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  "title": "राजस्थान के पाली में अनोखी भक्ति, 100 से अधिक बच्चों ने 12 किमी पैदल चलकर गंगवेरी से खारेश्वर महादेव का किया जलाभिषेक",
  "summary": "पाली जिले के फालना में सावन महीने की कावड़ यात्रा के दौरान 100 से अधिक छोटे बच्चों ने भीषण गर्मी के बीच 12 किलोमीटर लंबी दूरी तय कर शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।",
  "content": "सावन के पावन महीने में राजस्थान के पाली जिले में स्थित फालना कस्बे की सड़कों पर भक्ति और आस्था का एक अनूठा दृश्य देखने को मिला। इस क्षेत्र में आयोजित विशाल कावड़ यात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, लेकिन पूरी यात्रा के दौरान मुख्य आकर्षण 100 से अधिक नन्हे बालक-बालिकाएं रहे। भीषण गर्मी, कड़ी धूप और ऊबड़-खाबड़ रास्तों की परवाह किए बिना इन मासूम कांवड़ियों ने 12 किलोमीटर की कठिन दूरी पैदल तय की। हाथ में कावड़ थामे और मुख पर भोलेनाथ के नाम का जप करते हुए बच्चों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और अपनी अटूट भक्ति से सभी को अचंभित कर दिया।\n\nगंगवेरी मंदिर से शुरू होकर प्रमुख मार्गों से गुजरी यात्रा\nइस पावन कावड़ यात्रा का शुभारंभ फालना के प्रसिद्ध गंगवेरी महादेव मंदिर से हुआ। यहां से कांवड़ में पवित्र जल भरकर कांवड़ियों का समूह अनुशासित रूप से आगे बढ़ा। यात्रा मुख्य मार्ग से होती हुई टोल नाका, निंबेश्वर महादेव मंदिर, नाथ जी की धूनी और सांडेराव मुख्य मार्ग तक पहुंची। इसके पश्चात कांवड़ियों का यह जत्था फालना पुलिस थाना, बैंक ऑफ बड़ौदा और काली मूर्ति चौक से होकर गुजरा। अंत में सभी श्रद्धालु खारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे, जहां वैदिक रीति-रिवाज से शिवलिंग पर पवित्र जल, बेलपत्र और ताजे फूल चढ़ाए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से समूचे फालना क्षेत्र और देश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।\n\nभगवामय हुआ शहर, छतों और जेसीबी से हुई पुष्प वर्षा\nकावड़ यात्रा को लेकर फालना शहर में अद्भुत धार्मिक माहौल देखने को मिला। पूरे शहर के प्रमुख रास्तों और चौराहों को आकर्षक बैनरों, होर्डिंग्स और भगवा ध्वजों से सजाया गया था। यात्रा के रास्ते में अनेक स्थानों पर स्थानीय भामाशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ठंडे जल, शरबत और फलाहार की व्यापक व्यवस्था की गई थी। जैसे ही नन्हे कांवड़ियों का समूह शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरा, ग्रामीणों और शहरवासियों ने अपने घरों की छतों पर खड़े होकर उन पर पुष्प वर्षा की। कई स्थानों पर जेसीबी मशीनों को खड़ा करके उनके जरिए कांवड़ियों पर फूलों की बौछार की गई, जिसने इस आयोजन को बेहद भव्य और यादगार बना दिया।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह घटना भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक परंपराओं और नई पीढ़ी में धार्मिक आस्था के मजबूत जुड़ाव को रेखांकित करती है।\n\nपाली, राजस्थान में: फालना क्षेत्र के नागरिकों और भामाशाहों की पहल ने सामाजिक एकजुटता और श्रद्धालुओं की निस्वार्थ सेवा की मिसाल पेश की है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कावड़ यात्रा कहां से शुरू होकर कहां खत्म हुई?\nयह यात्रा फालना स्थित गंगवेरी महादेव मंदिर से शुरू होकर खारेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंची।\n\n2. कावड़ यात्रा की कुल दूरी कितनी थी?\nइस पदयात्रा की कुल दूरी 12 किलोमीटर थी।\n\n3. इस कावड़ यात्रा में कितने बच्चों ने भाग लिया?\nइस यात्रा में 100 से अधिक नन्हे बालक-बालिकाओं ने भाग लिया।\n\n4. कावड़ यात्रा का स्वागत किस अनोखे तरीके से किया गया?\nग्रामीणों ने छतों से पुष्प वर्षा की और कई स्थानों पर जेसीबी मशीनों से कांवड़ियों पर फूल बरसाए गए।\n\n5. कांवड़ियों ने मंदिर पहुंचकर क्या अनुष्ठान किया?\nखारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और फूल चढ़ाकर जलाभिषेक किया।\n\nप्रेरणा और सबक\nसाहस और संकल्प: भीषण गर्मी और 12 किमी की दूरी के बावजूद नन्हे बच्चों का संकल्प बताता है कि मजबूत इरादे से हर मुश्किल राह आसान हो जाती है।\n\n• सामूहिक सहयोग: ग्रामीणों और भामाशाहों द्वारा पुष्प वर्षा तथा जलपान की व्यवस्था दर्शाती है कि समाज मिलकर किसी भी धार्मिक आयोजन को यादगार बना सकता है।\n• संस्कृति का सम्मान: छोटी उम्र में भी अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ना बच्चों में अनुशासन और आस्था विकसित करता है।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-08-23",
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