सावन में आजमगढ़ के प्राचीन शिवालयों का महत्व, जानिए भंवरनाथ से लेकर भैरव बाबा मंदिर तक की अनूठी गाथा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में स्थित बाबा भंवरनाथ, रामघाट और महाराजगंज के पौराणिक शिव मंदिरों में सावन माह के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा है। सावन के पवित्र महीने की शुरुआत होते ही हर तरफ बम-बम भोले और हर-हर महादेव का उद्घोष गूंजने लगता है। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में भी भगवान शिव के अनेक प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जिनकी अपनी अनूठी पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताएं हैं। इन दिव्य स्थलों पर पूरे सावन माह में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है और कांवड़ यात्रा के साथ पूजन-अर्चन की विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं। बाबा भंवरनाथ मंदिर का 500 साल पुराना इतिहास आजमगढ़ शहर में स्थित बाबा भंवरनाथ का मंदिर जिले के सबसे प्रमुख और प्राचीन धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। इस ऐतिहासिक मंदिर का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना माना जाता है। मंदिर के पुजारी गणेश गिरी के अनुसार, प्राचीन काल में जब इस स्थल पर जमीन की खुदाई की जा रही थी, तब अचानक भूगर्भ से भंवरों का एक विशाल झुंड बाहर निकला। भंवरों के प्रकट होने के तुरंत बाद उसी स्थान से एक स्वयंभू शिवलिंग भी प्रकट हुआ। चूंकि शिवलिंग का प्रकटीकरण भंवरों के समूह के साथ हुआ था, इसलिए इस पावन धाम का नाम बाबा भंवरनाथ प्रसिद्ध हो गया। सावन के महीने में यहां भक्तों का विशाल जनसैलाब उमड़ता है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां शीश नवाता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान भोलेनाथ का महाकालेश्वर के रूप में भव्य श्रृंगार किया जाता है। इसके अलावा महाशिवरात्रि पर भी लाखों लोग परिवार सहित यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रामघाट स्थित विशालतम शिवलिंग और उपेक्षा की स्थिति आजमगढ़ शहर के रामघाट पर स्थित शिव मंदिर का संबंध मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के काल से जोड़ा जाता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, अपने 14 वर्षों के वन गमन के दौरान प्रभु श्री राम ने इस स्थान पर रात्रि विश्राम किया था। माना जाता है कि अपने प्रवास के दौरान उन्होंने स्वयं यहां एक वृहद आकार के शिवलिंग की स्थापना की थी। रामघाट के इस प्राचीन मंदिर में विराजमान शिवलिंग आकार की दृष्टि से आजमगढ़ और आसपास के सभी क्षेत्रों में मौजूद शिवलिंगों में सबसे बड़ा है। हालांकि, इतने महान धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के बावजूद, उचित संरक्षण और देखरेख के अभाव में यह मंदिर धीरे-धीरे जर्जर स्थिति में पहुंच रहा है। समय के साथ देखभाल न होने के कारण यह प्राचीन धरोहर खंडहर में तब्दील होने की कगार पर है। महाराजगंज का भैरव बाबा मंदिर और पटल सरोवर का महत्व आजमगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर महाराजगंज कस्बे में स्थित भैरव बाबा का मंदिर क्षेत्र के सबसे पवित्र धर्मस्थलों में शामिल है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, राजा दक्ष प्रजापति के यज्ञ विध्वंस के उपरांत भगवान शिव के अवतार काल भैरव यहां दक्षिणमुखी स्वरूप में स्थापित हुए थे। इस पावन स्थल को भगवान श्री राम की प्रथम यात्रा का तीसरा पड़ाव भी स्वीकार किया जाता है। मंदिर परिसर में एक अत्यंत प्राचीन हवन कुंड निर्मित है, जहां अनुष्ठान संपन्न होते हैं। इसके साथ ही मंदिर के समीप पटल सरोवर नामक एक पवित्र जलाशय स्थित है। ऐसी दृढ़ आस्था है कि पटल सरोवर के जल में स्नान करने से श्रद्धालुओं को विभिन्न प्रकार के चर्म रोगों से मुक्ति मिल जाती है। सावन के पूरे महीने में इस परिसर में दूर-दराज से आने वाले दर्शनार्थियों की भारी भीड़ जमा होती है। इसका आप पर असर • भारत में: सावन माह के दौरान प्राचीन शिव मंदिरों में दर्शन और कांवड़ यात्रा की व्यवस्था से संबंधित धार्मिक नियमों की जानकारी प्राप्त होती है। • आजमगढ़ में: स्थानीय श्रद्धालुओं को भंवरनाथ, रामघाट और महाराजगंज के प्राचीन मंदिरों के महात्म्य, पूजन परंपराओं और पटल सरोवर के बारे में विशेष विवरण मिलता है। सवाल-जवाब 1. बाबा भंवरनाथ मंदिर का नाम भंवरनाथ क्यों पड़ा? मंदिर के पुजारी के अनुसार, स्थल की खुदाई के दौरान भंवरों का विशाल झुंड निकला था और उसी के साथ स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ था, जिससे नाम भंवरनाथ पड़ा। 2. आजमगढ़ के रामघाट स्थित शिव मंदिर का पौराणिक महत्व क्या है? मान्यताओं के अनुसार, वन गमन के दौरान प्रभु श्री राम ने यहां रात्रि विश्राम किया था और स्वयं विशाल शिवलिंग की स्थापना की थी। 3. महाराजगंज में स्थित भैरव बाबा मंदिर की क्या खासियत है? यहां राजा दक्ष के यज्ञ विध्वंस के बाद काल भैरव दक्षिणमुखी रूप में स्थापित हुए थे। इसे श्री राम की पहली यात्रा का तीसरा पड़ाव भी माना जाता है। 4. पटल सरोवर के जल से कौन सी मान्यता जुड़ी है? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाराजगंज स्थित पटल सरोवर के पवित्र जल में स्नान करने से श्रद्धालुओं को चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है। 5. बाबा भंवरनाथ मंदिर में सावन के सोमवार को क्या विशेष पूजा होती है? सावन के प्रत्येक सोमवार को बाबा भंवरनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ का महाकालेश्वर के रूप में विशेष श्रृंगार और पूजन किया जाता है। https://trendkia.com/religion/savana-men-azamgarh-ke-prachina-shivalayon-ka-mahatva-janie-bhanwarnath-se-lekara-bhairav-baba-mndira-taka-ki-anuthi-gatha-12650 TrendKia — Har trend, sabse pehle.