# शारदीय नवरात्रि उत्सव का 11 अक्टूबर से शुभारंभ, घटस्थापना से लेकर पूजन सामग्री का पूरा विवरण

> शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 19 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। कलश स्थापना, जौ बोने और नौ दिनों के अनुष्ठान के लिए आवश्यक पूजा सामग्री और विधि की पूरी सूची यहाँ देखें।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/shardiya-navratri-utsava-ka-11-aktubara-se-shubharnbha-ghatasthapana-se-lekara-pujana-samagri-ka-pura-vivarana-45348 · **Language:** Hindi
**Tags:** शारदीय नवरात्रि, घटस्थापना, दुर्गा पूजा, पूजा सामग्री, कलश स्थापना, अखंड ज्योति

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इन नौ दिनों के दौरान भक्तजन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। उत्सव के पहले दिन शुभ मुहूर्त में मां दुर्गा की चौकी सजाने, प्रतिमा स्थापना करने, कलश स्थापित करने और जौ बोने की विशेष परंपरा निभाई जाती है। इसके अलावा कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों के संकल्प के साथ अखंड ज्योति भी प्रज्वलित करते हैं। अनुष्ठान की सुगमता के लिए पहले से ही सभी आवश्यक पूजन सामग्रियों की व्यवस्था कर लेना उत्तम माना जाता है।

## दुर्गा पूजा अनुष्ठान के लिए आवश्यक मुख्य सामग्री
नवरात्रि के दैनिक पूजन के लिए सभी मांगलिक सामग्रियों की पूर्व तैयारी आवश्यक होती है। इस सूची में मुख्य रूप से मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति और भगवान गणेश की प्रतिमा शामिल है। बैठने और स्थापना के लिए लकड़ी की चौकी, बैठने का आसन, लाल वस्त्र, कलावा या मौली, फूल और पुष्प माला की व्यवस्था की जाती है। देवी को अर्पित करने के लिए पूर्ण श्रृंगार का सामान, लाल चुनरी और नारियल रखा जाता है।

इसके साथ ही धार्मिक पाठ के लिए दुर्गा सप्तशती ग्रंथ, नैवेद्य के रूप में ऋतुफल, धूप, अगरबत्ती, दीपक, पान का पत्ता और साबुत सुपारी एकत्र की जाती है। आरती के विधान के लिए आरती की थाली, घंटी, छोटा जलपात्र, कर्पूर, बाती और शुद्ध घी से भरा दीपक आवश्यक है। तिलक और अर्पण के लिए कुमकुम, चन्दन, हल्दी, अक्षत, अष्टदल कमल तथा कुमकुम और हल्दी से रंगे विशेष चावल तैयार रखे जाते हैं।

## घटस्थापना और कलश पूजन सामग्री सूची
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके लिए मिट्टी या तांबे का कलश और उसमें भरने के लिए शुद्ध जल आवश्यक है। कलश के भीतर डालने के लिए एक सिक्का, अक्षत, दो साबुत सुपारी, दो इलायची, एक हल्दी की गांठ और दो साबुत लौंग की जरूरत होती है।

कलश के मुख को सुशोभित करने के लिए एक साथ जुड़े हुए 8 आम के पत्ते उपयोग किए जाते हैं। इसके ऊपर स्थापित किए जाने वाले नारियल को लाल कलावा या मौली से लपेटकर, नारियल पर बांधने के लिए छोटी लाल चुनरी से सजाया जाता है।

## जौ बोने के लिए जरूरी सामग्री
कलश के समीप नवधान्य के प्रतीक रूप में जौ उगाने का विधान है। इसके लिए एक मिट्टी का बड़ा कटोरा, साफ काली मिट्टी, जौ और गेहूं के दाने, शुद्ध जल तथा कलावा या मौली की आवश्यकता होती है।

## नवरात्रि पूजन और स्थापना की चरणबद्ध विधि
पूजन प्रारंभ करने के लिए सर्वप्रथम घर में एक पवित्र और स्वच्छ स्थान चुनकर वहां लकड़ी की चौकी स्थापित करें और उस पर स्वच्छ लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। उस चौकी पर थोड़े अक्षत रखकर आदरपूर्वक देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें और साथ ही भगवान गणेश की प्रतिमा भी विराजमान करें।

इसके उपरांत कलश स्थापना की प्रक्रिया पूरी करें। मिट्टी अथवा तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें सिक्का, सुपारी, लौंग, इलायची और हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते सजाएं और उसके ऊपर लाल चुनरी में बंधा नारियल स्थापित करें। इस कलश को देवी प्रतिमा के समीप स्थापित करें।

शुद्धिकरण के लिए पुष्प के माध्यम से भगवान गणेश और देवी दुर्गा पर पवित्र जल का छिड़काव करें। संकल्प के अनुसार अखंड ज्योति प्रज्वलित करें और नित्य पूजा व आरती के लिए अलग से घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान गणेश, माता रानी, स्थापित कलश और प्रज्वलित दीपक पर हल्दी और कुमकुम का तिलक लगाएं।

शास्त्रोक्त विधि से पूजन संपन्न करने के बाद देवी को श्रृंगार की संपूर्ण सामग्री अर्पित करें। भोग के रूप में अपनी श्रद्धानुसार ताजे मौसमी फल, बताशे और मिश्री का नैवेद्य चढ़ाएं। अंत में मां दुर्गा के पवित्र मंत्रों का जाप करते हुए श्रद्धापूर्वक आरती संपन्न करें।

## इसका आप पर असर
शारदीय नवरात्रि की तिथियों और पूजन सूची की अग्रिम जानकारी से श्रद्धालुओं को समय पर धार्मिक अनुष्ठान की तैयारी करने में मदद मिलती है।

- **सामग्री की अग्रिम खरीदारी:** 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे उत्सव से पहले ही मिट्टी का कलश, आम के पत्ते, जौ और पूजन सामग्री जुटा लेने से ऐन वक्त पर बाजार में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है। यह व्यवस्था पूजन मुहूर्त में बिना किसी बाधा के घटस्थापना सुनिश्चित करती है।
- **अखंड ज्योति और नियम:** जो श्रद्धालु नौ दिनों की अखंड ज्योति प्रज्वलित करने का संकल्प ले रहे हैं, वे शुद्ध घी, लंबी बाती और आवश्यक सुरक्षा बंदोबस्त पहले ही कर सकते हैं। समय रहते तैयारी करने से नौ दिनों का यह व्रत शांति और अनुशासन के साथ पूरा होता है।
- **दैनिक पूजा की स्पष्टता:** संपूर्ण सामग्री सूची पास होने से प्रत्येक दिन मां के अलग-अलग रूपों को अर्पित किए जाने वाले श्रृंगार और नैवेद्य का प्रबंधन आसान हो जाता है। इससे दैनिक आरती और मंत्र जप बिना किसी व्यवधान के संपन्न किए जा सकते हैं।
- **व्रत और अनुष्ठान की योजना:** 11 से 19 अक्टूबर की तिथियों की स्पष्टता से भक्तजन अपने दैनिक कामकाज और व्रत के खानपान की योजना संतुलित ढंग से बना सकते हैं। इससे पूरे परिवार के लिए उत्सव का वातावरण व्यवस्थित बना रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
शारदीय नवरात्रि का आयोजन अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है, जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है।

- **प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना का विधान:** धार्मिक परंपरा के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित करना ब्रह्मांडीय शक्तियों और देवों के आह्वान का प्रतीक माना जाता है। जल, सिक्के, सुपारी और आम के पत्तों से युक्त कलश को मांगलिकता और समृद्धि का केंद्र मानकर प्रतिष्ठित किया जाता है।
- **जौ बोने की परंपरा:** सृष्टि की पहली फसल माने जाने वाले जौ को कलश के साथ बोना अन्नपूर्णा स्वरूप और पारिवारिक सुख-समृद्धि के विस्तार का संकेत देता है। इसके अंकुरण की गति को आने वाले समय के शुभ फल से जोड़कर देखा जाता है।
- **नौ स्वरूपों का नित्य अर्चन:** मां दुर्गा के नव रूपों की अलग-अलग दिन पूजा करने के पीछे आध्यात्मिक साधना और मानसिक संकल्प को दृढ़ करने का उद्देश्य निहित है। यह नौ दिवसीय अनुष्ठान 11 अक्टूबर से आरंभ होकर 19 अक्टूबर तक नवमी के पूजन के साथ संपन्न होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. शारदीय नवरात्रि कब से कब तक मनाई जाएगी?
शारदीय नवरात्रि का त्योहार 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेगा।

### 2. घटस्थापना के कलश में क्या-क्या वस्तुएं डाली जाती हैं?
कलश के अंदर शुद्ध जल, एक सिक्का, अक्षत, दो साबुत सुपारी, दो इलायची, एक हल्दी की गांठ और दो साबुत लौंग डाली जाती हैं।

### 3. कलश के ऊपर कौन से पत्ते और किस प्रकार का नारियल रखा जाता है?
कलश के मुख पर एक साथ जुड़े हुए 8 आम के पत्ते सजाए जाते हैं और उसके ऊपर लाल चुनरी व कलावा में बंधा हुआ नारियल रखा जाता है।

### 4. जौ बोने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होती है?
जौ बोने के लिए एक बड़ा मिट्टी का कटोरा, साफ काली मिट्टी, जौ और गेहूं के दाने, शुद्ध जल और कलावा चाहिए होता है।

### 5. नवरात्रि के पहले दिन प्रतिमा स्थापना कैसे की जाती है?
एक स्वच्छ स्थान पर लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछाया जाता है, अक्षत रखकर देवी दुर्गा और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और समीप ही कलश रखा जाता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._