# पहली बार रख रही हैं हरतालिका तीज? जरूर जान लें नियम और शुभ मुहूर्त

> हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। अगर आप पहली बार यह उपवास कर रही हैं, तो पूजा के शुभ मुहूर्त, निर्जला व्रत के नियम और आवश्यक सावधानियों के बारे में विस्तार से जान लें।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/pehli-bar-rakh-rahi-hain-hartalika-teej-rules-aur-shubh-muhurat-30521 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरतालिका तीज 2026, तीज व्रत नियम, हरतालिका पूजा मुहूर्त, सुहागिन व्रत, शिव पार्वती पूजा, हरतालिका पारण

हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरतालिका तीज का पावन व्रत करने का विधान है। इस खास अवसर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना के लिए कठिन निर्जला उपवास रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस वर्ष हरतालिका तीज का यह पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। यदि आप जीवन में पहली बार यह व्रत रखने जा रही हैं, तो इससे जुड़े सभी जरूरी नियमों और परंपराओं की पूरी जानकारी होना आवश्यक है ताकि पूजा का पूर्ण फल मिल सके।

 

## हरतालिका तीज 2026 शुभ मुहूर्त और समय

पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर हो जाएगा। इस बार हरतालिका पूजा का मुख्य प्रातःकाल मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 6 बजकर 26 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा दिन में अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 9 मिनट से दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक का रहेगा। इस कठिन व्रत का पारण अगले दिन यानी 15 सितंबर 2026 को सुबह विधि-विधान से संपन्न किया जाएगा।

 

## पहली बार व्रत रखने वालों के लिए जरूरी नियम

जो महिलाएं इस साल पहली बार हरतालिका तीज का व्रत शुरू कर रही हैं, उन्हें धार्मिक नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। व्रत की शुरुआत सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर संकल्प लेने के साथ की जाती है। एक बार इस उपवास को शुरू करने के बाद बीच में इसे छोड़ने से बचना चाहिए। व्रत के पूरे समय के दौरान अपने मन को शांत, प्रसन्न और सकारात्मक रखना बेहद जरूरी है और किसी भी बात पर बिना वजह गुस्सा करने से बचना चाहिए।

हरतालिका तीज की सबसे बड़ी विशेषता इसका रात्रि जागरण है। इस दिन व्रती महिलाओं को सोना नहीं चाहिए और पूरी रात जागकर भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों का स्मरण व जागरण करना चाहिए। यह व्रत पूरी तरह से निर्जला रखा जाता है, जिसका अर्थ है कि सूर्योदय से लेकर अगले दिन व्रत के पारण तक पानी की एक बूंद भी ग्रहण करना वर्जित होता है। इसलिए इस दिन गलती से भी पानी नहीं पीना चाहिए।

पूजा के दौरान सुहागिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार करना अनिवार्य माना गया है। वस्त्रों का चयन करते समय लाल, पीले या हरे जैसे शुभ रंगों के कपड़ों को पहनना चाहिए। इस पावन दिन काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र भूलकर भी धारण नहीं करने चाहिए। पूजा के लिए हाथों से तैयार की गई मिट्टी या रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है और उन्हीं की विधिपूर्वक आराधना की जाती है।

व्रत के अगले दिन यानी 15 सितंबर को सुबह के समय सबसे पहले भगवान की विधिवत पूजा की जाती है। इसके पश्चात गरीबों को दान-दक्षिणा दी जाती है और घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। इन सभी धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करने के बाद ही जल ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है।

## इसका आप पर असर
हरतालिका तीज के व्रत का सीधा असर उन लाखों सुहागिन महिलाओं के दैनिक जीवन और पारिवारिक आयोजनों पर पड़ता है जो इस परंपरा का पालन करती हैं।

- **भारत में:** देश भर में महिलाएं इस कठिन उपवास की तैयारी के लिए पारंपरिक वस्त्रों, पूजन सामग्री और श्रृंगार के सामान की खरीदारी करती हैं, जिससे स्थानीय बाजारों में त्योहारी रौनक बढ़ती है।

- **पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर:** इस दिन निर्जला उपवास और रात्रि जागरण के कारण स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है, और व्रत के अगले दिन दान-पुण्य व पूजन के साथ अनुष्ठान संपन्न होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
हरतालिका तीज का यह पर्व धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं की गहरी नींव पर आधारित है।

- **धार्मिक कारण:** प्राचीन कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या और पहला निर्जला उपवास किया था, तभी से सुहागिनें इस परंपरा का पालन करती हैं।

- **पंचांग की गणना:** हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के खगोलीय और पंचांगीय निर्धारण के आधार पर ही इस व्रत की सही तिथि तय की जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. हरतालिका तीज 2026 का व्रत कब है?
हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 को रखा जाएगा।

### 2. तृतीया तिथि की शुरुआत कब से हो रही है?
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी।

### 3. पूजा का प्रातःकाल मुहूर्त कितने बजे तक है?
हरतालिका पूजा का मुख्य प्रातःकाल मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 6 बजकर 26 मिनट से सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।

### 4. व्रत का पारण किस दिन किया जाएगा?
हरतालिका तीज व्रत का पारण अगले दिन 15 सितंबर 2026 को सुबह किया जाएगा।

### 5. क्या हरतालिका तीज में पानी पिया जा सकता है?
नहीं, यह व्रत पूरी तरह से निर्जला रखा जाता है जिसमें पानी की एक बूंद भी ग्रहण करने की मनाही होती है।

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