शनिदेव की पूजा के दौरान तेल चढ़ाने के नियम और शनिवार के परहेज शनिवार के दिन न्याय के देवता शनिदेव की पूजा में तेल चढ़ाने की विधि और सावधानियों का पालन करना बेहद जरूरी है। जानिए वे कौन से नियम हैं जिन्हें अपनाकर आप शनिदेव का आशीर्वाद पा सकते हैं। शनिवार का दिन विशेष रूप से न्याय के देवता भगवान शनिदेव को समर्पित माना गया है। धर्मग्रंथों में शनिदेव को कर्मफल दाता के रूप में जाना जाता है, जो मनुष्य को उसके द्वारा किए गए कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। शनिवार को उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही साढ़ेसाती और ढैय्या जैसे कष्टों का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए तेल चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि पूर्ण फल की प्राप्ति हो सके। तेल अर्पित करने की सही विधि शनिदेव को तेल चढ़ाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। सबसे पहला नियम यह है कि मूर्ति के ठीक सामने सीधे खड़े होने से बचें और उनकी आंखों में सीधे देखने का प्रयास न करें। हमेशा मूर्ति के थोड़ा दाएं या बाएं होकर खड़े हों और अपना ध्यान शनिदेव के चरणों में केंद्रित रखें। तेल चढ़ाते समय पूरी तरह समर्पित भाव रखें और शांत मन से पूजा करें। तेल चढ़ाने के बाद शनिदेव के समक्ष सरसों के तेल का एक दीपक जलाना चाहिए। इस दीये में थोड़े काले तिल डालना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए। तेल अर्पित करने के पश्चात जरूरतमंद लोगों को काली उड़द की दाल, काला तिल और काले वस्त्र दान करने से विशेष लाभ मिलता है। अंत में, किसी पीपल के पेड़ के नीचे जाकर भी तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। शनिवार के दिन क्या न करें और विशेष सावधानियां शनिवार के दिन कुछ कार्यों से परहेज करना चाहिए। इस दिन लोहे का सामान और घर के लिए सरसों का तेल खरीदना वर्जित माना जाता है। इसके अलावा, अपने आहार में तामसिक भोजन को बिल्कुल शामिल न करें। व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े कार्यों जैसे बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। समाज के गरीब, असहाय, वृद्ध व्यक्तियों या महिलाओं का कभी भी अनादर न करें। हनुमान जी की उपासना और अन्य उपाय शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिवार के दिन हनुमान जी की आराधना करना भी बहुत प्रभावी है। भक्त हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं। सुबह के समय पीपल के पेड़ को जल अर्पित करना और शाम को वहां तेल का दीपक जलाना बहुत कल्याणकारी होता है। साथ ही, काले कुत्ते को रोटी खिलाना और चींटियों को आटा डालना भी इस दिन के शुभ कार्यों में गिना जाता है। इसका आप पर असर भारत में: शनिवार के दिन इन पारंपरिक नियमों का पालन करने से मानसिक शांति और अनुशासन में सुधार महसूस हो सकता है। सवाल-जवाब 1. शनिदेव को तेल चढ़ाते समय कहां खड़ा होना चाहिए? शनिदेव को तेल चढ़ाते समय मूर्ति के ठीक सामने नहीं, बल्कि थोड़ा दाएं या बाएं खड़े होना चाहिए। 2. शनिवार के दिन कौन से खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए? शनिवार के दिन तामसिक भोजन करने से पूरी तरह बचना चाहिए। 3. शनिदेव की पूजा के बाद क्या दान करना शुभ माना जाता है? पूजा के बाद काला तिल, उड़द की दाल और काला वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ होता है। 4. क्या शनिवार को हनुमान जी की पूजा करना प्रभावी है? हां, शनिवार के दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करना बहुत शुभ और प्रभावी माना जाता है। https://trendkia.com/religion/shanideva-ki-puja-ke-daurana-tela-charhane-ke-niyama-aura-shanivara-ke-paraheja-6790 TrendKia — Har trend, sabse pehle.