# पूर्वजों के आशीर्वाद और पितृदोष से राहत के लिए 12 राशियों के अनुसार करें ये विशेष दान

> साल 2026 में 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाले पितृपक्ष में अपनी राशि के मुताबिक दान और उपाय करके पितरों की कृपा पाई जा सकती है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/purvajon-ke-ashirvada-aura-pitridosha-se-rahata-ke-lie-12-rashiyon-ke-anusara-karen-ye-vishesha-dana-37951 · **Language:** Hindi
**Tags:** पितृपक्ष, श्राद्ध, तर्पण, राशि अनुसार उपाय, दान, पितृदोष, पीपल पूजा

भाद्रपद और आश्विन मास के संधिकाल में पड़ने वाले पितृपक्ष का समय पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति, उनकी प्रसन्नता और कुल की समृद्धि के लिए तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान संपन्न करते हैं। वर्ष 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हो रही है, जिसका समापन 10 अक्टूबर को होगा। इन पंद्रह दिनों के दौरान यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जन्म राशि के अनुकूल विशिष्ट वस्तुओं का दान करे और निर्धारित नियमों का पालन करे, तो पितृदोष से मुक्ति मिलने के साथ-साथ जीवन के कई कष्ट भी दूर हो सकते हैं।

## मेष और वृषभ राशि के लिए निर्धारित अनुष्ठान
मेष राशि के जातकों को पितृपक्ष के इस पावन पखवाड़े में लाल रंग के वस्त्रों का दान किसी योग्य व्यक्ति अथवा जरूरतमंद को करना चाहिए। इसके साथ ही, बहते हुए स्वच्छ जल में तांबे का सिक्का प्रवाहित करने का विधान बताया गया है, जिससे पूर्वजों की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।

वृषभ राशि के लोगों के लिए इस दौरान श्वेत यानी सफेद रंग की वस्तुओं का दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इसके अलावा, नियमित रूप से पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और परिवार में लंबे समय से चली आ रही मानसिक उलझनों से राहत मिलती है।

## मिथुन और कर्क राशि के जातकों के लिए फलदायी उपाय
मिथुन राशि से जुड़े लोगों को पितृपक्ष के दिनों में गोमाता की सेवा को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस दौरान गाय को हरा चारा खिलाना बेहद पुण्यकारी माना जाता है। साथ ही हरे रंग की उपयोगी वस्तुओं या वस्त्रों का दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और बुद्धि तथा कारोबार के क्षेत्र में आ रही अड़चनें समाप्त होती हैं।

कर्क राशि के जातकों को इस अवधि में देवों के देव महादेव की आराधना करते हुए शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध अर्पित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त जरूरतमंदों को अक्षत यानी चावल और दूध जैसी धवल वस्तुओं का दान करना शुभता में वृद्धि करता है, जिससे पितरों की तृप्ति होती है।

## सिंह और कन्या राशि के अनुसार कल्याणकारी दान
सिंह राशि के जातकों के लिए गेहूं, गुड़ और लाल रंग के परिधानों का दान करना बहुत शुभ फल देने वाला माना गया है। इसके साथ ही नित्य प्रातःकाल तांबे के पात्र या लोटे में शुद्ध जल भरकर भगवान सूर्य नारायण को अर्घ्य देने से पूर्वजों का आशीष प्राप्त होता है और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

कन्या राशि के लोगों को इस पखवाड़े में हरे रंग के कपड़ों का दान करना चाहिए। इसके साथ ही समाज के असहाय और निर्धन लोगों को आदरपूर्वक भोजन कराने का संकल्प लें। भूखों को अन्न तृप्ति कराने से पितृदोष के दुष्प्रभाव शांत होते हैं और परिवार में शांति बनी रहती है।

## तुला और वृश्चिक राशि के लिए पुण्य कर्म
तुला राशि के जातकों को सफेद वस्तुओं के अंतर्गत चीनी, चावल और श्वेत वस्त्रों का दान करना फलदायी रहता है। इसके साथ ही जरूरतमंदों अथवा धार्मिक कार्यों में आर्थिक सहायता या धन का दान करने से जीवन में संतुलन स्थापित होता है और पूर्वज प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का वरदान देते हैं।

वृश्चिक राशि के लोगों को पितृपक्ष की अवधि में आने वाले मंगलवार के दिन विशेष रूप से लाल मसूर की दाल और गुड़ का दान करना चाहिए। इसके अलावा सायंकाल के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करने से कुल की विपदाएं कटती हैं और पितरों का आशीष प्राप्त होता है।

## धनु और मकर राशि के सरल विधान
धनु राशि के जातकों के लिए पितृपक्ष में चने की पीली दाल का दान करना श्रेयस्कर माना गया है। इसके साथ ही किसी देवालय, मंदिर अथवा धार्मिक स्थल पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन का दान करने से आध्यात्मिक शांति मिलती है और पूर्वजों के प्रति कर्तव्य की पूर्ति होती है।

मकर राशि के जातकों को इस समय काले तिल का दान अवश्य करना चाहिए। इसके साथ ही पीपल के पेड़ में नित्य जल चढ़ाना और उसी वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत मंगलकारी माना गया है। यह साधना पितृ ऋण से मुक्ति दिलाने में सहायक सिद्ध होती है।

## कुंभ और मीन राशि के लिए सुखद बदलाव के मार्ग
कुंभ राशि के व्यक्तियों को पितृपक्ष के दौरान साबुत उड़द की दाल और लोहे से बनी उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए। मान्यता है कि यह दान कर्मों के अवरोध हटाता है और पितरों की कृपा से जीवन की कठिन परिस्थितियों को अनुकूल बनाता है।

मीन राशि के जातकों को इस अवधि में बेसन के बने लड्डू और चने की दाल का दान करना लाभकारी परिणाम प्रदान करता है। इन पदार्थों के दान से पितृ तृप्त होकर घर-परिवार को ऐश्वर्य, आरोग्यता और निरंतर प्रगति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

## इसका आप पर असर
पितृपक्ष के दौरान राशि के अनुसार किए गए दान और धार्मिक कार्यों से पारिवारिक सुख-शांति और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

- **तिथियों की तैयारी:** साल 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से आरंभ होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि के अनुसार तर्पण और श्राद्ध की आवश्यक सामग्री पहले से जुटा सकते हैं।
- **दान की योजना:** प्रत्येक जातक अपनी राशि के अनुसार वस्त्र, अनाज, दाल और तिल जैसी वस्तुओं का प्रबंध कर सकता है। समय रहते जरूरतमंदों या धार्मिक स्थलों का चयन करके दान देने से पूजा का पूर्ण फल मिलता है।
- **दैनिक दिनचर्या:** इन पंद्रह दिनों में पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाने या दीप जलाने जैसे साधारण नियम अपनाए जा सकते हैं। इस अभ्यास से मन शांत रहता है और पारिवारिक वातावरण में सकारात्मकता आती है।
- **आर्थिक बजट:** दान के लिए आवश्यक सामग्री और धन का पूर्व निर्धारण करके अनावश्यक खर्चों से बचा जा सकता है। अपनी सामर्थ्य अनुसार किया गया थोड़ा सा दान भी संतोषजनक परिणाम देता है।

## ऐसा क्यों हुआ
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय पूर्वजों के ऋण को चुकाने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रमुख काल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में किए गए विशिष्ट दान से पितृ तृप्त होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

- **पितरों की तृप्ति का विधान:** शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष के दौरान पूर्वज सूक्ष्म रूप में अपने वंशजों के निकट आते हैं। उनके निमित्त श्रद्धा से किया गया अन्न, वस्त्र और जल का अर्पण उनकी आत्मा को शांति प्रदान करता है।
- **ज्योतिषीय संतुलन:** कुंडली में मौजूद पितृदोष अथवा ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों को शांत करने के लिए राशि के अनुसार दान की व्यवस्था बनाई गई है। निर्धारित धातु, अनाज और रंगों के उपयोग से ग्रहीय ऊर्जा संतुलित होती है।
- **प्रकृति और जीवों की सेवा:** पीपल के वृक्ष की सेवा, गाय को चारा खिलाना और असहायों को अन्न देना प्रकृति के साथ समन्वय स्थापित करता है। यह परंपरा सदियों से पारिवारिक समृद्धि और नैतिक उत्तरदायित्व के निर्वहन के रूप में चली आ रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. साल 2026 में पितृपक्ष कब से कब तक रहेगा?
साल 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा।

### 2. मेष राशि के जातकों को पितृपक्ष में क्या दान करना चाहिए?
मेष राशि के लोगों को लाल वस्त्रों का दान करना चाहिए और बहते जल में तांबे का सिक्का प्रवाहित करना चाहिए।

### 3. मिथुन राशि वालों के लिए कौन सा उपाय बताया गया है?
मिथुन राशि के लोगों को गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए और हरे रंग की वस्तुओं का दान करना चाहिए।

### 4. मकर राशि के जातकों को किस वस्तु का दान करना चाहिए?
मकर राशि वालों को काले तिल का दान करना चाहिए और पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।

### 5. मीन राशि के लोगों को पितृपक्ष में क्या अर्पित करना चाहिए?
मीन राशि के जातकों को चने की दाल और बेसन के लड्डुओं का दान करने की सलाह दी गई है।

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