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  "title": "सावन माह की आखिरी पुत्रदा एकादशी का विशेष योग, जानिए शुभ मुहूर्त, पारण की अवधि और संतान सुख के धार्मिक उपाय",
  "summary": "सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी पर भगवान शिव और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व है। जानिए देवघर के ज्योतिषाचार्य के अनुसार पूजा का शुभ समय, पारण मुहूर्त और संतान प्राप्ति के लिए धार्मिक नियम।",
  "content": "पवित्र श्रावण मास अब अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर है और शिव भक्तों के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सावन के अंतिम दिनों में आने वाली एकादशी तिथि को सनातन धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की विधिवत आराधना और व्रत का पालन करने से संतान से संबंधित सभी प्रकार की चिंताएं दूर होती हैं तथा बच्चों के जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्य का आगमन होता है। इसके अतिरिक्त, सावन का महीना होने के कारण इस दिन देवों के देव महादेव और श्री हरि विष्णु दोनों की एक साथ पूजा का दुर्लभ अवसर प्राप्त होता है। इसी कारण तीर्थ नगरी देवघर सहित देशभर के श्रद्धालुओं में इस व्रत को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।\n\nहरि-हर की संयुक्त पूजा का अद्भुत संयोग\nधार्मिक दृष्टिकोण से सावन मास की यह अंतिम एकादशी हरि यानी भगवान विष्णु और हर यानी भगवान शिव की भक्ति का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करती है। सामान्यतः एकादशी तिथि केवल भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित होती है, लेकिन सावन का संपूर्ण महीना भगवान शिव का प्रिय माना जाता है। ऐसे में जब एकादशी का व्रत सावन के महीने में आता है, तो श्रद्धालुओं को एक ही दिन दोनों सर्वशक्तिमान देवताओं की कृपा प्राप्त करने का पुण्य फल मिलता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जो भी भक्त इस दिन निष्ठापूर्वक व्रत रखकर दोनों देवों का स्मरण करते हैं, उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उनके घर-परिवार में मांगलिक वातावरण का संचार होता है।\n\nदेवघर के ज्योतिषाचार्य के अनुसार व्रत का महत्व और तिथियां\nदेवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने इस व्रत के महत्व और सही तिथियों के विषय में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सावन महीने की अंतिम एकादशी को ही पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। पंचांगीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष यह पावन व्रत 30 अगस्त को रखा जाएगा। इस बार पुत्रदा एकादशी का रविवार के दिन पड़ना अपने आप में एक विशेष और शुभ संयोग निर्मित कर रहा है। शास्त्रों में सूर्यदेव के दिन रविवार को भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए व्रत-पूजन से साधक को आध्यात्मिक शांति और दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।\n\nसंतान की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए विशेष निर्देश\nपुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना गया है जो संतान प्राप्ति की तीव्र अभिलाषा रखते हैं। पंडित नंदकिशोर मुद्गल का कहना है कि जिन दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त करने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है या जो अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं, उन्हें इस दिन पूर्ण नियम और निष्ठा के साथ उपवास रखना चाहिए। भगवान विष्णु और भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा-अर्चना करने से संतान संबंधी मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है। हालांकि, विद्वानों का यह भी मानना है कि इन मान्यताओं को आत्मीय आस्था और भक्ति भाव से स्वीकार करना चाहिए। पूजा-पाठ के साथ-साथ इस दिन मंदिर में या घर पर दीपक प्रज्वलित करना, धार्मिक मंत्रों का जाप करना तथा निर्धन एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को भोजन, वस्त्र या अन्न का दान करना अत्यधिक पुण्यदायक बताया गया है।\n\nपूजा का सटीक शुभ मुहूर्त और पारण का समय\nजो श्रद्धालु पुत्रदा एकादशी का व्रत धारण करने जा रहे हैं, उन्हें तिथि के प्रारंभ, समाप्त होने के समय और पारण के नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का शुभारंभ 23 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि के पश्चात यानी रात 2 बजे से हो जाएगा। वहीं, इस तिथि का समापन 24 अगस्त 2026 की भोर में सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर होगा। भगवान विष्णु की मुख्य पूजा-अर्चना के लिए 23 अगस्त को सुबह 7 बजकर 32 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक का समय अत्यंत शुभ बताया गया है। श्रद्धालुओं को इसी समय अवधि के भीतर अपनी पूजा और संकल्प संपन्न करने की सलाह दी जाती है।\n\nइसके अलावा, एकादशी व्रत के पूर्ण फल की प्राप्ति के लिए शास्त्रसम्मत समय पर पारण करना अनिवार्य होता है। व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से प्रारंभ होकर शाम 4 बजकर 16 मिनट तक किया जा सकेगा। व्रतियों को चाहिए कि वे इस निर्धारित समय सीमा के भीतर ही सात्विक भोजन ग्रहण कर अपने व्रत का पारण करें। देवघर सहित संपूर्ण देश में इस अवसर पर मंदिरों को सजाने और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां पूर्ण की जा रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: श्रावण मास में संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से व्रत और दान कर सकते हैं।\n\nदेवघर में: स्थानीय श्रद्धालु बाबा वैद्यनाथ मंदिर नगरी में शिव और विष्णु दोनों के दर्शन-पूजन का विशेष लाभ उठा सकेंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पुत्रदा एकादशी किस तिथि को मनाई जा रही है?\nपुत्रदा एकादशी की तिथि 23 अगस्त 2026 को रात 2:00 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त 2026 को सुबह 4:18 बजे तक रहेगी, और व्रत 30 अगस्त को रविवार के दिन रखा जाएगा।\n\n2. भगवान विष्णु की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?\nभगवान विष्णु की पूजा के लिए 23 अगस्त 2026 को सुबह 7:32 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक का समय अति शुभ माना गया है।\n\n3. पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण कब करना चाहिए?\nइस व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे के बीच किया जाएगा।\n\n4. सावन की पुत्रदा एकादशी पर शिव और विष्णु दोनों की पूजा क्यों की जाती है?\nसावन का पवित्र महीना भगवान शिव को समर्पित है और एकादशी तिथि भगवान विष्णु की प्रिय है, इसलिए इस दिन दोनों देवों की संयुक्त पूजा से विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।\n\n5. देवघर के ज्योतिषाचार्य ने इस दिन क्या विशेष कार्य करने की सलाह दी है?\nदेवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार श्रद्धालुओं को व्रत रखने के साथ-साथ भगवान शिव-विष्णु का स्मरण, दीप प्रज्वलन और जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-08-20",
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