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  "title": "सावन पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त को, संतान प्राप्ति के लिए इस शुभ योग में करें पूजा",
  "summary": "सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी इस वर्ष 5 अगस्त को है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और शिव की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है.",
  "content": "सनातन धर्म में सभी तिथियों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। एकादशी का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र तिथि पर व्रत रखकर विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण की पूजा-अर्चना करने से साधक के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से, सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन देवों के देव महादेव और भगवान विष्णु दोनों की एक साथ कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर मिलता है। इस वर्ष सावन पुत्रदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि को लेकर देवघर के एक प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य ने विस्तार से जानकारी दी है।\n\nदेवघर के ज्योतिषाचार्य ने दी व्रत की जानकारी\nदेवघर के पागल बाबा आश्रम परिसर में स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने बातचीत के दौरान बताया कि सावन का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। ऐसे में यदि इस पावन मास में भगवान विष्णु की भी आराधना की जाए, तो इसका कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इससे भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की संयुक्त कृपा बरसती है। सावन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मुख्य रूप से पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पुत्रदा एकादशी का व्रत आगामी 5 अगस्त को रखा जाएगा।\n\nपुत्रदा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त\nज्योतिषाचार्य के अनुसार, ऋषिकेश पंचांग की गणना के मुताबिक, सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 4 अगस्त को दोपहर 11 बजकर 14 मिनट से हो रहा है। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 5 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर व्रत 5 अगस्त को ही मान्य होगा।\n\nबन रहे हैं खास योग और भद्रा का साया\nइस वर्ष सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी के पावन अवसर पर इंद्र योग और रवि योग का अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। हालांकि, इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा, और शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में पूजा-पाठ या मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। पंचांग के अनुसार, भद्रा 5 अगस्त को सुबह 5 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर उसी दिन सुबह 11 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगी। इसके साथ ही इस दिन शिववास का भी विशेष संयोग रहेगा, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दौरान भगवान भोलेनाथ अपने वाहन नंदी के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे, जिससे साधकों को पूजा का दोगुना फल मिलेगा।\n\nसंतान प्राप्ति के लिए करें यह विशेष उपाय\nजिन दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति में बाधा आ रही है या जो संतान की कामना रखते हैं, उनके लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं है। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि पुत्रदा एकादशी के दिन संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों को उपवास रखना चाहिए। इसके बाद एक साफ पात्र में गंगाजल भरकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर जलाभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही भगवान लक्ष्मी नारायण की भी सच्चे मन से पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जल्द ही सूनी गोद भर जाती है।\n\nइसका आप पर असर\nपुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं और संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपतियों को इस दिन के शुभ मुहूर्तों और नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।\n\n• देशभर में: सभी राज्यों के श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और शिव की आराधना कर अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं।\n• देवघर में: स्थानीय मंदिरों और आश्रमों में विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे, जहां भक्त एकत्र होकर पूजा-अर्चना करेंगे।\n• पूजा का समय: भद्रा काल सुबह 5:23 से 11:33 तक रहेगा, इसलिए इस अवधि से बचकर ही शुभ मुहूर्त में पूजा संपन्न करें।\n• व्रत के नियम: व्रत रखने वाले दंपतियों को गंगाजल अर्पित करते समय विधि-विधान का पूरी तरह पालन करना चाहिए।\n• तिथि का ध्यान: व्रत की शुरुआत और समापन के समय को ध्यान में रखते हुए ही पारण और अनुष्ठान पूरे करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहिंदू पंचांग और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है।\n\n• तिथियों का संयोग: सावन महीने में शिव और विष्णु दोनों की कृपा पाने के लिए यह तिथि सबसे उत्तम मानी गई है।\n• पंचांग की गणना: ऋषिकेश पंचांग के अनुसार तिथियों के घटने-बढ़ने और सूर्योदय की स्थिति के आधार पर 5 अगस्त को व्रत तय किया गया है।\n• शुभ योगों का प्रभाव: इस दिन इंद्र योग और रवि योग का संयोग बनने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।\n• शिववास की स्थिति: इस विशेष दिन भगवान शिव का नंदी के साथ कैलाश पर विराजमान होना ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सावन पुत्रदा एकादशी 2025 कब है?\nइस वर्ष सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 5 अगस्त को रखा जाएगा।\n\n2. एकादशी तिथि की शुरुआत कब से हो रही है?\nसावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 4 अगस्त को दोपहर 11 बजकर 14 मिनट से शुरू होगी।\n\n3. एकादशी तिथि का समापन कब होगा?\nयह तिथि अगले दिन यानी 5 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी।\n\n4. पुत्रदा एकादशी पर कौन से खास योग बन रहे हैं?\nइस दिन इंद्र योग और रवि योग का संयोग बन रहा है, साथ ही शिववास भी रहेगा।\n\n5. भद्रा काल का समय क्या रहेगा?\nभद्रा 5 अगस्त को सुबह 5 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर 11 बजकर 33 मिनट तक रहेगी।\n\n6. संतान प्राप्ति के लिए क्या उपाय करना चाहिए?\nदंपतियों को व्रत रखकर गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए और लक्ष्मी नारायण की पूजा करनी चाहिए।\n\n7. यह जानकारी किसने दी है?\nयह जानकारी देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने दी है।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-10-27",
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    "पुत्रदा एकादशी",
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    "व्रत कथा",
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    "ज्योतिष समाचार",
    "संतार प्राप्ति उपाय"
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