# भाद्रपद गणेशोत्सव 2026 में 9 साल बाद बन रहा दुर्लभ योग, 10 के बजाय 12 दिनों तक विराजेंगे गणपति बप्पा

> वर्ष 2026 में गणेशोत्सव का पर्व 10 दिनों के बजाय पूरे 12 दिनों तक चलेगा। चंद्र पंचांग की तिथियों में वृद्धि के कारण यह दुर्लभ महासंयोग 9 वर्षों के बाद बन रहा है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/rare-12-day-ganeshotsav-in-2026-after-9-years-as-calendar-alignment-extends-festivities-31511 · **Language:** Hindi
**Tags:** गणेशोत्सव 2026, गणेश चतुर्थी 2026, अनंत चतुर्दशी 2026, गणपति विसर्जन, पंचांग 2026, शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में भगवान गणेश के भक्तों को अपने आराध्य की उपासना के लिए दो अतिरिक्त दिनों का विशेष अवसर मिलने जा रहा है। सामान्यतः भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला गणेशोत्सव 10 दिनों की अवधि का होता है। हालांकि, वर्ष 2026 में पंचांगीय तिथि गणना और ग्रहों-नक्षत्रों की चाल के कारण यह उत्सव पूरे 12 दिनों तक चलेगा। पंचांग ज्योतिष के अनुसार ऐसा दुर्लभ योग 9 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बन रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2017 में भक्तों को 12 दिनों का गणेशोत्सव मनाने का सौभाग्य मिला था।

## गणेश स्थापना और पूजा के शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 14 सितंबर को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 15 सितंबर को सुबह 07 बजकर 14 मिनट तक बनी रहेगी। शास्त्रोक्त नियम के अनुसार, जिस तिथि में सूर्योदय होता है, उसी उदया तिथि को पर्व के आयोजन के लिए प्रमुखता दी जाती है। इस आधार पर गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। उसी दिन श्रद्धालु अपने घरों, सार्वजनिक पंडालों और मंदिरों में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा की विधि-विधान से स्थापना करेंगे।

गणपति स्थापना और पूजा-अर्चना के लिए 14 सितंबर को कई शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। मूर्ति स्थापना के लिए सबसे उत्तम माना जाने वाला अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 09 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, गणेश पूजन का सामान्य शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 01 बजकर 48 मिनट तक उपलब्ध रहेगा। संध्याकालीन आरती और पूजन के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए शाम को गोधूलि मुहूर्त 06 बजकर 42 मिनट से रात 07 बजकर 05 मिनट तक रहेगा।

## क्यों बढ़ गई गणेशोत्सव की अवधि?
वैदिक पंचांग की व्यवस्था पूरी तरह से चंद्रमा की गति पर आधारित होती है। सूर्य की तुलना में चंद्रमा की गति में निरंतर परिवर्तन होता रहता है, जिसके कारण तिथियों का समय निश्चित 24 घंटे का न होकर कभी घटता तो कभी बढ़ता है। जब कोई तिथि सूर्योदय के समय शुरू होकर अगले सूर्योदय के बाद भी कुछ समय तक बनी रहती है, तो उसे वृद्धि तिथि माना जाता है।

वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष के दौरान तिथियों का गणित इस प्रकार बैठ रहा है कि गणेश चतुर्थी से लेकर विसर्जन की तिथि अनंत चतुर्दशी के बीच पूरे 12 कैलेंडर दिन आ रहे हैं। इसी तिथि वृद्धि के कारण उत्सव की कुल अवधि में दो दिनों का विस्तार हो गया है। पंचांग के इस विशिष्ट समन्वय के कारण ही यह पर्व 10 दिनों की बजाय 12 दिनों का हो गया है।

## 25 सितंबर को होगा बप्पा का विसर्जन
14 सितंबर 2026 को प्रतिमा स्थापना के साथ शुरू होने वाले इस पावन महोत्सव का समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। 14 सितंबर से 25 सितंबर तक यदि स्थापना और विसर्जन दोनों दिवसों को शामिल करके गणना की जाए, तो कुल मिलाकर 12 कैलेंडर दिन बनते हैं। इस दौरान श्रद्धालु पूरे 12 दिनों तक सुबह-शाम आरती, मंत्रोच्चार, अथर्वशीर्ष पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर सकेंगे।

सनातन परंपरा में भगवान गणेश को समस्त विघ्नों का नाश करने वाला और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला देवता माना जाता है। मान्यता है कि गणेशोत्सव के दौरान बप्पा की निष्ठापूर्वक सेवा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। 2017 के बाद 2026 में पड़ रहे इस 12 दिवसीय महासंयोग को लेकर श्रद्धालुओं और उत्सव समितियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

## इसका आप पर असर
गणेशोत्सव 2026 के 12 दिनों तक चलने से श्रद्धालुओं, पूजा समितियों और स्थानीय कारोबारियों पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

- **भारत भर में श्रद्धालुओं के लिए:** दो अतिरिक्त दिन मिलने से भक्तों को पूजा-अर्चना, दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अधिक समय मिलेगा। भीड़भाड़ के बीच दर्शन करना आसान होगा।
- **पंडाल और उत्सव समितियों के लिए:** सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भंडारे और सामुदायिक गतिविधियों के आयोजन के लिए समितियों को दो दिन की अतिरिक्त समय-सीमा प्राप्त होगी।
- **स्थानीय व्यापार पर:** फूल, मिठाई, पूजा सामग्री और सजावटी वस्तुओं की बिक्री 10 के बजाय 12 दिनों तक जारी रहने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होगी।
- **यातायात और सुरक्षा व्यवस्था:** पुलिस और प्रशासन को 12 दिनों के अनुसार सुरक्षा और ट्रैफिक रूट डायवर्जन की योजना दो दिन अतिरिक्त बनानी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
वर्ष 2026 में गणेशोत्सव 10 के बजाय 12 दिनों का होना पूरी तरह से चंद्र पंचांग और उदया तिथि की खगोलीय गणना पर आधारित है।

- **चंद्रमा की गति में परिवर्तन:** हिंदू पंचांग सूर्य के बजाय चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जिससे तिथियों की अवधि 24 घंटे से कम या अधिक हो जाती है।
- **तिथि वृद्धि का प्रभाव:** जब कोई तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान रहकर अगले दिन भी जारी रहती है, तो वह पंचांग में दो कैलेंडर दिनों तक विस्तारित हो जाती है।
- **उदया तिथि का नियम:** शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय काल की तिथि को ही पर्व का दिन माना जाता है, जिससे 14 सितंबर को स्थापना का दिन निश्चित हुआ।
- **9 साल का चक्र:** इस प्रकार की पंचांगीय गणना का संयोग हर वर्ष नहीं बनता, अंतिम बार ऐसा 2017 में हुआ था और अब 9 साल बाद 2026 में पुनरावृत्ति हो रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. वर्ष 2026 में गणेशोत्सव कितने दिनों का होगा?
वर्ष 2026 में गणेशोत्सव सामान्य 10 दिनों की तुलना में पूरे 12 दिनों का होगा।

### 2. गणेश चतुर्थी 2026 में किस तारीख को है?
गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026, दिन सोमवार को मनाया जाएगा।

### 3. गणेश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त क्या है?
14 सितंबर 2026 को मूर्ति स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:09 से 12:58 तक रहेगा।

### 4. गणपति विसर्जन की तिथि क्या है?
गणपति विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन यानी 25 सितंबर 2026 को होगा।

### 5. गणेशोत्सव 12 दिनों का क्यों हो रहा है?
चंद्र पंचांग की तिथि गणना और वृद्धि तिथि के कारण गणेश चतुर्थी से विसर्जन तक 12 कैलेंडर दिन बन रहे हैं।

### 6. इससे पहले 12 दिनों का गणेशोत्सव कब पड़ा था?
इससे पहले 12 दिनों का गणेशोत्सव 9 साल पहले यानी वर्ष 2017 में पड़ा था।

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