# 11 सितंबर 2026 पंचांग: जानिए शुक्रवार की कुशाग्रहणी अमावस्या, शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

> 11 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या और कुशोत्पाटिनी अमावस्या है। इस दिन स्नान-दान, पितृ तर्पण और कुशा एकत्र करने का विशेष महत्व है। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए सभी शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और राहुकाल की सटीक जानकारी।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/panchang-for-september-11-2026-kushagrahani-amavasya-sadhya-yoga-auspicious-timings-and-rahu-kaal-31067 · **Language:** Hindi
**Tags:** कुशाग्रहणी अमावस्या, पंचांग 2026, भाद्रपद अमावस्या, राहुकाल, शुभ मुहूर्त, साध्य योग, धार्मिक तिथियां

आगामी 11 सितंबर 2026 को शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है क्योंकि इस दिन भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। इस पावन तिथि को कुशोत्पाटिनी अमावस्या या कुशाग्रहणी अमावस्या के रूप में भी पूजा जाता है। सनातन धर्म में इस दिन स्नान और दान करने के साथ-साथ अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण करने का विधान है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस विशेष तिथि पर सालभर के धार्मिक एवं मांगलिक कार्यों के लिए कुशा घास एकत्र करने की प्राचीन परंपरा भी निभाई जाती है। आइए आचार्य इंदु प्रकाश के माध्यम से इस दिन के सभी जरूरी मुहूर्त, योग और नक्षत्र के बारे में विस्तार से जानते हैं।

 

## 11 सितंबर 2026 के मुख्य पंचांगीय योग और तिथियां
 धार्मिक आयोजनों और अनुष्ठानों की दृष्टि से इस दिन कई महत्वपूर्ण तिथियां और योग बन रहे हैं। भाद्रपद अमावस्या तिथि 11 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजकर 57 मिनट तक प्रभावी रहेगी। इसके तुरंत बाद प्रतिपदा या आगे के क्रम की स्थिति बनेगी। इसके साथ ही, साध्य योग का सुयोग 11 सितंबर को शाम 5 बजकर 2 मिनट तक रहेगा, जो विभिन्न प्रकार की साधना और कार्यों की सिद्धि के लिए उत्तम माना जाता है। नक्षत्रों की बात करें तो पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र 11 सितंबर की दोपहर 1 बजकर 17 मिनट तक विद्यमान रहेगा। शुक्रवार का यह दिन भाद्रपद अमावस्या और कुशोत्पाटिनी अमावस्या के विशेष संयोग के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी रहेगा।

 

## 11 सितंबर 2026 के सभी शुभ मुहूर्त
 दिनभर के विभिन्न कार्यों को सही समय पर शुरू करने के लिए शुभ मुहूर्तों का बहुत महत्व होता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:17 ए एम से शुरू होकर 06:09 ए एम तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए श्रेष्ठ है। इसके बाद प्रातः संध्या सुबह 05:43 ए एम से 07:01 ए एम तक रहेगी। दिन के मध्य में अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:10 पी एम से 12:54 पी एम तक और विजय मुहूर्त दोपहर 02:22 पी एम से 03:06 पी एम तक रहेगा, जिनमें किए गए कार्य सफल माने जाते हैं। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त शाम 05:59 पी एम से 06:26 पी एम तक तथा सायाह्न संध्या शाम 06:02 पी एम से 07:20 पी एम तक निर्धारित की गई है।

 

## प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय
 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल के दौरान किसी भी नए या मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। 11 सितंबर 2026 को देश के विभिन्न प्रमुख महानगरों में राहुकाल की समय सारणी इस प्रकार रहेगी। दिल्ली में सुबह 10:44 से दोपहर 12:18 तक राहुकाल रहेगा। मुंबई में यह समयावधि सुबह 11:03 से दोपहर 12:35 तक की होगी। चंडीगढ़ के लिए सुबह 10:46 से दोपहर 12:19 तक का समय राहुकाल का रहेगा, जबकि लखनऊ में यह सुबह 10:30 से दोपहर 12:03 तक प्रभावी रहेगा। भोपाल में सुबह 10:44 से दोपहर 12:17 तक, कोलकाता में सुबह 10:00 से दोपहर पहले 11:33 तक, अहमदाबाद में सुबह 11:03 से दोपहर 12:36 तक और चेन्नई में सुबह 10:33 से दोपहर 12:05 तक राहुकाल का प्रभाव रहेगा।

 

## सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
 इस दिन प्रकृति के चक्र के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त का समय भी तय है। पंचांग के अनुसार 11 सितंबर 2026 को सूर्योदय सुबह 6:03 बजे होगा, जबकि दिन का समापन यानी सूर्यास्त शाम 6:31 बजे दर्ज किया जाएगा। इन दोनों समयों के बीच श्रद्धालु अपने दैनिक धार्मिक कृत्य और पूजा-पाठ संपन्न कर सकते हैं।

 

## कुशाग्रहणी अमावस्या का धार्मिक महत्व
 भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि को कुशाग्रहणी अमावस्या, पिठोरी अमावस्या और कुशोत्पाटिनी अमावस्या जैसे नामों से पुकारा जाता है। इस पावन अवसर पर कुशा घास को विधि-विधान के साथ जमीन से उखाड़कर घर लाया जाता है, जिसका उपयोग पूरे सालभर के सभी धार्मिक अनुष्ठानों, हवन, श्राद्ध और मांगलिक कार्यों में किया जाता है। इसके अलावा, पितरों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए इस दिन तर्पण करने से विशेष लाभ मिलता है। पितृपक्ष से पहले आने वाली इस अमावस्या पर पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करने और उसके नीचे सरसों के तेल या घी का दीपक जलाने की परंपरा है। माना जाता है कि इस तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने से व्यक्ति के संचित पाप नष्ट हो जाते हैं।

## इसका आप पर असर
कुशोत्पाटिनी अमावस्या के दिन धार्मिक अनुष्ठानों, स्नान, दान और पितृ तर्पण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे दैनिक दिनचर्या में पूजा-पाठ और परंपराओं का पालन करने वालों के लिए यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

- **भारत में:** देश भर के श्रद्धालुओं के लिए यह तिथि पूर्वजों के निमित्त तर्पण और सालभर के धार्मिक कार्यों हेतु कुशा घास एकत्र करने का अवसर प्रदान करती है। लोग सुबह के शुभ मुहूर्तों में स्नान और दान कर सकते हैं।

- **प्रमुख महानगरों में:** दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और अन्य शहरों के निवासियों को राहुकाल के समय (जैसे दिल्ली में सुबह 10:44 से दोपहर 12:18 तक) किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पंचांगीय स्थिति चंद्र मास और नक्षत्रों की खगोलीय गणना पर आधारित है, जो सनातन पंचांग के अनुसार व्रत और पर्व तय करती है।

- **तिथि निर्धारण:** भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की गणना सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर की जाती है, जिसके तहत 11 सितंबर 2026 को यह तिथि सुबह 8 बजकर 57 मिनट तक रहेगी।

- **धार्मिक परंपरा:** इस विशेष दिन पर कुशा घास एकत्र करने और पितृ तर्पण करने की परंपरा प्राचीन शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि और पूर्वजों की तृप्ति है।

## सवाल-जवाब

### 1. 11 सितंबर 2026 को कौन सी अमावस्या है?
इस दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या है जिसे कुशोत्पाटिनी या कुशाग्रहणी अमावस्या कहा जाता है।

### 2. भाद्रपद अमावस्या तिथि कब तक रहेगी?
यह तिथि 11 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजकर 57 मिनट तक प्रभावी रहेगी।

### 3. साध्य योग कब तक रहेगा?
साध्य योग 11 सितंबर को शाम 5 बजकर 2 मिनट तक रहेगा।

### 4. दिल्ली में राहुकाल का समय क्या है?
दिल्ली में राहुकाल सुबह 10:44 से दोपहर 12:18 तक रहेगा।

### 5. इस दिन सूर्योदय और सूर्यास्त का समय क्या है?
सूर्योदय सुबह 6:03 बजे और सूर्यास्त शाम 6:31 बजे होगा।

### 6. कुशोत्पाटिनी अमावस्या पर क्या किया जाता है?
इस दिन सालभर के धार्मिक कार्यों के लिए कुशा घास एकत्र की जाती है और पितरों के निमित्त तर्पण किया जाता है।

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