श्रावण पुत्रदा एकादशी का पारण कब होगा? जानें व्रत खोलने की सही टाइमिंग और पूरी विधि श्रावण पुत्रदा एकादशी के व्रत का पारण 24 और 25 अगस्त 2026 को किया जाएगा। जानिए व्रत खोलने का सही समय, मुहूर्त और विधि। हिंदू धर्म में श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत बेहद खास माना जाता है। इस साल यह एकादशी दो दिन यानी 23 और 24 अगस्त को मनाई गई है। गृहस्थ जीवन जीने वालों ने यह व्रत 23 अगस्त को रखा था, जबकि वैष्णव परंपरा के अनुसार इसका पालन करने वालों ने 24 अगस्त को व्रत रखा। जिन लोगों ने 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत किया था, वे आज इस व्रत का पारण कर रहे हैं। वहीं, 24 अगस्त को व्रत रखने वाले श्रद्धालु 25 अगस्त की सुबह अपना व्रत खोलेंगे। यहां दोनों ही दिनों के व्रत पारण से जुड़ी सटीक टाइमिंग और नियमों की पूरी जानकारी दी जा रही है ताकि आप सही विधि से व्रत संपन्न कर सकें। सावन पुत्रदा एकादशी पारण समय: 24 अगस्त 2026 वर्ष 2026 में 24 अगस्त को श्रावण पुत्रदा एकादशी का पारण करने के लिए दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 16 मिनट तक का समय निर्धारित किया गया है। श्रद्धालु इस तयशुदा समय के भीतर कभी भी अपना व्रत खोल सकते हैं। इसके अलावा, पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 10 बजकर 49 मिनट का है, जिसके बाद ही व्रत खोलने की प्रक्रिया शुरू होती है। सावन पुत्रदा एकादशी व्रत पारण समय: 25 अगस्त 2026 जो श्रद्धालु 24 अगस्त को वैष्णव परंपरा के तहत व्रत रख रहे हैं, वे 25 अगस्त 2026 को सुबह 05 बजकर 55 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 20 मिनट के बीच अपना व्रत खोलेंगे। इस अल्प अवधि के अंतराल में व्रत का पारण किया जा सकता है। खास बात यह है कि पारण तिथि के दिन द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय सुबह 06 बजकर 20 मिनट का ही है, इसलिए इस समयावधि का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत पारण विधि • सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि के दिन सूर्योदय के पश्चात और हरिवासर के समाप्त होने के बाद ही किया जाना चाहिए। • व्रत का पारण करने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और इसके बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न करें। • पूजा के दौरान भगवान को तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, जिसका धार्मिक अनुष्ठानों में बहुत अधिक महत्व होता है। • पूजा संपन्न होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा दें। • इसके पश्चात भगवान को अर्पित किया गया तुलसी दल और चरणामृत ग्रहण करके ही अपने व्रत का पारण करना चाहिए। • इस बात का विशेष ध्यान रखें कि व्रत का पारण हमेशा शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करके ही किया जाना चाहिए। श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस पावन एकादशी के प्रभाव से संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन में खुशहाली आती है। इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु को पवित्रा अर्पित की जाती है। यह सूती धागों से तैयार की जाने वाली एक पवित्र डोरी होती है। कई परिवारों में इस पवित्रा को अगले साल तक के लिए संभालकर पूजा स्थान पर ही सुरक्षित रख दिया जाता है। इसका आप पर असर देशभर में: • भारत में: व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा और तिथि के अनुसार तयशुदा शुभ मुहूर्त में ही अन्न-जल ग्रहण करके अपना उपवास खोलें। सवाल-जवाब 1. श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 कब मनाई गई? इस साल श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 और 24 अगस्त 2026 को दो दिन मनाई गई। 2. 24 अगस्त 2026 को व्रत पारण का समय क्या था? 24 अगस्त को व्रत पारण का समय दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक था। 3. 25 अगस्त 2026 को व्रत खोलने का शुभ मुहूर्त कब है? 25 अगस्त को व्रत खोलने का समय सुबह 05:55 बजे से 06:20 बजे तक रहेगा। 4. एकादशी व्रत का पारण किस विधि से करना चाहिए? सूर्योदय के बाद स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें, तुलसी दल और चरणामृत ग्रहण करें तथा सात्विक भोजन से पारण करें। https://trendkia.com/religion/shravan-putrada-ekadashi-ka-parana-kab-hoga-jane-vrat-kholne-ki-sahi-timing-aur-puri-vidhi-20916 TrendKia — Har trend, sabse pehle.