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  "title": "पितृ पक्ष से शरद पूर्णिमा तक अश्विन माह की तिथियां और धार्मिक नियम",
  "summary": "अश्विन महीने का प्रारंभ 27 सितंबर से होकर 25 अक्टूबर तक रहेगा, जिसमें पितृ पक्ष, शारदीय नवरात्र और दशहरा जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे।",
  "content": "सनातन पंचांग के अनुसार अश्विन महीने का समय आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत फलदायी और महत्वपूर्ण माना गया है। इस वर्ष अश्विन मास 27 सितंबर से आरंभ होकर 25 अक्टूबर को समाप्त होगा। इस पूरे महीने की शुरुआत पितरों को समर्पित विशेष पक्ष से होती है और इसका समापन शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर होता है। इस कालखंड के दौरान जहां पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है, वहीं शक्ति स्वरूपा मां भगवती की आराधना के लिए शारदीय नवरात्र का आयोजन भी इसी महीने में होता है। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण एकादशी व्रत और विजयदशमी का पर्व भी इसी अवधि में संपन्न होता है।\n\nअश्विन माह 2026 के प्रमुख व्रत और तिथियां\nअश्विन महीने में आने वाले प्रमुख पर्वों और उपवासों की तिथियां इस प्रकार निर्धारित हैं\n\n• पितृ पक्ष या श्राद्ध: 27 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक की अवधि पूर्वजों के स्मरण और श्राद्ध कर्म के लिए निर्धारित है।\n• इंदिरा एकादशी: 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।\n• महालय अमावस्या: 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को पितृ विसर्जन और महालय अमावस्या का दिन रहेगा।\n• शरद नवरात्रि एवं घटस्थापना: 11 अक्टूबर 2026, रविवार से नौ दिवसीय शारदीय नवरात्रि और कलश स्थापना का शुभारंभ होगा।\n• विजयदशमी पूजा: 20 अक्टूबर 2026 को अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक दशहरा पर्व मनाया जाएगा।\n• पापकुंशा एकादशी: 21 अक्टूबर 2026, बुधवार को पापकुंशा एकादशी का उपवास किया जाएगा।\n• शरद पूर्णिमा या कोजागर पूजा: 25 अक्टूबर 2026, बुधवार को अश्विन पूर्णिमा अर्थात कोजागर पूजा के साथ इस महीने का समापन होगा।\n\nखान-पान और जीवनशैली से जुड़े जरूरी परहेज\nधार्मिक मान्यताओं के आधार पर अश्विन मास में कुछ विशेष प्रकार की खाद्य सामग्री और आचरण को वर्जित बताया गया है। इस दौरान स्वास्थ्य और धार्मिक दृष्टि से दूध का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही सब्जियों में करेला खाने से भी परहेज करने का विधान है। चूंकि इस महीने में पितृ पक्ष जैसा गंभीर समय और शारदीय नवरात्र का पवित्र उत्सव आता है, इसलिए सात्विकता बनाए रखने के लिए मांस और मदिरा जैसी तामसिक वस्तुओं के सेवन पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है।\n\nइस महीने में किन देवी-देवताओं की उपासना करें\nअश्विन के पूरे महीने में सूर्य देव की नित्य पूजा और उपासना करना बहुत लाभकारी माना जाता है। महीने के कृष्ण पक्ष के दौरान पितरों की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनमें तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म शामिल हैं। इस समय पूर्वजों के निमित्त सामर्थ्य अनुसार दान करना चाहिए। वहीं महीने के शुक्ल पक्ष में देवी शक्ति की आराधना का विशेष महत्व होता है। नवरात्र के दिनों में दुर्गा सप्तशती का विधिवत पाठ करने और दोनों समय माता की पूजा अर्चना करने का निर्देश दिया गया है।\n\nपुण्य फल और शांति के लिए आसान उपाय\nअश्विन माह के दौरान जीवन में सकारात्मकता और पितरों की प्रसन्नता के लिए कुछ सीधे नियम अपनाए जा सकते हैं। इस समय असहाय और निर्धन लोगों को अन्न का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके अलावा पितरों की संतुष्टि के लिए नियमित रूप से गाय और कौओं को भोजन उपलब्ध कराना चाहिए। पूरे महीने घर में स्वच्छता का ध्यान रखें, सात्विक भोजन ग्रहण करें और किसी भी तरह के पारिवारिक अथवा बाहरी वाद विवाद से दूर रहें। आत्मसंयम और अनुशासन के साथ इन उपायों को करने से दैवीय कृपा और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।\n\nइसका आप पर असर\nअश्विन महीने में पड़ने वाले व्रत और त्योहारों की सटीक जानकारी से दैनिक दिनचर्या और धार्मिक अनुष्ठानों की योजना बनाना आसान हो जाता है।\n\n• तैयारी का समय: 27 सितंबर से 25 अक्टूबर तक चलने वाले इस महीने में जरूरी पूजा सामग्री और अनुष्ठानों की व्यवस्था समय रहते की जा सकती है। इससे अंतिम समय की भागदौड़ से बचा जा सकेगा।\n• खान-पान में बदलाव: दूध और करेले के त्याग के साथ-साथ मांसाहार से पूरी तरह दूरी बनानी होगी। यह बदलाव आपके घरेलू बजट और खान-पान की योजना को प्रभावित करेगा।\n• पितरों के निमित्त कर्म: 27 सितंबर से 10 अक्टूबर के दौरान श्राद्ध और तर्पण के लिए समय निकालना आवश्यक होगा। जो लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान करना चाहते हैं, वे अपनी तिथियां पहले से तय कर सकते हैं।\n• नवरात्रि और उत्सव: 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली नवरात्रि और 20 अक्टूबर के दशहरा पर्व के लिए उपवास और खरीदारी का प्रबंधन करना होगा। परिवार के साथ मिलकर उत्सव की तैयारियां सुचारू रूप से की जा सकती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअश्विन महीने को सनातन परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन और पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का संधिकाल माना गया है।\n\n• ऋतु और पंचांग चक्र: वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन के बीच यह महीना दोनों मौसमों का संधिकाल होता है। इसी कारण स्वास्थ्य और पाचन को ध्यान में रखकर कुछ खान-पान की चीजों पर पारंपरिक प्रतिबंध लगाए गए हैं।\n• पितरों के प्रति कृतज्ञता: अश्विन मास का पहला पखवाड़ा पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए समर्पित किया गया है। मान्यता है कि इस काल में किए गए तर्पण और दान से पितर तृप्त होते हैं।\n• शक्ति साधना की परंपरा: असत्य पर सत्य की विजय और प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए इस माह के शुक्ल पक्ष में मां दुर्गा की नौ रूपों में पूजा की जाती है। यह आध्यात्मिक शुद्धि और मानसिक शांति प्राप्त करने का माध्यम बनती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अश्विन महीने की शुरुआत और समाप्ति की तारीखें क्या हैं?\nअश्विन महीना 27 सितंबर से शुरू होकर 25 अक्टूबर को समाप्त होगा।\n\n2. पितृ पक्ष या श्राद्ध कब से कब तक चलेंगे?\nपितृ पक्ष का समय 27 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रहेगा।\n\n3. शरद नवरात्रि और घटस्थापना किस दिन होगी?\nशरद नवरात्रि और घटस्थापना का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026, रविवार को होगा।\n\n4. अश्विन मास में विजयदशमी पूजा किस तारीख को है?\nविजयदशमी अर्थात दशहरा पूजा 20 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।\n\n5. इस महीने में किन चीजों के सेवन से बचना चाहिए?\nअश्विन माह के दौरान दूध, करेला, मांस और मदिरा के सेवन से परहेज करने का नियम है।\n\n6. अश्विन के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में किसकी पूजा करनी चाहिए?\nकृष्ण पक्ष में पितरों की शांति के लिए श्राद्ध व तर्पण करना चाहिए, जबकि शुक्ल पक्ष में मां भगवती की उपासना और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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