# सावन के पहले सोमवार पर महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों का सैलाब, जानिए दर्शन के नए समय और सुरक्षा इंतजाम

> सावन के प्रथम सोमवार पर उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में रात से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भस्म आरती के साथ-साथ सुगम दर्शन के लिए विशेष रूट, नए समय चक्र और कांवड़ यात्रियों के लिए अलग नियम लागू किए गए हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-08-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/sawan-ke-pahale-somavara-para-mahakaleshwar-temple-men-bhakton-ka-sailaba-janie-darshana-ke-nae-samaya-aura-suraksha-intajama-13218 · **Language:** Hindi
**Tags:** उज्जैन, महाकालेश्वर मंदिर, सावन सोमवार, भस्म आरती, कांवड़ यात्रा, महाकाल दर्शन, मध्य प्रदेश

श्रावण मास के पहले सोमवार को उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का विशाल सैलाब देखने को मिला। रविवार की रात से ही श्रद्धालुओं की लंबी पंक्तियां लगनी शुरू हो गई थीं। देर रात ढाई बजे शुरू हुई भस्म आरती में भारी संख्या में भक्त शामिल हुए। मंदिर परिसर में लगातार हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और सामान्य दर्शनार्थियों के साथ-साथ चलित दर्शन व्यवस्था के माध्यम से भी हजारों लोगों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए।

## श्रावण और भाद्रपद मास के लिए दर्शन का नया समय
श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने 30 जुलाई से दर्शन और आरती के समय में महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए हैं। नए नियम के अनुसार, प्रतिदिन मंदिर के पट अब सुबह चार बजे के बजाय तीन बजे खोले जा रहे हैं। भस्म आरती सुबह पांच बजे तक संपन्न कर ली जाती है। सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष व्यवस्था के तहत भस्म आरती रात ढाई बजे से शुरू होकर सुबह साढ़े चार बजे तक चलती है। समय सारणी में किया गया यह बदलाव 7 सितंबर तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद 8 सितंबर से पुरानी व्यवस्था पुनः लागू कर दी जाएगी।

## आम श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था
भीड़ के सुचारू प्रबंधन के लिए मंदिर प्रशासन ने प्रवेश और निकास के विशेष मार्ग तैयार किए हैं। आम श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संग्रहालय मार्ग के जरिए प्रवेश दिया जा रहा है, जबकि निकास की व्यवस्था बड़े गणेश मंदिर के निकट टनल के माध्यम से की गई है। इसके अलावा, शीघ्र दर्शन का लाभ उठाने वाले श्रद्धालुओं के लिए द्वार नंबर एक निर्धारित किया गया है। सुव्यवस्थित इंतजामों के कारण आम भक्त लगभग 40 मिनट के भीतर दर्शन कर पा रहे हैं, जबकि शीघ्र दर्शन मार्ग से पहुंचने वाले लोगों को केवल 10 से 15 मिनट का समय लग रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे रास्ते में पेयजल, टिकट काउंटर और जूता स्टैंड जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

## कांवड़ यात्रियों के लिए नियम और जल अर्पण का समय
श्रावण और भाद्रपद मास के दौरान उज्जैन आने वाले कांवड़ यात्रियों के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई गई है। कांवड़ दलों को द्वार नंबर एक तथा हरसिद्धि चौराहा स्थित विशेष दर्शन मार्ग से मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। कांवड़ियों के लिए जल अर्पण की सुविधा सप्ताह में चार दिन, यानी मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को तय की गई है। अत्यधिक भीड़ की संभावना के कारण शनिवार, रविवार और सोमवार को कांवड़ जत्थों को जल चढ़ाने की अनुमति नहीं रहेगी। इसके साथ ही, उज्जैन के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर कांवड़ यात्रियों के लिए भोजन और प्रसादी के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

## परिसर और आसपास बनाए गए जूता स्टैंड की सूची
मंदिर परिसर और उसके आसपास श्रद्धालुओं के जूते-चप्पल सुरक्षित रखने के लिए कुल नौ प्रमुख स्थानों पर जूता स्टैंड की व्यवस्था की गई है

- त्रिवेणी संग्रहालय के बाहर
- श्री महाकाल महालोक प्लाजा के समीप
- विक्रम टीला के पास
- द्वार नंबर 01 के पास
- हरसिद्धि चौराहा के सामने
- मानसरोवर भवन के सामने
- नीलकंठ प्रवेश द्वार पर
- श्री महाकालेश्वर अन्नक्षेत्र के निकट खाली स्थान में
- कार्तिक मेला ग्राउंड पार्किंग क्षेत्र में

## इसका आप पर असर
**देशभर के दर्शनार्थियों के लिए:** सावन में महाकाल दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालु ध्यान रखें कि सामान्य दर्शन में केवल 40 मिनट लग रहे हैं और भस्म आरती का समय सुबह 3 बजे का कर दिया गया है।

**उज्जैन एवं स्थानीय निवासियों के लिए:** वीकेंड और सोमवार को कांवड़ जत्थों का जल अर्पण स्थगित रहने के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक सुचारू रहेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. सावन सोमवार पर महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का समय क्या है?
सावन के प्रत्येक सोमवार को भस्म आरती देर रात 2:30 बजे से शुरू होकर सुबह 4:30 बजे तक आयोजित की जाती है।

### 2. सावन के दौरान आम श्रद्धालुओं को दर्शन में कितना समय लग रहा है?
सुव्यवस्थित रूट के कारण आम श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन में लगभग 40 मिनट और शीघ्र दर्शन पास धारकों को 10 से 15 मिनट लग रहे हैं।

### 3. कांवड़ यात्री किन दिनों में जल अर्पण कर सकते हैं?
कांवड़ यात्री सप्ताह में चार दिन मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को ही जल अर्पण कर सकते हैं।

### 4. मंदिर का नया समय कब तक लागू रहेगा?
मंदिर का यह परिवर्तित समय चक्र 7 सितंबर तक प्रभावी रहेगा और 8 सितंबर से पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी।

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