# शीतकालीन कपाट बंद होने से पहले दीपोत्सव पर फूलों से महका केदारनाथ धाम

> केदारनाथ धाम में दिवाली के पावन अवसर पर मंदिर परिसर को करीब 18 से 20 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है, जबकि कपाट बंद होने की औपचारिक प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/shitakalina-kapata-bnda-hone-se-pahale-dipotsava-para-phulon-se-mahaka-kedarnath-dhama-57437 · **Language:** Hindi
**Tags:** केदारनाथ, केदारनाथ मंदिर, दिवाली, उत्तराखंड, भुकुंड भैरवनाथ, बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति, चारधाम यात्रा

हिमालय की सुरम्य वादियों में स्थित बाबा केदारनाथ के पावन धाम में इस बार दिवाली के अवसर पर अलौकिक और मनमोहक दृश्य देखने को मिल रहा है। शीतकाल के आगमन और मंदिर के कपाट बंद होने से ठीक पहले संपूर्ण मंदिर परिसर को भव्य तरीके से संवारा गया है। यहां की छटा ऐसी है कि धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की नजरें मंदिर की भव्यता से हट नहीं रही हैं। आस्था और उत्सव के इस अद्भुत संगम ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया है। देश के विभिन्न कोनों से पहुंचे भक्त न केवल बाबा केदार के दर्शन कर आत्मिक शांति प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि दिवाली के पावन पर्व की खुशियों को भी इस पवित्र स्थल पर महसूस कर रहे हैं।

## फूलों की मनमोहक सुगंध से महका मंदिर प्रांगण
इस पावन पर्व पर श्री केदारनाथ धाम के मुख्य मंदिर और पूरे प्रांगण को सजाने के लिए करीब 18 से 20 क्विंटल विविध किस्मों के ताजे और रंग-बिरंगे फूलों का इस्तेमाल किया गया है। इन खूबसूरत फूलों की लड़ियों और सुंदर कलाकृतियों से मंदिर के हर कोने को सजाया गया है, जिससे पूरे परिसर का रूप भव्य और दिव्य नजर आ रहा है। दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए यह सजावट विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने इस भव्य अवसर पर देश और उत्तराखंड के सभी नागरिकों को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उनका कहना है कि इस अनुपम सजावट ने धाम की आध्यात्मिक आभा को और अधिक बढ़ा दिया है।

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## भगवान भुकुंड भैरवनाथ के कपाट बंद होने की विधि
केदारनाथ धाम में दीपोत्सव की रौनक के बीच शीतकाल के लिए कपाट बंद करने की धार्मिक परंपराओं की शुरुआत भी हो चुकी है। धाम के क्षेत्रपाल और रक्षक माने जाने वाले भगवान भुकुंड भैरवनाथ जी के मंदिर के कपाट आज शीतकालीन अवधि के लिए विधिवत रूप से बंद किए जा रहे हैं। सनातन परंपराओं और शास्त्रों में वर्णित विधि-विधान के अनुसार यह महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है। इस अनुष्ठान के दौरान स्थानीय हक-हकूकधारी, तीर्थ पुरोहित समाज के प्रमुख प्रतिनिधि और श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस बल तथा स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी इस धार्मिक प्रक्रिया में शामिल हुए।

## 11 नवंबर को बंद होंगे बाबा केदार के मुख्य कपाट
धाम की प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक क्षेत्रपाल भगवान भुकुंड भैरवनाथ जी के कपाट बंद होने के साथ ही बाबा केदारनाथ के मुख्य मंदिर को शीतकाल के लिए बंद करने का औपचारिक सिलसिला प्रारंभ हो जाता है। मंदिर समिति के सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने स्पष्ट किया है कि बाबा केदारनाथ के मुख्य कपाट आगामी 11 नवंबर को पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस वर्ष बाबा केदार के साक्षात दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं के पास अब बेहद सीमित समय बचा है। इसके बाद शीतकालीन प्रवास के दौरान बाबा की पूजा-अर्चना उनके गद्दी स्थल पर विधिवत संपन्न होगी।

## श्रद्धालुओं से मर्यादा बनाए रखने की खास अपील
मंदिर समिति ने इस विशेष अवसर पर धाम पहुंच रहे सभी तीर्थयात्रियों से खास अपील भी की है। डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने कहा कि श्रद्धालु दिवाली के इस पवित्र पर्व पर केदारनाथ धाम पहुंचकर दीप अवश्य प्रज्वलित करें और सामूहिक दीपोत्सव का हिस्सा बनें। इसके साथ ही उन्होंने सभी भक्तों से आग्रह किया कि वे हिमालयी धाम की गरिमा, मर्यादा और पवित्रता का पूरा ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनुचित गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहें। उच्च हिमालयी क्षेत्र के शांत वातावरण, धार्मिक मर्यादाओं और परंपराओं के संरक्षण में प्रशासन व मंदिर समिति का पूरा सहयोग करें ताकि यात्रा का यह अंतिम चरण शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो सके।

## इसका आप पर असर
दिवाली पर केदारनाथ धाम की भव्य सजावट और कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू होने से तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा के कुछ ही दिन शेष बचे हैं।

- **भारत में:** देश भर के शिव भक्तों के लिए इस साल केदारनाथ मंदिर में दर्शन करने का अंतिम अवसर 11 नवंबर तक ही उपलब्ध रहेगा। इसके बाद शीतकाल के लिए कपाट बंद हो जाएंगे और श्रद्धालु मुख्य मंदिर में दर्शन नहीं कर सकेंगे।
- **उत्तराखंड में:** राज्य में चारधाम यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच रही है, जिससे यात्रा मार्गों पर दर्शनार्थियों की भीड़ नियंत्रित होने लगेगी। स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन अब शीतकालीन पूजा और उत्सव के समापन की तैयारियों में जुट गए हैं।
- **तीर्थयात्रियों के लिए:** वर्तमान में धाम पहुंच रहे भक्तों को दिवाली के दीपोत्सव में शामिल होने और 18 से 20 क्विंटल फूलों से सजे भव्य दरबार के दर्शन का विशेष अवसर मिल रहा है। जो यात्री यात्रा की योजना बना रहे हैं, उन्हें 11 नवंबर से पहले अपनी यात्रा पूरी करनी होगी।
- **आचार संहिता व अनुशासन:** मंदिर समिति ने धाम की मर्यादा और शांति बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए हैं। परिसर में किसी भी तरह की अव्यवस्था फैलाने से बचने और दीपोत्सव में शांतिपूर्ण भागीदारी की अपील की गई है।

## ऐसा क्यों हुआ
केदारनाथ धाम में शीतकाल के दौरान भीषण ठंड और भारी बर्फबारी के चलते हर साल कपाट बंद करने की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा निभाई जाती है।

- **परंपरागत व्यवस्था:** उच्च हिमालयी क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में अत्यधिक बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण मंदिर को आम दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत सबसे पहले क्षेत्रपाल देवता के कपाट बंद करने से होती है।
- **भैरवनाथ जी का अनुष्ठान:** धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धाम के रक्षक भगवान भुकुंड भैरवनाथ के कपाट आज बंद किए जा रहे हैं। परंपरा के तहत मुख्य मंदिर से पहले भैरवनाथ जी के कपाट बंद करने का विधान अनिवार्य माना जाता है।
- **अंतिम तिथि का निर्धारण:** पंचांग और धार्मिक गणनाओं के आधार पर इस वर्ष बाबा केदारनाथ के मुख्य कपाट बंद करने की तिथि 11 नवंबर तय की गई है। इसके साथ ही मंदिर समिति ने दिवाली के अवसर पर मंदिर प्रांगण को भव्य रूप देने के लिए व्यापक सजावट की है।

## सवाल-जवाब

### 1. दिवाली पर केदारनाथ धाम को सजाने के लिए कितने फूलों का उपयोग किया गया है?
दिवाली के अवसर पर केदारनाथ मंदिर और उसके प्रांगण को सजाने के लिए करीब 18 से 20 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों का इस्तेमाल किया गया है।

### 2. भगवान भुकुंड भैरवनाथ के कपाट कब बंद किए जा रहे हैं?
धाम के क्षेत्रपाल भगवान भुकुंड भैरवनाथ के कपाट धार्मिक विधि-विधान के साथ आज शीतकाल के लिए बंद किए जा रहे हैं।

### 3. बाबा केदारनाथ के मुख्य मंदिर के कपाट किस तारीख को बंद होंगे?
बाबा केदारनाथ के मुख्य कपाट 11 नवंबर को विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।

### 4. भैरवनाथ जी के कपाट बंद होने के दौरान कौन-कौन उपस्थित रहा?
इस अनुष्ठान में स्थानीय हक-हकूकधारी, तीर्थ पुरोहित समाज, मंदिर समिति के प्रतिनिधि, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।

### 5. मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से क्या अपील की है?
मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से दिवाली पर दीप जलाने, मंदिर की मर्यादा बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से दूर रहने की अपील की है।

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