पितृपक्ष में पितरों की कृपा पाने के लिए लगाएं ये 5 पवित्र पौधे, रोपण संभव न हो तो करें दान सर्वपितृ अमावस्या के समापन से पहले घर या मंदिर में तुलसी, पीपल, केला, बरगद अथवा बेल का पौधा लगाने या दान करने से पितृदोष दूर होता है और परिवार में शांति आती है. श्राद्ध पक्ष की अवधि पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक बेहद पावन अवसर मानी जाती है. इस दौरान लोग अपने पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज जैसे पारंपरिक अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न करते हैं. इन धार्मिक कर्मों का मुख्य उद्देश्य पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करना और परिवार पर बने पितृदोष समेत अन्य बाधाओं से मुक्ति पाना होता है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं में प्रकृति के तत्वों, विशेष रूप से वृक्षों और वनस्पतियों को देवत्व का प्रतीक माना गया है. इसी कारण पितृपक्ष के दिनों में कुछ विशेष पवित्र पौधों का रोपण करना अथवा उनका दान करना अत्यधिक फलदायी और कल्याणकारी माना जाता है. 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इस पक्ष का समापन होने जा रहा है. ऐसे में इस अंतिम तिथि से पहले यदि उचित स्थान पर विशेष पौधे लगाए जाएं या उनका दान किया जाए, तो पूर्वजों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. तुलसी का पौधा और तर्पण में इसका महत्व सनातन परंपरा में तुलसी के पौधे को सर्वोपरि और अत्यंत पूजनीय स्थान प्राप्त है. पितृपक्ष की अवधि में घर के आंगन या बालकनी में तुलसी का नया पौधा स्थापित करना और नियमित रूप से सुबह-शाम दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करना देवताओं के साथ-साथ पितरों को भी असीम संतुष्टि देता है. धार्मिक विधानों के अनुसार श्राद्ध और तर्पण के जल में तुलसी की पत्तियां डालकर अर्घ्य देने से पूर्वजों की आत्मा पूरी तरह तृप्त हो जाती है. ऐसा करने से घर में व्याप्त पितृदोष का प्रभाव क्षीण होता है. यदि किसी कारणवश घर की चारदीवारी में तुलसी का रोपण करना संभव न हो, तो किसी मंदिर में अथवा योग्य व्यक्ति को पितरों के नाम से तुलसी के पौधे का दान अवश्य कर देना चाहिए. पीपल का वृक्ष और अड़चनों का निवारण धार्मिक ग्रंथों में पीपल के पेड़ को समस्त देवों और पूर्वजों का मुख्य आश्रय स्थल बताया गया है. मान्यता है कि इस वृक्ष की शाखाओं और मूल में दिव्य शक्तियों का वास होता है. पितृपक्ष के पावन दिनों में पीपल का पौधा लगाना और उसमें जल देकर उसकी सेवा-सुश्रूषा करना पूर्वजों को अतिशीघ्र प्रसन्न करने का सरल मार्ग माना जाता है. इस पौधे को उचित स्थान पर रोपने से जीवन में आ रही अनचाही रुकावटें समाप्त होती हैं और पितृकृपा से मार्ग प्रशस्त होता है. यदि घर के भीतर अथवा परिसर में पीपल का वृक्ष लगाना व्यावहारिक न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या से पूर्व किसी सार्वजनिक स्थल, वाटिका या देवस्थान के लिए पीपल के पौधे का दान करना चाहिए. केले का पौधा लाएगा सुख और संपन्नता केले का पौधा भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पक्ष में केले का पौधा लगाना परिवार के लिए अपार सौभाग्य और कल्याण का कारक बनता है. इस पौधे की नियमित देखरेख करने से पूर्वज संतुष्ट होते हैं और यदि परिवार में लंबे समय से किसी प्रकार का क्लेश अथवा उलझन चल रही हो, तो उसका निवारण होता है. जो श्रद्धालु अपने आवास पर केले का पौधा रोपने में असमर्थ हों, वे पितरों के निमित्त किसी देवालय में अथवा किसी अन्य व्यक्ति को इस पवित्र पौधे को ससम्मान दान कर सकते हैं. बरगद का वृक्ष: मोक्ष और शांति का प्रतीक बरगद यानी वट वृक्ष को सनातन धर्म में दीर्घायु, स्थिरता और मोक्ष प्रदान करने वाला महावृक्ष कहा गया है. मान्यताओं के अनुसार इस विशाल वृक्ष में देवी-देवताओं के साथ ही पितरों का भी वास रहता है. पितृपक्ष के दिनों में बरगद का पौधा लगाना पितृदोष से मुक्ति पाने का अचूक साधन माना गया है. इस पावन वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करने और दीपक प्रज्वलित करने से अतृप्त पूर्वजों की आत्मा को शांति तथा सद्गति मिलती है. यदि घर की सीमा में इस विशालकाय वृक्ष को लगाना संभव न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या से पहले किसी मंदिर, आश्रम या खुली भूमि के निमित्त बरगद के पौधे का दान किया जा सकता है. भगवान शिव का प्रिय बेल वृक्ष और डरावने सपनों से मुक्ति शिव पुराण के अनुसार बेल का वृक्ष देवाधिदेव महादेव को अत्यंत प्रिय है. पितृपक्ष में बेल का पौधा लगाने से अतृप्त आत्माओं को शांति की प्राप्ति होती है और पितृदोष का पूरी तरह निवारण हो जाता है. धार्मिक मान्यताओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन भगवान शिव पर ताजे बेलपत्र और पवित्र गंगाजल अर्पित करने से सभी पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और परिजनों को आने वाले डरावने सपनों की समस्या समाप्त हो जाती है. यदि घर पर बेल का पौधा रोपना संभव न हो, तो अमावस्या के पावन दिन या उससे पहले किसी भी समय पितरों के नाम पर बेल का पौधा दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है. इसका आप पर असर पितृपक्ष में पवित्र पौधों का रोपण या दान करने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पारंपरिक अनुष्ठानों को सुगमता मिलती है. • दोष निवारण: इन पौधों को रोपने अथवा दान करने से पितृदोष से संबंधित मानसिक तनाव कम होता है. जिन परिवारों में लंबे समय से परेशानियां चल रही हैं, उन्हें शांति और संतुष्टि का अनुभव होता है. • अमावस्या की तैयारी: 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या से पहले पौधे लगाना या दान करना जरूरी है. जो लोग नियमित श्राद्ध अनुष्ठान नहीं कर पाए, वे इन पौधों के दान से अपनी परंपरा निभा सकते हैं. • स्थान की सुविधा: यदि घर में बड़े पेड़ लगाने की जगह नहीं है, तो मंदिर या खुले स्थान के लिए दान किया जा सकता है. इससे छोटे घरों या फ्लैटों में रहने वाले श्रद्धालु भी बिना किसी असुविधा के पुण्य अर्जित कर सकते हैं. • सपनों और भय से मुक्ति: बेलपत्र और शिव पूजा के माध्यम से डरावने सपनों से मुक्ति मिलने की मान्यता है. मानसिक रूप से परेशान परिजनों को इस विधान से शांति प्राप्त हो सकती है. ऐसा क्यों हुआ पितृपक्ष के दौरान वृक्षारोपण और पौधों के दान को हिंदू धर्म में प्रकृति और पूर्वजों के प्रति सम्मान जताने का माध्यम माना गया है. • देवत्व और प्रकृति का जुड़ाव: हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पीपल, बरगद, तुलसी, केला और बेल को देवताओं और पितरों का निवास स्थल माना गया है. इसी कारण इन वृक्षों की सेवा को सीधे पूर्वजों की सेवा से जोड़ा गया है. • अतृप्त आत्माओं की शांति: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार तर्पण और पावन वृक्षों के रोपण से पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति और मोक्ष प्राप्त होता है. यह अनुष्ठान उन दोषों का निवारण करता है जो पूर्वजों की नाराजगी से जुड़े माने जाते हैं. • श्राद्ध पक्ष का समापन: 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ यह विशेष अवधि समाप्त हो रही है. इस अंतिम तिथि से पहले शुभ कार्य संपन्न करने की मान्यता के चलते इन दिनों पौधारोपण को विशेष प्राथमिकता दी जाती है. सवाल-जवाब 1. सर्वपितृ अमावस्या कब समाप्त हो रही है? पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा. 2. पितृपक्ष में तुलसी का पौधा लगाना क्यों शुभ माना जाता है? तुलसी का पौधा लगाने और पूजा करने से पितर प्रसन्न होते हैं, तथा तर्पण में तुलसी पत्ती डालने से पितरों को तृप्ति मिलती है. 3. यदि घर में पीपल या बरगद का पौधा लगाने की जगह न हो तो क्या करें? यदि घर पर इन वृक्षों को लगाना संभव न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या से पहले किसी मंदिर या उचित स्थान के लिए इनका दान किया जा सकता है. 4. डरावने सपनों से मुक्ति के लिए किस पेड़ का पूजन बताया गया है? अमावस्या के दिन भगवान शिव पर बेलपत्र और गंगाजल अर्पित करने से पितरों को मुक्ति मिलती है और डरावने सपने आने बंद होते हैं. https://trendkia.com/religion/pitru-paksha-men-pitaron-ki-kripa-pane-ke-lie-lagaen-ye-5-pavitra-paudhe-ropana-snbhava-na-ho-to-karen-dana-41059 TrendKia — Har trend, sabse pehle.