पुरी में आज जगन्नाथ जी का नवयौवन स्वरूप, कल से रथ यात्रा की भव्य शुरुआत ओडिशा के पुरी में आज नवयौवन दर्शन के साथ महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भक्तों के सामने नए स्वरूप में आएंगे, कल से रथ यात्रा शुरू होकर 27 जुलाई को समाप्त होगी। ओडिशा के पुरी में आज यानी 15 जुलाई को श्रीजगन्नाथ मंदिर में नवयौवन (नबजौबन) दर्शन का बड़ा आयोजन हो रहा है। यह वही खास मौका है, जब महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा स्नान पूर्णिमा के बाद पहली बार अपने नवयौवन स्वरूप में भक्तों के सामने आते हैं। इस दिव्य दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंच चुके हैं। आज का दर्शन खत्म होते ही कल यानी 16 जुलाई से दुनिया भर में मशहूर रथ यात्रा शुरू हो जाएगी, जो 27 जुलाई सोमवार को संपन्न होगी। स्नान पूर्णिमा से लेकर नवयौवन दर्शन तक की कहानी ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को स्नान पूर्णिमा मनाई जाती है, जिस दिन महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 सोने के कलशों के पवित्र जल से महाभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इतने बड़े स्नान के बाद तीनों विग्रहों को बुखार यानी ज्वर चढ़ जाता है, जिसे अनसर कहा जाता है। इसके बाद करीब 15 दिनों तक भगवान मंदिर के एक अलग कक्ष में आराम करते हैं और इस दौरान आम श्रद्धालुओं के लिए उनके दर्शन बंद रहते हैं। इन 15 दिनों में दैतापति सेवक भगवान की खास औषधीय सेवा करते हैं, उन्हें विशेष भोग लगाया जाता है और पूरी देखभाल के साथ उपचार किया जाता है। जब भगवान पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं, तो उन्हें नए वस्त्र और नया श्रृंगार पहनाकर एक ताजा, युवा स्वरूप में सजाया जाता है। भक्तों को मिलने वाला यही पहला दर्शन नवयौवन या नबजौबन दर्शन कहलाता है, जिसे भगवान के दोबारा स्वस्थ होकर भक्तों के बीच लौटने के शुभ संकेत के तौर पर देखा जाता है। रथ यात्रा से ठीक पहले का सबसे अहम दर्शन नवयौवन दर्शन के अगले ही दिन, यानी कल 16 जुलाई को भगवान तीन विशाल और भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर के लिए निकल पड़ेंगे। यही वजह है कि रथ यात्रा से पहले होने वाला यह दर्शन बेहद दुर्लभ और शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा से दर्शन करने पर महाप्रभु जगन्नाथ अपनी खास कृपा बरसाते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। रथ यात्रा 2026 का पूरा कैलेंडर • 15 जुलाई 2026, बुधवार: नवयौवन (नबजौबन) दर्शन • 16 जुलाई 2026, गुरुवार: भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा की शुरुआत • 20 जुलाई 2026, सोमवार: हेरा पंचमी के मौके पर माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने पहुंचती हैं • 23 जुलाई 2026, गुरुवार: संध्या दर्शन, गुंडिचा मंदिर में जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का शाम का दर्शन • 24 जुलाई 2026, शुक्रवार: बहुदा यात्रा, गुंडिचा मंदिर में समय बिताने के बाद भगवान वापस रथ पर सवार होकर श्रीमंदिर लौटते हैं • 27 जुलाई 2026, सोमवार: रथ यात्रा महोत्सव का समापन और परंपरागत अनुष्ठानों की पूर्णाहुति दुनिया भर से क्यों उमड़ते हैं श्रद्धालु पुरी की रथ यात्रा को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। हर साल सिर्फ भारत से ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के कई देशों से लाखों श्रद्धालु इस महापर्व में शामिल होने पुरी पहुंचते हैं। भारी-भरकम लकड़ी के रथों को श्रद्धालु अपने हाथों से रस्सियों के सहारे खींचते हैं, और यह परंपरा सदियों पुरानी है। ऐसी मान्यता है कि भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य मिलना पुण्य का काम है और इससे जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। धार्मिक नजरिए से देखा जाए तो नवयौवन दर्शन और रथ यात्रा, दोनों ही महाप्रभु जगन्नाथ की भक्ति, समर्पण और जनकल्याण की भावना के प्रतीक माने जाते हैं। यही वजह है कि श्रद्धालु इन दोनों मौकों का इंतजार पूरे साल करते हैं। इसका आप पर असर • भारत भर में: देशभर से श्रद्धालु पुरी की रथ यात्रा में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए ट्रेन और बस यात्रा के दौरान भीड़ और टिकट बुकिंग से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है। • पुरी और ओडिशा में: 16 जुलाई से 27 जुलाई तक शहर में भारी भीड़ रहेगी, इसलिए स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को ट्रैफिक बदलाव, सुरक्षा जांच और ठहरने की व्यवस्था पहले से करनी होगी। सवाल-जवाब 1. नवयौवन दर्शन क्या होता है? यह वह दर्शन है जब स्नान पूर्णिमा के बाद करीब 15 दिनों के अनसर काल की समाप्ति पर महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा पहली बार नए, युवा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। 2. नवयौवन दर्शन कब हो रहा है? 15 जुलाई 2026, बुधवार को नवयौवन दर्शन का आयोजन हो रहा है। 3. रथ यात्रा कब शुरू होगी और कब खत्म होगी? रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 से शुरू होकर 27 जुलाई 2026, सोमवार को समाप्त होगी। 4. अनसर काल में भगवान के साथ क्या होता है? महाभिषेक के बाद भगवान को ज्वर चढ़ जाता है और वे करीब 15 दिन एक विशेष कक्ष में आराम करते हैं, जहां दैतापति सेवक उनकी औषधीय सेवा करते हैं। 5. हेरा पंचमी कब है और इसका क्या महत्व है? 20 जुलाई 2026 को हेरा पंचमी है, जिस दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने जाती हैं। 6. बहुदा यात्रा क्या है? 24 जुलाई 2026 को गुंडिचा मंदिर में समय बिताने के बाद भगवान वापस रथ पर सवार होकर श्रीमंदिर लौटते हैं, इसे बहुदा यात्रा कहा जाता है। https://trendkia.com/religion/puri-men-aja-jagannath-ji-ka-navayauvana-svarupa-kala-se-rath-yatra-ki-bhavya-shuruata-7772 TrendKia — Har trend, sabse pehle.