{
  "type": "article",
  "title": "सहारनपुर में हजार साल पुराना जाहरवीर गोगा मेला, जब अंग्रेजी कलेक्टर को झुकना पड़ा था",
  "summary": "सहारनपुर में लगने वाले पश्चिम भारत के सबसे बड़े जाहरवीर गोगा मेले का इतिहास एक सदी से भी पुराना है। साल 1807 में एक अंग्रेजी कलेक्टर ने इस मेले को बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन कथित चमत्कार के बाद उसे अपना फैसला बदलना पड़ा था।",
  "content": "सहारनपुर में पश्चिम भारत का सबसे बड़ा मेला आयोजित होने जा रहा है, जिसका इतिहास एक हजार साल से भी अधिक पुराना है। यह ऐतिहासिक आयोजन सदियों से एक दिन के लिए आयोजित किया जाता रहा है, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान इसके स्वरूप में बदलाव आया और इसे तीन दिन का कर दिया गया। इस बदलाव के पीछे एक ब्रिटिश कलेक्टर का हाथ था, जिसने शुरुआत में इस परंपरा पर ऐतराज जताया था। अंग्रेजी कलेक्टर ने हिंदुओं की इस गहरी आस्था और बाबा के मेले को लेकर नाराजगी जाहिर की थी और इस पर पूरी तरह रोक लगाने का फरमान जारी किया था। हालांकि, इसके बाद जो रहस्यमयी चमत्कार सामने आया, उसने उस ब्रिटिश अधिकारी को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।\n\n \n\nसाल 1807 का वह आदेश और मेले का इतिहास\n इतिहास के पन्नों के अनुसार, वर्ष 1807 में जाहरवीर गोगा मेले को एक नाटक करार देते हुए अंग्रेज कलेक्टर ने इसे बंद कराने का सख्त हुक्म दिया था। लेकिन जब वह कलेक्टर अपने आवास पर लौटा और उसने अपने भोजन, बिस्तर तथा पूरे घर में अनगिनत सांपों को देखा, तब उसे अपनी भूल का अहसास हुआ। उसे समझ आ गया कि इस धार्मिक आयोजन को रुकवाकर उसने बहुत बड़ी भूल कर दी है। इसके बाद वह अधिकारी तुरंत बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज के म्हाड़ी स्थल पर पहुंचा और वहां माथा टेककर अपनी गलती स्वीकार की। उसी घटना के बाद कलेक्टर ने इस मेले को एक दिन की बजाय तीन दिन तक आयोजित करने का आदेश पारित किया, और तब से लेकर आज तक यह मेला लगातार तीन दिनों तक ही भरता चला आ रहा है।\n\n \n\nअनिल प्रताप सैनी ने साझा की मेले से जुड़ी मान्यता\n गोगा म्हाड़ी सुधार सभा के अध्यक्ष अनिल प्रताप सैनी ने इस ऐतिहासिक परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों को हमारी प्राचीन संस्कृति और रीति-रिवाजों की पूरी जानकारी नहीं थी। हमारे यहां अलग-अलग तरीकों से पूजा-पाठ की परंपरा रही है, चाहे वह मंदिरों में हो, हमारे खेतों की पूजा हो, या फिर अपने देव-पितरों की आराधना हो। इसी तरह यहां 26 छड़ियों की भी पूजा की जाती है। वर्ष 1807 में जब एक ब्रिटिश डीएम यहां आए और उन्होंने इस मेले को देखा, तो उन्होंने सवाल उठाया कि यह सब क्या चल रहा है और इसे एक नाटक बताकर बंद करने का हुक्म दे दिया। उस दौर में अंग्रेजी कलेक्टर के आदेश पर इस मेले पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन इसके तुरंत बाद ही बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज का चमत्कार दिखाई देने लगा।\n\n \n\nचमत्कार के बाद बदला अधिकारी का रवैया\n जब वह अंग्रेजी डीएम भोजन करने के लिए बैठे, तो उनकी थाली में सांप दिखाई दिए। जब वे अपने बिस्तर पर लेटने गए, तो वहां भी सांपों का डेरा था। जब उन्होंने छत की ओर देखा, तब उन्हें हर तरफ सांप ही सांप नजर आने लगे। इन घटनाओं के बाद उन्हें अपनी गलती का गंभीर अहसास हुआ कि उन्होंने मेले को बंद कराकर भारी भूल की है। इसके बाद उन्होंने तुरंत मेले वाले स्थल पर पहुंचकर नतमस्तक होकर अपनी गलती की माफी मांगी। पहले यह आयोजन केवल एक दिन का होता था, लेकिन उसी ब्रिटिश डीएम ने इसे तीन दिन तक आयोजित करने का निर्देश दिया। वर्तमान समय में इस मेले की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां देश-विदेश से 10 से 15 लाख श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयोजन स्थानीय धार्मिक परंपराओं और पर्यटन को बढ़ावा देता है।\n\n• भारत में: देश भर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मेलों से जुड़ने का अवसर मिलता है।\n\n• सहारनपुर में: स्थानीय नागरिकों और आने वाले 10 से 15 लाख श्रद्धालुओं को बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक व धार्मिक उत्सव का अनुभव होता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटना ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान स्थानीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं के बीच टकराव के कारण सामने आई थी।\n\n• सांस्कृतिक अज्ञानता: औपनिवेशिक अधिकारियों को भारतीय लोक परंपराओं और स्थानीय देवताओं की मान्यताओं की जानकारी नहीं थी।\n\n• प्रशासनिक हस्तक्षेप: ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा स्थानीय रीति-रिवाजों को समझे बिना उन्हें रोकने का प्रयास किया गया था।\n\n• मान्यता और चमत्कार: लोक कथाओं और जनश्रुतियों के अनुसार इस घटना को एक अलौकिक चमत्कार से जोड़कर देखा जाता है जिसने प्रशासनिक निर्णय को बदल दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जाहरवीर गोगा मेला कहाँ आयोजित होता है?\nयह मेला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में आयोजित किया जाता है।\n\n2. इस मेले का इतिहास कितने साल पुराना है?\nइस मेले का इतिहास एक हजार साल से भी अधिक पुराना है।\n\n3. किस वर्ष अंग्रेजी कलेक्टर ने मेले को बंद करने का आदेश दिया था?\nवर्ष 1807 में एक अंग्रेज कलेक्टर ने इस मेले को बंद करने का आदेश दिया था।\n\n4. अंग्रेजी कलेक्टर ने मेले को कितने दिन का करने का आदेश दिया?\nचमत्कार के बाद कलेक्टर ने इस मेले को एक दिन से बढ़ाकर तीन दिन का करने का आदेश दिया था।\n\n5. इस मेले में कितने श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं?\nइस मेले में लगभग 10 से 15 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/religion/saharanapura-men-hajara-sala-purana-jaharveer-goga-mela-jaba-angreji-kalektara-ko-jhukana-para-tha-32842",
  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-09-17",
  "tags": [
    "सहारनपुर मेला",
    "जaharveer गोगा",
    "गोगा म्हाड़ी",
    "उत्तर प्रदेश इतिहास",
    "धार्मिक मेले"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}