतु उनके शुरुआती जीवन और संघर्षों से जुड़ी कई ऐसी अनूठी कहानियां और स्मृतियां आज भी मुख्य रूप से उनकी इसी जन्मस्थली पर जीवंत बनी हुई हैं। वर्तमान समय में इस ऐतिहासिक महत्व वाले गांव को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को उनके जीवन के शुरुआती पन्नों से रूबरू कराया जा सके। अकबरपुर में हुआ था जन्म और लक्ष्मीनारायण था मूल नाम फिरोजाबाद शहर के नजदीक स्थित उसायनी के पास बसा अकबरपुर गांव वही पवित्र भूमि है जहां सन 1900 में बाबा नीम करौरी का जन्म हुआ था। स्थानीय स्तर पर उनके साथ लंबा समय बिताने वाले और वर्तमान में 93 वर्ष की आयु पार कर चुके बुजुर्ग रामप्रकाश शर्मा ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया है कि वह बाबा के साथ काफी समय तक इसी गांव में रहे थे। उनके अनुसार, आध्यात्मिक रूप से ख्याति प्राप्त करने से पहले संत का मूल नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा हुआ करता था। उनके गृहस्थ जीवन और सामाजिक जुड़ाव के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनका विवाह संपन्न हो चुका था और उनके दो पुत्र भी थे। सांसारिक दायित्वों का निर्वहन करने के साथ-साथ वह अपने आराध्य हनुमान जी की अनन्य भक्ति में लीन रहा करते थे, जिसकी झलक उनके पूरे जीवन और स्वभाव में स्पष्ट रूप से देखने को मिलती थी। दो दशक तक संभाली प्रधानी और डाक बंगले से किया कामकाज देश के स्वतंत्र होने के बाद जब ग्रामीण अंचलों में पहली बार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पंचायत चुनावों की शुरुआत हुई थी, तब अकबरपुर गांव में किसी भी प्रकार का चुनावी प्रचार-प्रसार या आज की तरह बड़ी रैलियां नहीं हुआ करती थीं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, उस दौर में गांव के प्रधान पद के लिए जब प्रक्रिया शुरू हुई तो बाबा ने केवल अपना हाथ खड़ा किया और गांव के तमाम लोगों ने सर्वसम्मति से उन्हें अपना मुखिया चुन लिया। प्रधान चुने जाने के बाद उन्होंने गांव में एक डाक बंगले का निर्माण करवाया था, जहां बैठकर वह प्रशासनिक और गांव से जुड़े तमाम कार्यों का निष्पादन किया करते थे। जब भी गांव का कोई निवासी अपनी किसी समस्या या शिकायत को लेकर उनके पास पहुंचता था, तो वह इसी बंगले में बैठकर उनकी परेशानियों का समाधान किया करते थे। इस तरह लक्ष्मीनारायण अथवा लक्ष्मण दास के रूप में उन्होंने करीब बीस वर्षों तक गांव के प्रधान की जिम्मेदारी संभाली और पूरी निष्ठा के साथ जनसेवा की। गांव से प्रस्थान और चमत्कारों से वैश्विक प्रसिद्धि गांव में दो दशकों तक लगातार प्रधान के रूप में प्रशासनिक और सामाजिक कार्य करने के पश्चात वह इस क्षेत्र से बाहर चले गए और आगे चलकर अपने अद्भुत चमत्कारों व आध्यात्मिक उपदेशों के माध्यम से देश-दुनिया में विख्यात हो गए। उनके जाने के बाद भी उनकी कई निशानियां आज भी अकबरपुर गांव में सुरक्षित रूप से संरक्षित हैं, जिनमें उनका वह पुराना डाक बंगला और उनका ध्यान कक्ष प्रमुख रूप से शामिल है। आज भी देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी उनके तमाम भक्त इन पवित्र स्थलों के दर्शन करने के लिए विशेष रूप से इस गांव में पहुंचते हैं। गांव के एक अन्य निवासी दयानंद ने जानकारी दी है कि बाबा की इसी जन्मभूमि को अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान और महानता से परिचित हो सकें। भव्य मंदिर का निर्माण और पर्यटन के रूप में विकास अकबरपुर गांव में अब एक बहुत ही भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण भी करवा दिया गया है, जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया है। स्थानीय निवासियों का यह भी मानना है कि केवल बाबा की असीम कृपा और आशीर्वाद के परिणामस्वरुप ही इस पूरे गांव का चहुंमुखी विकास संभव हो पा रहा है। उनके चमत्कारों की कहानियां आज केवल भारत तक सीमित नहीं हैं बल्कि अटलांटिक पार और दुनिया के तमाम देशों में उनके भक्तों द्वारा श्रद्धा के साथ सुनी और सुनाई जाती हैं। उनकी जन्मभूमि होने के नाते इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प किया जा रहा है और इसे पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया जा रहा है, जिससे यहां की स्थानीय संस्कृति और इतिहास को एक नई पहचान मिल रही है। इसका आप पर असर बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली अकबरपुर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी। • भारत में: देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए फिरोजाबाद के इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल तक पहुंच आसान होगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। • फिरोजाबाद में: स्थानीय निवासियों और व्यवसायियों को पर्यटन विकास, नई बुनियादी सुविधाओं के निर्माण और मेहमानों की आवाजाही से प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। सवाल-जवाब 1. बाबा नीम करौरी का जन्म कब और कहां हुआ था? उनका जन्म सन 1900 में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के उसायनी के पास स्थित अकबरपुर गांव में हुआ था। 2. संत बनने से पहले उनका मूल नाम क्या था? आध्यात्मिक ख्याति मिलने से पहले उनका मूल नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा (लक्ष्मण दास) था। 3. उन्होंने गांव के प्रधान के रूप में कितने समय तक कार्य किया? उन्होंने अकबरपुर गांव में करीब 20 साल तक प्रधान के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। 4. वह गांव में किस स्थान पर बैठकर प्रशासनिक कार्य करते थे? प्रधान बनने के बाद उन्होंने गांव में एक डाक बंगला बनवाया था, जहां बैठकर वह लोगों की समस्याएं सुलझाते थे। 5. वर्तमान में इस जन्मभूमि का विकास किस रूप में किया जा रहा है? उनकी जन्मभूमि अकबरपुर को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है जहां एक भव्य मंदिर भी बनाया गया है। प्रेरणा और सबक बाबा नीम करौरी के जीवन से सादगी, निस्वार्थ जनसेवा और आध्यात्मिक समर्पण की प्रेरणा मिलती है। • सादगी भरा जीवन: उच्च आध्यात्मिक स्थिति प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने सामान्य ग्रामीण जीवन जीते हुए जमीनी स्तर पर कार्य किया। • निस्वार्थ जनसेवा: बिना किसी प्रचार के लगभग दो दशकों तक गांव के प्रधान के रूप में लोगों की समस्याओं का समाधान करना कर्तव्यनिष्ठा सिखाता है। • अटूट भक्ति: सांसारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी आध्यात्मिक साधना और हनुमान भक्ति को निरंतर बनाए रखना एक बड़ा संदेश है। https://trendkia.com/religion/neem-karoli-baba-ka-janmasthana-phirojabada-ka-akbarpur-do-dashaka-taka-snbhali-thi-pradhani-ki-kamana-24892 TrendKia — Har trend, sabse pehle.