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  "title": "शारदीय नवरात्रि का नौवां दिन आज, महाअष्टमी और महानवमी पर ऐसे करें कन्या पूजन",
  "summary": "शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन महाअष्टमी और महानवमी का पर्व मनाया जा रहा है। जानिए कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम।",
  "content": "शारदीय नवरात्रि का आज नौवां दिन है और इस पावन अवसर पर महाअष्टमी तथा महानवमी का व्रत एवं अनुष्ठान किया जा रहा है। कई घरों में आज ही के दिन कन्या पूजन की परंपरा भी निभाई जा रही है। नवरात्रि की इन तिथियों के विशेष संयोग के चलते इस बार एक ही दिन दोनों पर्वों की धूम है। सप्तमी तिथि दो दिन होने की वजह से 19 अक्टूबर, दिन सोमवार को अष्टमी और नवमी दोनों की पूजा संपन्न हो रही है। अष्टमी तिथि का समापन 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहा, जिसके तुरंत बाद नवमी तिथि का आरंभ हो गया। इसके अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।\n\nमहाअष्टमी और महानवमी की तिथियों का गणित\nआश्विन मास की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर हुई थी और इसका समापन 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक हुआ। उदिया तिथि की मान्यता के अनुसार महाअष्टमी की पूजा 19 अक्टूबर, सोमवार को ही निर्धारित की गई। नवरात्रि के इस आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की उपासना की जाती है। इसी प्रकार आश्विन मास की नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ ही हवन और कन्या पूजन का विधान पूरा होता है, जिसके बाद ही नवरात्रि का समापन माना जाता है।\n\nकन्या पूजन का धार्मिक महत्व और परंपराएं\nसनातन परंपरा में कन्या पूजन को शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना का एक अनिवार्य और अत्यंत महत्वपूर्ण अंग माना गया है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि छोटी-छोटी कन्याओं में स्वयं देवी का वास होता है। परंपरा के अनुसार, अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भी आमंत्रित कर उनका आदर-सत्कार किया जाता है। कई क्षेत्रों में इस बालक को भैरव या लांगुरिया का स्वरूप माना जाता है, हालांकि इस नियम में क्षेत्रीय और पारिवारिक मान्यताओं के आधार पर थोड़े बदलाव भी देखने को मिलते हैं।\n\n19 अक्टूबर को कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त\nआज यानी 19 अक्टूबर को कन्या पूजन और विभिन्न धार्मिक कार्यों के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहे। कन्या पूजन के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 9 बजकर 15 मिनट से सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक का रहा। इसके अलावा अन्य मुहूर्त इस प्रकार रहे\n\n• लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 02:57 बजे से शाम 04:22 बजे तक रहा।\n• अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: शाम 04:22 बजे से शाम 05:48 बजे तक मान्य रहा।\n• चर-सामान्य मुहूर्त: दोपहर 01:31 बजे से दोपहर 02:57 बजे तक रहा।\n• अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक का रहा।\n• विजय मुहूर्त: दोपहर 02:01 बजे से दोपहर 02:46 बजे तक का रहा।\n• गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:49 बजे से शाम 06:14 बजे तक रहा।\n• अमृत काल: सुबह 08:29 बजे से सुबह 10:16 बजे तक रहा।\n• निशिता मुहूर्त: रात 11:42 बजे से 20 अक्टूबर की रात 12:32 बजे तक रहेगा।\n• सर्वार्थ सिद्धि योग: दोपहर 03:38 बजे से 20 अक्टूबर की सुबह 06:25 बजे तक रहेगा।\n• रवि योग: दोपहर 03:38 बजे से 20 अक्टूबर की सुबह 06:25 बजे तक रहेगा।\n\nकन्या पूजन की विधि और जरूरी नियम\nकन्या पूजन करने से पहले घर की अच्छी तरह साफ-सफाई कर पूजा स्थल को पूरी तरह तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद कन्याओं को आदरपूर्वक अपने आसन पर बैठाकर उनके चरण धोए जाते हैं और उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। माता रानी को भोग अर्पित करने के बाद कन्याओं को हलवा, पूरी, चने और अन्य सात्विक व्यंजनों का भोजन कराया जाता है। भोजन की समाप्ति के बाद अपनी आर्थिक क्षमता और श्रद्धा के अनुसार उन्हें दक्षिणा, फल या उपहार भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। कन्याओं के साथ पूरे सम्मान के साथ पेश आना और उन्हें प्रसन्न मन से विदा करना इस पूरी परंपरा का सबसे अहम हिस्सा माना गया है।\n\nइसका आप पर असर\nयह पर्व देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं के दैनिक जीवन, धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत-व्यवहार को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।\n\n• भारत में: देश भर के करोड़ों परिवार इन तिथियों के अनुसार महाअष्टमी और महानवमी का व्रत रखते हैं। इस दिन बाजार में फल, फूल, पूजा सामग्री और पूजन के सामान की मांग बढ़ जाती है।\n• स्थानीय स्तर पर: स्थानीय बाजारों और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे यातायात और सुरक्षा व्यवस्था के खास इंतजाम किए जाते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहिंदू पंचांग और चंद्र गणनाओं के आधार पर तिथियों का घटना-बढ़ना इन पर्वों की सटीक तारीख तय करता है।\n\n• पंचांग गणना: इस वर्ष सप्तमी तिथि के दो दिन होने के कारण अष्टमी और महानवमी एक ही दिन यानी 19 अक्टूबर को पड़ रही हैं।\n• धार्मिक परंपरा: शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के अंतिम दिनों में मां दुर्गा के विशेष स्वरूपों की पूजा और कन्याओं को देवी मानकर भोजन कराने का विधान है।\n• उदिया तिथि का महत्व: सनातन धर्म में सूर्योदय के समय मौजूद तिथि के आधार पर ही व्रत और त्योहारों का निर्धारण किया जाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शारदीय नवरात्रि का नौवां दिन कब है?\nशारदीय नवरात्रि का नौवां दिन 19 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।\n\n2. महाअष्टमी तिथि कब समाप्त हुई?\nआश्विन मास की अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रही।\n\n3. महानवमी की तिथि कब तक है?\nनवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक है।\n\n4. कन्या पूजन के लिए सबसे उत्तम समय क्या था?\n19 अक्टूबर को कन्या पूजन के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 9 बजकर 15 मिनट से सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक रहा।\n\n5. विजयादशमी का पर्व कब मनाया जाएगा?\nविजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-10-21",
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