पद्मावत जौहर विवाद पर स्वरा भास्कर और मनुस्मृति मामले में राहुल गांधी पर बरसे अनिरुद्धाचार्य महाराज फिल्म पद्मावत में जौहर सीन पर स्वरा भास्कर की टिप्पणी और मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी के बयानों पर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। फिल्म पद्मावत में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर की पूर्व टिप्पणियां एक बार फिर चर्चा में हैं। इस पूरे प्रकरण पर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराओं, विशेषकर जौहर जैसी महान कुर्बानी और उसके पीछे छिपे आत्मसम्मान को समझने के लिए इंसान के भीतर नैतिक चरित्र का होना अनिवार्य है। अनिरुद्धाचार्य महाराज ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को नैतिक मूल्यों की समझ नहीं है, वे कभी भी भारत के गौरवशाली इतिहास, आस्था और स्वाभिमान की गहराई का सही आकलन नहीं कर सकते। स्वरा भास्कर की टिप्पणियों पर अनिरुद्धाचार्य का तीखा रुख स्वरा भास्कर द्वारा फिल्म में दिखाए गए जौहर प्रथा के चित्रण पर किए गए कटाक्ष पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने भारतीय संस्कृति में सती और जौहर के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने रानी पद्मावती का उदाहरण देते हुए कहा कि वे एक परम पवित्र नारी थीं, जिन्होंने अपने सम्मान, स्वाभिमान और धर्म की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनके अनुसार, ऐसी ऐतिहासिक घटनाएं समाज को यह संदेश देती हैं कि जीवन में भौतिक अस्तित्व से भी बढ़कर चरित्र और सम्मान की रक्षा होती है। 'चरित्रवान ही समझ सकता है आत्मसम्मान का मूल्य' त्याग और बलिदान के संदर्भ को समझाते हुए अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि जीवन भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन किसी भी परिस्थिति में व्यक्ति को अपने चरित्र का त्याग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि "चरित्रवान ही चरित्रवान का सम्मान करेगा।" जो व्यक्ति स्वयं उच्च नैतिक सिद्धांतों का पालन नहीं करता, उसके लिए ऐसे ऐतिहासिक त्याग और उच्च आदर्शों के महत्व को समझ पाना अत्यंत कठिन है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जहां महिलाओं ने अपने सम्मान को प्राणों से अधिक प्रिय माना। राहुल गांधी और मनुस्मृति विवाद पर उठाए गंभीर सवाल स्वरा भास्कर के बाद अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर भी तीखा प्रहार किया जिसमें उन्होंने मनुस्मृति का हवाला देते हुए महिलाओं की अपने पिता, भाई और पति पर निर्भरता पर सवाल उठाए थे। कथावाचक ने राहुल गांधी के इस रुख पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि वे हमेशा सनातन धर्म और उसके प्राचीन ग्रंथों को ही क्यों निशाने पर लेते हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि राहुल गांधी तीन तलाक, बुर्का प्रथा या हलाला जैसी कुरीतियों पर अपनी बात क्यों नहीं रखते। उन्होंने पूछा कि क्या हलाला या तीन तलाक से महिलाओं को सम्मान मिलता है? उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी इन ज्वलंत सामाजिक मुद्दों पर पूरी तरह मौन रहते हैं और केवल सनातन धर्म को बदनाम करने तथा उसका अनादर करने का प्रयास करते हैं। सनातन धर्म में महिलाओं का स्थान और अन्य धर्मों से तुलना अनिरुद्धाचार्य महाराज ने मनुस्मृति का बचाव करते हुए कहा कि जो व्यक्ति केवल नकारात्मकता ढूंढना चाहता है, उसे हर जगह बुराई ही दिखाई देगी। उन्होंने कहा कि यदि नीयत ही गलत हो तो किसी भी पवित्र ग्रंथ का अनर्थ निकाला जा सकता है। उन्होंने स्वामी कबीर के विचारों को याद दिलाते हुए कहा कि संसार में हर प्रकार के लोग मौजूद हैं, लेकिन किसी अन्य में दोष देखने से पहले इंसान को अपने भीतर झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सनातन धर्म में ही नारी को देवी का दर्जा दिया गया है। सनातन परंपरा में माँ दुर्गा, भगवान राम के साथ माता सीता और भगवान कृष्ण के साथ श्री राधा जी को पूजनीय माना गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस्लाम या ईसाई धर्म में महिलाओं को ईश्वर का दर्जा अथवा वैसी दिव्य उपाधि दी गई है जैसी सनातन धर्म में मिलती है। मनुस्मृति के अध्ययन और जीवन में उसके महत्व पर जोर राहुल गांधी को सलाह देते हुए कथावाचक ने कहा कि उन्हें मनुस्मृति का निष्पक्ष अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने मनुस्मृति के प्रसिद्ध श्लोक का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि जहाँ नारियों की पूजा और सम्मान होता है, वहाँ देवी-देवताओं का निवास होता है तथा सुख और समृद्धि का वास होता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को मनुस्मृति की बातें समझ में नहीं आतीं या उसमें रुचि नहीं है, तो उस पर अनावश्यक विवाद पैदा करने के बजाय अच्छी बातों को ग्रहण करना चाहिए और जो उपयुक्त न लगे उसे छोड़ देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सनातन धर्म मार्गदर्शन देता है और धर्म के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। इसका आप पर असर सनातन परंपराओं और समाज में महिलाओं की स्थिति को लेकर चल रही इस बहस का आम नागरिकों के सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण पर सीधा प्रभाव पड़ता है। • सांस्कृतिक जागरूकता: प्राचीन इतिहास और परंपराओं के सही संदर्भ को समझने से भावी पीढ़ियों में सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान बढ़ता है। • धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन: किसी भी प्राचीन ग्रंथ पर राय बनाने से पूर्व उसके वास्तविक अर्थ को पढ़ना और समझना आवश्यक है। • सामाजिक संवाद: लिंग समानता और महिला अधिकारों पर स्वस्थ चर्चा से समाज में सकारात्मक वैचारिक बदलाव आता है। • सामुदायिक समझ: विभिन्न धार्मिक और सामाजिक प्रथाओं की निष्पक्ष समीक्षा से आपसी समझ मजबूत होती है। सवाल-जवाब 1. अनिरुद्धाचार्य महाराज ने स्वरा भास्कर के किस बयान पर आपत्ति जताई? अनिरुद्धाचार्य महाराज ने फिल्म पद्मावत के जौहर दृश्य पर स्वरा भास्कर की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आत्मसम्मान और चरित्र के महत्व को समझे बिना इस त्याग का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। 2. राहुल गांधी ने मनुस्मृति को लेकर क्या कहा था? राहुल गांधी ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए महिलाओं की उनके पिता, भाई और पति पर निर्भरता के संबंध में टिप्पणी की थी। 3. अनिरुद्धाचार्य महाराज ने राहुल गांधी से क्या सवाल पूछे? उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि वे तीन तलाक, बुर्का और हलाला जैसी प्रथाओं पर क्यों नहीं बोलते और केवल सनातन धर्म को ही क्यों निशाना बनाते हैं। 4. मनुस्मृति में महिलाओं के सम्मान के बारे में क्या लिखा है? अनिरुद्धाचार्य महाराज के अनुसार मनुस्मृति में लिखा है 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते', अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है वहाँ देवताओं का वास होता है। https://trendkia.com/religion/padmavata-jauhara-vivada-para-swara-bhaskar-aura-manusmriti-mamale-men-rahul-gandhi-para-barase-aniruddhacharya-maharaj-27550 TrendKia — Har trend, sabse pehle.