# शारदीय नवरात्रि के नौ पावन दिन और उनके विशेष रंग: जानिए पूजा की पूरी सूची और आध्यात्मिक महत्व

> शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। जानिए किस दिन कौन से रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है और उनका धार्मिक महत्व क्या है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/shardiya-navratri-ke-nau-pavana-dina-aura-unake-vishesha-rnga-janie-puja-ki-puri-suchi-aura-adhyatmika-mahatva-45765 · **Language:** Hindi
**Tags:** शारदीय नवरात्रि, नवरात्रि 9 रंग, मां दुर्गा पूजा, पूजा सामग्री और विधि, धार्मिक मान्यताएं

सनातन परंपरा में शारदीय नवरात्रि का उत्सव बेहद पावन और फलदायी माना जाता है। इस महापर्व की शुरुआत आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और इसका विधिवत समापन नवमी तिथि पर संपन्न होता है। इन नौ दिनों की अवधि में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग दिव्य स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से उपासना की जाती है। उत्सव के दौरान भक्तों के मन में अक्सर एक स्वाभाविक संशय रहता है कि प्रत्येक तिथि पर पूजा-अर्चना के दौरान किस रंग के वस्त्र धारण करना सबसे उत्तम और फलदायी रहेगा। पर्व के आते ही इस विषय पर जानकारी जुटाने का क्रम तेज हो जाता है। नौ पावन तिथियों, उनसे जुड़ी देवियों तथा उनके लिए तय किए गए शुभ रंगों की पूरी व्यवस्था को समझकर साधना को और अधिक सार्थक बनाया जा सकता है।

## प्रतिपदा से नवमी तक तिथिवार रंगों का निर्धारण
नवरात्रि के नौ दिनों के लिए तिथियों, देवियों और उनसे संबंधित रंगों का विशेष क्रम निर्धारित है। पहले दिन यानी 11 अक्टूबर, रविवार को प्रतिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की वंदना नारंगी रंग के परिधान पहनकर की जाती है। इसके पश्चात दूसरे दिन यानी 12 अक्टूबर, सोमवार को मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के लिए सफेद रंग के वस्त्र उपयुक्त माने गए हैं। तीसरे दिन 13 अक्टूबर, मंगलवार को मां चंद्रघंटा की साधना लाल रंग के वस्त्र पहनकर करने का विधान है।

चौथे दिन 14 अक्टूबर, बुधवार को मां कुष्मांडा की पूजा में गहरा नीला अथवा रॉयल ब्लू रंग धारण किया जाता है। पांचवें दिन 15 अक्टूबर, गुरुवार को मां स्कंदमाता की सेवा में पीले रंग के वस्त्र अर्पित और धारण किए जाते हैं। छठे दिन 16 अक्टूबर, शुक्रवार को मां कात्यायनी की आराधना हरे रंग के परिधानों में होती है। सातवें दिन 17 अक्टूबर, शनिवार को मां कालरात्रि की उपासना में स्लेटी यानी ग्रे रंग के वस्त्र पहने जाते हैं। आठवें दिन 18 अक्टूबर, रविवार को मां महागौरी की आराधना बैंगनी रंग के वस्त्र पहनकर की जाती है। अंत में नौवें दिन 19 अक्टूबर, सोमवार को मां सिद्धिदात्री की वंदना के लिए मोरपंखी हरा यानी पीकॉक ग्रीन रंग अत्यंत शुभ माना गया है।

## प्रतीकों का भावार्थ: रंगों का आध्यात्मिक और धार्मिक आधार
नवरात्रि में निर्धारित प्रत्येक रंग का अपना गहरा दार्शनिक और मानसिक प्रभाव माना गया है। प्रथम दिन का नारंगी रंग ऊर्जा, जीवंतता और सकारात्मक दृष्टिकोण का संचार करता है। मां शैलपुत्री की उपासना इस रंग के वस्त्रों में करने से साधक के भीतर नया उत्साह और नवचेतना जाग्रत होती है। द्वितीय दिन का सफेद रंग निर्मलता, सत्य और परम शांति का द्योतक है, जो मां ब्रह्मचारिणी के तपस्वी स्वरूप के अनुकूल साधक को मानसिक स्थिरता और अंतःकरण की पवित्रता प्रदान करता है। तृतीय दिन का लाल रंग अदम्य साहस, वीरता और शक्ति की अभिव्यक्ति है, जिससे मां चंद्रघंटा के उपासक में निर्भयता का भाव पनपता है।

चतुर्थ दिन का गहरा नीला रंग भव्यता, गंभीरता और अडिग स्थिरता का प्रतिनिधित्व करता है, जो मां कुष्मांडा के ब्रह्मांडीय स्वरूप का चिंतन करने में सहायक बनता है। पंचम दिन का पीला रंग उल्लास, प्रज्ञा और बौद्धिक प्रखरता का प्रतीक है, जिसे मां स्कंदमाता की ममतामयी पूजा में अत्यंत मंगलकारी स्वीकार किया गया है। षष्ठी तिथि पर प्रयुक्त हरा रंग प्रकृति के पुनर्जीवन, उर्वरता और विकास की नई शुरुआत को दर्शाता है, जो मां कात्यायनी की शक्ति साधना को नई दिशा देता है।

सप्तम दिन का स्लेटी यानी ग्रे रंग संतुलित विवेक, संयम और वैचारिक संतुलन का प्रतीक है, जो मां कालरात्रि की कृपा से जीवन के भय और अंधकार को दूर करने की शक्ति देता है। अष्टमी तिथि का बैंगनी रंग उच्च महत्वाकांक्षा, गरिमा और गूढ़ आध्यात्मिकता से जुड़ा है, जो मां महागौरी के सौम्य रूप से साधक को आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है। नवमी तिथि का मोरपंखी हरा रंग करुणा, विशिष्टता और पूर्णता की भावना प्रकट करता है, जो मां सिद्धिदात्री से समस्त सिद्धियों और कृपा को प्राप्त करने के लिए अनुकूल वातावरण रचता है।

## इसका आप पर असर
नवरात्रि के दैनिक रंगों की जानकारी से भक्तगण अपनी नौ दिवसीय पूजा, खरीदारी और उत्सव की तैयारियों को सुव्यवस्थित कर सकते हैं।

- **दैनिक परिधान योजना:** नौ दिनों के लिए पहले से वस्त्रों के रंग तय होने से अंतिम समय के असमंजस से बचा जा सकता है। इससे दैनिक पूजा-अर्चना और सामाजिक आयोजनों के लिए तैयारी आसान हो जाती है।
- **त्योहारी खरीदारी में स्पष्टता:** परिवार के सदस्य पूजा के पारंपरिक परिधानों की खरीदारी सूची समय रहते तैयार कर सकते हैं। इससे बाजार में खरीदारी के दौरान रंग चयन को लेकर समय की बचत होती है।
- **आध्यात्मिक एकाग्रता:** रंगों के प्रतीकात्मक अर्थ को समझकर ध्यान और पूजा करने से आंतरिक शांति मिलती है। प्रत्येक स्वरूप के अनुरूप भाव जाग्रत करने में यह परंपरा मानसिक स्तर पर सहायता करती है।
- **सांस्कृतिक जुड़ाव:** सामूहिक उत्सवों और गरबा या डांडिया आयोजनों में निर्धारित रंगों का पालन करने से एकरूपता आती है। इससे पूरे परिवार और समाज में उत्सव का उत्साह बढ़ता है।

## ऐसा क्यों हुआ
नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रंग पहनने की परंपरा देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की प्रकृति, शक्ति और उनसे जुड़े प्रतीकों को व्यक्त करने के लिए विकसित हुई है।

- **दैवीय स्वरूपों का स्वभाव:** प्रत्येक तिथि पर पूजी जाने वाली देवी का स्वरूप और उनका दिव्य संदेश भिन्न होता है। उदाहरण के लिए, तपस्या की प्रतीक मां ब्रह्मचारिणी के लिए सफेद और शक्ति की प्रतीक मां चंद्रघंटा के लिए लाल रंग चुना गया है।
- **प्रकृति और ऋतु परिवर्तन का प्रभाव:** आश्विन मास में ऋतु परिवर्तन के समय मानसिक और शारीरिक ऊर्जा में संतुलन बनाए रखने के लिए रंगों की प्रकृति का सहारा लिया जाता है। रंग मन की एकाग्रता और सकारात्मकता को प्रभावित करते हैं।
- **लोक परंपरा और सांस्कृतिक मान्यता:** समय के साथ भक्तों और समाज में दिन-प्रतिदिन के उत्सव को विशिष्ट पहचान देने के लिए यह परंपरा दृढ़ होती गई। यह व्यवस्था पूजा में अनुशासन और सामूहिक उल्लास का भाव जगाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. शारदीय नवरात्रि की शुरुआत किस तिथि से होती है?
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और यह नवमी तिथि पर संपन्न होती है।

### 2. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में किस रंग के वस्त्र पहनना शुभ है?
पहले दिन 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की आराधना नारंगी रंग के परिधान धारण करके की जाती है।

### 3. नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा के लिए कौन सा रंग निर्धारित है?
आठवें दिन 18 अक्टूबर को मां महागौरी की वंदना के लिए बैंगनी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

### 4. नौवें दिन सिद्धिदात्री की उपासना में कौन सा रंग पहना जाता है?
नौवें दिन 19 अक्टूबर को मां सिद्धिदात्री की पूजा में मोरपंखी हरा यानी पीकॉक ग्रीन रंग धारण करने की परंपरा है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._