सावन के पवित्र महीने में दही और कढ़ी से परहेज का धार्मिक एवं वैज्ञानिक रहस्य सावन मास में भगवान शिव की पूजा के साथ सात्विक खानपान का विशेष महत्व है, जहां आयुर्वेद और धर्मशास्त्र दोनों ही दही, कढ़ी और डेयरी उत्पादों के सेवन से बचने की सलाह देते हैं। भगवान शिव की उपासना का पावन महीना सावन इस बार 30 जुलाई दिन गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है और 28 अगस्त दिन शुक्रवार को सावन पूर्णिमा के अवसर पर संपन्न होगा। इसके साथ ही सावन के प्रथम सोमवार का व्रत 2 अगस्त को रखा जाएगा। इस पूरे महीने में श्रद्धालु व्रत रखने, रुद्राभिषेक करने, पूजा पाठ करने और सात्विक आहार अपनाने का विशेष नियम पालन करते हैं। धार्मिक ग्रंथों तथा पारंपरिक मान्यताओं में सावन के दौरान कुछ खास खाद्य पदार्थों के सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। विशेष रूप से दूध, दही, कढ़ी और रायता जैसे डेयरी उत्पादों को इस दौरान भोजन में शामिल न करने का निर्देश दिया गया है। इन नियमों का पालन न करने पर स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सावन की प्रमुख तिथियां और सात्विक जीवन का महत्व धार्मिक दृष्टिकोण से सावन का महीना आत्मिक शुद्धि, संयम, तपस्या और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। इस अवधि में तामसिक और पचाने में भारी भोजन से दूर रहने की परंपरा रही है। कई मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान खट्टे पदार्थों, दही और कढ़ी के सेवन को नियंत्रित या पूरी तरह बंद कर दिया जाता है। इसका कारण यह है कि सावन में भगवान शिव को शीतल और अत्यंत पवित्र वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि साधक को स्वयं भी हल्का, सुपाच्य और शुद्ध भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे व्रत और साधना का फल प्राप्त हो सके। आयुर्वेद का दृष्टिकोण: पाचन तंत्र और कफ दोष आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार सावन का समय वर्षा ऋतु के मध्य में आता है। इस मौसम में वातावरण के अंदर नमी का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, जिसके कारण मनुष्य की स्वाभाविक पाचन क्षमता काफी कमजोर हो जाती है। आयुर्वेद में दही को गुरु यानी पचाने में भारी और कफ बढ़ाने वाला पदार्थ माना गया है। वर्षा ऋतु के दौरान अधिक मात्रा में दही या उससे बनी चीजों का सेवन करने से शरीर में कफ दोष बढ़ जाता है। इससे गले में खराश, सर्दी, जुकाम और पेट की पाचन संबंधी परेशानियां पैदा होने लगती हैं। इसी वजह से आयुर्वेद में बरसात के मौसम में, विशेषकर रात्रि के समय, दही खाने से बचने की सख्त हिदायत दी जाती है। बारिश के मौसम में दूध और दही के दूषित होने का कारण सावन मास में दूध और दही से निर्मित खाद्य पदार्थों का सेवन न करने के पीछे एक प्रमुख प्राकृतिक कारण भी जुड़ा हुआ है। बरसात के दिनों में जगह-जगह अनचाही घास और जंगली पौधे उग आते हैं। इन पौधों और घास पर अनेक प्रकार के सूक्ष्म कीड़े मकोड़े और कीट पनपने लगते हैं। जब गाय और भैंस चरने के लिए बाहर निकलती हैं, तो वे इन विषैले कीटों से युक्त घास को खा लेती हैं। इसका सीधा दुष्प्रभाव पशुओं के दूध की गुणवत्ता पर पड़ता है। ऐसे दूध से निर्मित दही या कढ़ी सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसी कारण से सावन में दूध और उससे बने सभी उत्पादों को वर्जित माना गया है। सावन में क्या खाएं और क्या न खाएं स्वास्थ्य विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, सावन के दौरान आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, मूंग की दाल, लौकी, तोरई और परवल जैसी सुपाच्य सब्जियों को शामिल करना सबसे अधिक लाभकारी होता है। इसके अतिरिक्त भोजन में सीमित मात्रा में देशी घी का प्रयोग किया जा सकता है। धार्मिक नियमों का मूल उद्देश्य केवल पूजा पाठ का अनुशासन बनाए रखना ही नहीं है, बल्कि मानव शरीर को मौसमी बीमारियों से बचाना भी है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपनी परंपराओं और चिकित्सीय परामर्श के अनुसार ही अपने भोजन का चयन करना चाहिए ताकि शरीर में ऊर्जा और आरोग्य बना रहे। इसका आप पर असर सावन के श्रद्धालुओं के लिए: सावन में दही, कढ़ी और कच्चे दूध के सेवन से बचकर आप बरसात के मौसम में होने वाले पाचन विकार, सर्दी-जुकाम और कफ संबंधी समस्याओं से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। दैनिक आहार संतुलन: इस अवधि में लौकी, तोरई, परवल और मूंग दाल जैसी सुपाच्य सब्जियों का सेवन शरीर को ऊर्जावान और रोगमुक्त बनाए रखने में मदद करता है। सवाल-जवाब 1. सावन का महीना कब से शुरू हो रहा है और कब समाप्त होगा? सावन मास 30 जुलाई दिन गुरुवार से शुरू होकर 28 अगस्त दिन शुक्रवार को सावन पूर्णिमा के दिन समाप्त होगा। 2. सावन के पहले सोमवार का व्रत किस तारीख को रखा जाएगा? सावन के प्रथम सोमवार का व्रत 2 अगस्त को रखा जाएगा। 3. सावन के महीने में दही और कढ़ी खाने की मनाही क्यों है? बरसात में पाचन शक्ति कमजोर होती है और दही भारी तथा कफ बढ़ाने वाला होता है, जिससे पेट की खराबी और सर्दी-जुकाम की समस्या हो सकती है। 4. सावन के दौरान दूध और दही की गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ता है? बरसात में उगी घास पर कीड़े-मकोड़े रहते हैं, जिन्हें मवेशी चर लेते हैं, जिससे दूध की गुणवत्ता प्रभावित होती है और वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। 5. सावन मास में कौन से खाद्य पदार्थ खाना लाभदायक माना जाता है? सावन में ताजे फल, हरी सब्जियां, मूंग की दाल, लौकी, तोरई, परवल और सीमित मात्रा में घी खाना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। https://trendkia.com/religion/sawan-ke-pavitra-mahine-men-dahi-aura-karhi-se-paraheja-ka-dharmika-evn-vaijnanika-rahasya-11722 TrendKia — Har trend, sabse pehle.